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श्रावण मास में करें रुद्राक्ष धारण, मिलेगा लाभ

August 01st, 2018 09:03 IST

डिजिटल डेस्क, भोपाल। श्रावण मास में रुद्राक्ष धारण करना बहुत ही लाभकारी होता है। इस मास में एक से लेकर बारह मुखी रुद्रक्ष धारण करने का अपना एक अलग महत्व है। रुद्राक्ष पेड़ के फल की गुठली होती है। इस गुठली पर प्राकृतिक रूप से कुछ सीधी धारियां होती हैं। ये धारियां स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। इन धारियों की गिनती के आधार पर ही रुद्राक्ष के मुख की गणना होती है।

रुद्राक्ष धारण करने के लाभ

रुद्राक्ष भगवान शंकर का प्रिय आभूषण है। 
जिस घर में रुद्राक्ष की पूजा की जाती है वहां सदा लक्ष्मी का वास रहता है। 
रुद्राक्ष दीर्घायु प्रदान करता है। 
रुद्राक्ष गृहस्थियों के लिए अर्थ और काम का दाता है। 
रुद्राक्ष मन को शांति प्रदान करता है। 
रुद्राक्ष की पूजा से सभी दुःखों से छुटकारा मिल जाता है। 
रुद्राक्ष सभी वणो के पाप का नाश करता है। 
रुद्राक्ष पहनने से ह्रदय रोग बहुत जल्दी सही होते हैं। 
रुद्राक्ष पहनने से मानसिक व्याधियों से मुक्ति मिलती है। 
रुद्राक्ष तेज तथा ओज में अपूर्व वृद्धि करता है। 
रुद्राक्ष धारण करने से दुष्ट ग्रहों की अशुभता शरीर में होने वाला विषैला संक्रामण और कुद्रष्टि दोष, राक्षसी प्रवृत्ति और दोष शांत रहते हैं।

आपको बताएंगे कि बारह मुखी रुद्रक्ष में किस रुद्राक्ष की क्या विशेषता होती है।


1. एक मुखी रुद्राक्ष

एक मुखी रुद्राक्ष में एक प्राकृतिक धारी होती है। इसे साक्षात भगवान शिव का ही रूप माना जाता है। इसमें स्वयं भगवान शिव ही विराजते हैं। एक मुखी के विषय में कहा गया है कि इसके दर्शन मात्र से ही मानव का कल्याण हो जाता है। यह ब्रह्म हत्या जैसे महापाप को नष्ट करता है। जिस घर में यह होता है उस घर में लक्ष्मी विशेष रूप से विराजती हैं। यह धारणकर्ता को सभी प्रकार की हानि तथा भय से दूर रखता है।

एक मुखी रुद्राक्ष सर्वोत्तम, सर्वमनोकामना सिद्धि, फलदायक और मोक्षदाता है। इसे सभी रुद्राक्षो में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इसको धारण करने से सभी प्रकार के अनिष्ट दूर हो जाते हैं। चाहे वह परिस्थितिवश हो अथवा शत्रु जनित। एक मुखी रुद्राक्ष को पूजने से मनवांछित फल प्राप्त होता है। जिसके गले में या पूजन में एक मुखी रुद्राक्ष है उस व्यक्ति के शत्रु स्वयं ही परास्त हो जाते हैं। एक मुखी रुद्राक्ष धारण करने से अवश्य ही पुण्य उदय होता है। एक मुखी रुद्राक्ष मानसिक शांति देकर मानव के समस्त पाप तथा संकट हर लेता है।

एक मुखी रुद्राक्ष अत्यंत दुर्लभ होता है यह अन्य रुद्राक्षों की अपेक्षा बहुत ही कम मात्रा में प्राप्त होता है। बाजार में इस समय काजू की तरह दिखने वाला एक मुखी रुद्राक्ष बहुत अधिक मात्रा में प्रचलित है जो कि उत्तम नहीं है आपको गोल वाला एक मुखी रुद्राक्ष ही उपयोग करने से लाभ प्राप्त होगा। एक मुखी रुद्राक्ष के दोनों ओर सोने की टोपी मढ़वाकर धारण करना उत्तम रहता है। यही पूजन के लिए अति उत्तम है। इसे आप अपने पूजन स्थान पर चाँदी की प्लेट या सिंहासन पर रखकर प्रतिदिन पूजा कर सकते है। एक मुखी रुद्राक्ष गल्ले(धन भंडार) में रखने से गल्ला कभी धन से खाली नहीं होता है

