दैनिक भास्कर हिंदी: शनि प्रदोष व्रत 2018: इन उपायों से मिलेगा अक्षय फल 

May 26th, 2018

डिजिटल डेस्क, भोपाल। प्रत्येक कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत कहते हैं। इस व्रत का हिन्दू धर्म में अत्यधिक महत्व है। सोमवार के दिन प्रदोष पड़ने से उसे सोम प्रदोष कहा जाता है, मंगलवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ने से इसे भौम प्रदोष कहा जाता है, इसी प्रकार शनिवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ने से इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। इन तीनों का ही अलग-अलग महत्व बताया गया है। सूर्यास्त के बाद रात्रि के आने से पूर्व का समय प्रदोष काल कहलाता है। इस व्रत में महादेव भोले शंकर की पूजा की जाती है। इस बार 26 मई को प्रदोष व्रत पड़ रहा है, इस दिन शनिवार होने से ये तिथि शनि प्रदोष व्रत में परिवर्तित हो गई है।

इस व्रत में व्रती को निर्जल रहकर व्रत रखना होता है। प्रात: काल स्नान करके भगवान शिव की बेल पत्र, गंगाजल, अक्षत, धूप, दीप से पूजा करें। संध्या काल में पुन: स्नान करके इसी प्रकार से शिव जी की पूजा करनी चाहिए। इस प्रकार प्रदोष व्रत करने से व्रती को पुण्य मिलता है।

यदि आप व्रत करने में सक्षम नहीं हैं तो शनि प्रदोष व्रत कथा अवश्य पढ़ें और भगवान शिव पर देसी घी चढ़ाकर घी का दीपक जलाएं और शनि देव पर सरसों का तेल अर्पित कर सरसों के तेल का चार मुखी दीपक जलाएं। इससे अक्षय पुण्यों की प्राप्ति होती है और भगवान शिव व शनिदेव की कृपा भी प्राप्त होती है।

शनि प्रदोष व्रत कथा

प्राचीन समय की बात है। एक नगर सेठ धन-दौलत और वैभव से संपन्न था। वह अत्यंत दयालु था। उसके यहां से कभी कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता था। वह सभी को जी भरकर दान-दक्षिणा देता था। लेकिन दूसरों को सुखी देखने वाले सेठ और उसकी पत्‍नी स्वयं काफी दुखी थे। दुःख का कारण था उनकी संतान न होना। सन्तानहीनता के कारण दोनों घुले जा रहे थे।

एक दिन उन्होंने तीर्थयात्रा पर जाने का निश्‍चय किया और अपना काम-काज सेवकों को सौंपकर चल पड़े। अभी वे नगर के बाहर ही निकले थे कि उन्हें एक विशाल वृक्ष के नीचे समाधि लगाए एक तेजस्वी साधु दिखाई पड़े। दोनों ने सोचा कि साधु महाराज तेजस्वी हैं क्यों ना इनसे आशीर्वाद लिया जाए ऐसा सोचते हुए पति-पत्‍नी दोनों समाधिलीन साधु के सामने हाथ जोड़कर बैठ गए और उनकी समाधि टूटने की प्रतीक्षा करने लगे।

सुबह से शाम और फिर रात हो गई, लेकिन साधु की समाधि नहीं टूटी मगर पति-पत्‍नी धैर्यपूर्वक हाथ जोड़े पूर्ववत बैठे रहे।

अंततः अगले दिन प्रातः काल साधु समाधि से उठे। सेठ पति-पत्‍नी को देख वह मन्द-मन्द मुस्कराए और आशीर्वाद स्वरूप हाथ उठाकर बोले, ‘मैं तुम्हारे अन्तर्मन की कथा भांप गया हूं वत्स ! मैं तुम्हारे धैर्य और भक्तिभाव से अत्यन्त प्रसन्न हूं।’

साधु ने सन्तान प्राप्ति के लिए उन्हें शनि प्रदोष व्रत करने की विधि समझाई और शंकर भगवान की वन्दना बताई।


हे रुद्रदेव शिव नमस्कार। 
शिव शंकर जगगुरु नमस्कार॥ 
हे नीलकंठ सुर नमस्कार। 
शशि मौलि चन्द्र सुख नमस्कार॥ 
हे उमाकान्त सुधि नमस्कार। 
उग्रत्व रूप मन नमस्कार॥ 
ईशान ईश प्रभु नमस्कार। 
विश्‍वेश्वर प्रभु शिव नमस्कार॥