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2. दो मुखी रुद्राक्ष के लाभ

दो मुखी रुद्राक्ष में दो धारी होती हैं। यह रुद्राक्ष अर्ध नारीश्वर स्वरूप है, यह शिव तथा शक्ति का रूप है। इसे धारण करने से भगवान शिव तथा माता पार्वती दोनों ही प्रसन्न होते हैं। दो मुखी रुद्राक्ष पाप से मुक्ति दिलाता है तथा यह मन और दिमाग को सन्तुलित रखता है। इसको धारण से मनुष्य की बुद्धि जाग्रत होती है तथा घर में हर प्रकार की सुख सुविधा उपलब्ध होती है। इसको धारण करने से पति पत्नी में एकात्म भाव उत्पन्न होता है। यह रुद्राक्ष धारण करने वाला श्रद्धा तथा विश्वास का सांसारिक ऐश्वर्य की प्राप्ति कराता है तथा घर में क्लेश के कारण को जड़ से दूर करता है। यह व्यापार में भी सफलता दिलाता है।

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3. तीन मुखी रुद्राक्ष के लाभ

तीन मुखी रुद्राक्ष में 3 धारियां होती हैं। तीन मुखी रुद्राक्ष को अग्नि स्वरूप माना जाता है। यह सत, रज, तथा तम, इन तीनों का त्रिगुणात्मक शक्ति रूप है। इस रुद्राक्ष में ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों शक्तियों का समावेश होता है। इसके साथ-साथ इसमें तीनों लोक अर्थात आकाश, पृथ्वी, पाताल, की भी शक्तियां निहित भाव से होती है। यह मानव को त्रिलोकदर्शी बनाकर भूत, भविष्य तथा वर्तमान के बारे में बताता है। इसको धारण करने से व्यक्ति की विध्वंसात्मक प्रवृत्तियों का अंत होता है तथा रचनात्मक प्रवृत्ति का उदय होता है। जो विद्यार्थी पढ़ने में कमजोर हो वह इसे धारण करके अदभुत लाभ उठा सकते हैं। इसको धारण करने से मन में दया, धर्म, परोपकार के भाव पैदा होते हैं। यह पर स्त्री गमन के पापों को नष्ट करता है यह धारण एवं पूजन करने वाले के सभी पापों का अन्त कर उसे तेजस्वी बनाता है।

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4. चार मुखी रुद्राक्ष के लाभ

चार मुखी रुद्राक्ष में चार धारियां होती हैं। ये धारिया स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। चार मुखी रुद्राक्ष चतुर्मुख ब्रह्मा का स्वरूप माना गया है और चार वेदों का रूप माना गया है। यह मनुष्य को धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष चतुवर्ग देने वाला है। यह चारों वर्ण ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, व शुद्र तथा चारों आश्रम ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ तथा सन्यास के द्वारा पूजित और परम वन्दनीय है। इसको धारण करने वाला धनाड्य, आरोग्यवान, ज्ञानवान बन जाता है। चार मुखी रुद्राक्ष वृद्धिदाता है। जिस बालक की बुद्धि पढ़ने में कमजोर हो या बोलने में अटकता हो उसके लिए भी यह उत्तम है। चार मुखी रुद्राक्ष धारण करने से मानसिक रोग में शान्ति मिलती है तथा धारण करने वाले का स्वास्थ्य ठीक रहता है। इसे धारण करने से नर हत्या का पाप दूर होता है। अग्नि पुराण में इसके बारे में लिखा है कि इसको धारण करने से व्याभिचारी भी ब्रह्मचारी तथा नास्तिक भी आस्तिक हो जाता है।

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5. पांच मुखी रुद्राक्ष के लाभ