 

तीर्थ यात्रा के बाद दोनों वापस घर लौटे और नियमपूर्वक शनि प्रदोष व्रत करने लगे। कालान्तर में सेठ की पत्‍नी ने एक सुन्दर पुत्र को जन्म दिया। शनि प्रदोष व्रत के प्रभाव से उनके यहां छाया अंधकार लुप्त हो गया। दोनों आनंदपूर्वक रहने लगे।

शनि प्रदोष में विशेष कर भगवान को तिल का भोग अर्पित करना चाहिए साथ ही गरीबों को भी भोग खिलाना चाहिए। काले छाते व जूते का दान करना चाहिए। इससे राशि में चंद्रदेव से होने वाले सभी दोषों से और शनि के प्रभाव से भी मुक्ति मिलती है।

 


आज के दिन ये उपाय करने से शनि की कृपा बनी रहेगी। इसके साथ ही आपकी कुंडली में लगा साढ़े साती का प्रभाव कम होगा।
 

  • शनि प्रदोष व्रत के दिन कांसे की कटोरी में तिल का तेल लेकर उसमें अपना चेहरा देखें और फिर उसे शनिदेव का दान लेने वाले व्यक्ति, यानी डाकोत को दान कर दें। इससे आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी।

 

  • इस दिन एक काले कपड़े में काले उड़द, सवा किलो अनाज, दो लड्डू, कोयला व लोहे की कील लपेटकर बहते हुए साफ जल में प्रवाहित कर दें।

 

  • काली गाय को बूंदी के लड्डू खिलाएं और गाय के माथे पर कुमकुम का तिलक लगाकर पूजा करें। प्रदोष व्रत से शुरू करके यह उपाय आप हर शनिवार को भी कर सकते हैं। इससे शनिदेव आपसे प्रसन्न होंगे।

 

  • काले कुत्ते को तेल से चुपड़ी हुई रोटी खिलाएं। इससे आपको कभी भी अन्न-धन की कमी नहीं होगी।

 

  • शनि स्तोत्र का पाठ करने से शनि के अशुभ प्रभाव के कारण जीवन में आ रही परेशानियों में कमी आती है। व्रत करने वाले को कम से कम 11 बार यह पाठ अवश्य करना चाहिए।

 

  • शनि प्रदोष के दिन शनि यंत्र की प्रतिष्ठा करके रोज उसके सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं और नीले या काले रंग का कोई फूल चढ़ाएं। साथ ही यंत्र के सामने बैठकर शनि के मंत्र 'ऊं शं शनैश्चराय नम:' का जाप करें। ऐसा करने से सभी प्रकार के रोगों से, कर्ज, मुकदमे आदि से राहत मिलती है। नौकरी पेशा लोगों की उन्नति में भी यह उपाय कारगर सिद्ध होता है।

 

  • शनि के दोषों से बचने के लिए अगर शनि के साथ-साथ हनुमान जी के भी उपाय किए जाएं, तो मनोकामना जल्द पूरी होती है। आइये आपको बताते हैं कि शनिदोष के निवारण के लिए भगवान हनुमान को कैसे प्रसन्न करें।

 

  • इस दिन जहां शनिदेव को तिल, तेल, काले वस्त्र आदि चढ़ाए जाते हैं, वहीं हनुमान जी को सिंदूर, लाल चंदन, फूल, चावल व लाल वस्त्र चढ़ाएं। साथ ही हनुमान जी को गुड़ से बनी किसी चीज़ का भोग लगाएं, इससे हनुमान जी के साथ-साथ शनिदेव भी आपसे प्रसन्न होंगे और उनकी असीम कृपा आप पर बनी रहेगी।

 

  • जिनकी साढ़े-साती चल रही हो, उन्हें इस दिन हनुमान जी पर चमेली का तेल चढ़ाना चाहिए।

 

  • 8 बरगद के पत्ते या फिर मदार या ढाक के पत्ते काले धागे में पिरोकर या फिर लौंग लगा हुआ पान का बीड़ा हनुमान जी पर चढ़ाने से शनि बाधा से मुक्ति मिलती है।
     
  • आठ बादाम लाकर, उन्हें हनुमान जी के पैरों में स्पर्श कराकर आधे बादाम काले कपड़े में बांधकर घर की पश्चिम दिशा में छुपाकर रखने से शनि का कोप शांत होता है, बाकी आधे हनुमान जी को अर्पित कर दें।