पाँच मुखी रुद्राक्ष पर पांच धारियां होती हैं पाँच मुखी रुद्राक्ष साक्षात रूद्र स्वरूप है, रुधोजात, ईशान, तत्पुरुष, अघोर, तथा कामदेव, शिव के ये पांचो रूप पंच मुखी रुद्राक्ष में निवास करते हैं। पंचमुखी रुद्राक्ष को पंचमुख ब्रह्मा का स्वरूप माना जाता है। इसके पांच मुखों को भगवान शिव का पंचानन स्वरूप माना गया है। मानव इस संसार में जो भी ज्ञान रूपी सम्पत्ति उपार्जित करता है वह सुस्पष्ट और स्थायी हो तभी उसकी सार्थकता है। आध्यात्मिक ज्ञान की रक्षा के लिए पाँच मुखी रुद्राक्ष विशेष उपयोगी होता है। यह रुद्राक्ष हृदय को स्वच्छ, मन को शान्त तथा दिमाग को शीतल रखता है। पंचमुखी रुद्राक्ष दीर्घायु और अपूर्व स्वास्थ्य प्रदान करता है। यह मनुष्य को उन्नति पथ पर चलने का बल देता है तथा उन्हें आध्यात्मिक सुख की प्राप्ति कराता है। पंचमुखी रुद्राक्ष रूद्र का प्रतीक माना जाता है। यह पर स्त्री गमन के पाप को हरता है तथा इसे धारण करने से सभी प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं। इसके धारक को किसी प्रकार का दुःख पैदा नहीं होने देता है वैसे तो इसके गुण अनन्त है। इसलिये इसे अत्यन्त प्रभावशाली तथा महिमामय माना जाता है। पंचमुखी रुद्राक्ष के कम से कम तीन या पांच दाने धारण करने से ये लाभ प्रदान करता है।

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6. छः मुखी रुद्राक्ष के लाभ

छः मुखी रुद्राक्ष पर छः धारियां होती है। छः मुखी रुद्राक्ष शिवजी के पुत्र कुमार कार्तिकेय की शक्ति का केन्द्र बिंदु है। यह विद्या, ज्ञान, बुद्धि का प्रदाता है। छः मुखी रुद्राक्ष पढ़ने वाले छात्रों, बौद्धिक कार्य करने वालों को बल प्रदान करता है। यह विद्या अध्ययन में बहुत ही अदभुत शक्ति देता है। छः मुखी रुद्राक्ष के बारे में कहा जाता है कि यह छह प्रकार की बुराइयों जैसे- काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर को नष्ट करता है।

इसको धारण करने से मनुष्य की खोई हुई शक्तियां पुन: जाग्रत हो जाती है एवं स्मरण शक्ति प्रबल होती है और बुद्धि का विकास अति तेज गति से होता है। यह धारण करने वाले को आत्म शक्ति, संकल्प शक्ति, ज्ञान शक्ति, अध्ययन शक्ति, रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है। इसे धारण करने से चर्म रोग, हृदय की दुर्बलता तथा नेत्र रोग दूर होते हैं। यह दरिद्रता का नाश करता है। छः मुखी धारण करने वाला व्यक्ति इसे विधि-विधान से धारण करता है तो वो शिक्षा, काव्य, व्याकरण, छंद, ज्योतिषचार्य, चारों वेद, रामायण तथा महाभारत आदि ग्रन्थों का विद्वान हो सकता है। इसे धारण करने से सुख सुविधा की अवश्य प्राप्ति होती है।

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7. सात मुखी रुद्राक्ष के लाभ

सात मुखी रुद्राक्ष के ऊपर सात धारियां होती हैं। सात मुखी रुद्राक्ष सप्त ऋषियों का स्वरूप है। ऋषिजन सदा से संसार के कल्याण में कार्यरत रहते हैं। अतः सात मुखी रुद्राक्ष धारण करने से सप्त ऋषियों का आशीर्वाद सर पर सदा बना रहता है जिस कारण से उस मनुष्य का सदा कल्याण होता है। इसके साथ ही यह सात माताओं ब्राह्मणी, महेश्वरी, कौमारी, वैष्णवी, इन्द्राणी, चामुण्डा, का मिश्रित स्वरूप भी है। इन माताओं के प्रभाव से यह पूर्ण ओज, तेज, ज्ञान, बल और सुरक्षा प्रदान करके आर्थिक शारीरिक तथा मानसिक विपत्तियों को दूर करता है। यह उन सात आवरणों का भी दोष मिटाता है जिससे मानव शरीर निर्मित होता है जेसे- पृथ्वी, जल, वायु, आकाश अग्नि, महत्व और अहंकार।

सात मुखी रुद्राक्ष धन सम्पति, कीर्ति और विजय प्रदान करने वाला होता है। इसको धारण करने से धनागम बना रहता है साथ ही व्यापार नौकरी में उन्नति भी होती है। यह रुद्राक्ष सात शक्ति शाली नागों का भी प्रिय है। सात मुखी रुद्राक्ष साक्षात अनग स्वरूप है। इसे काम देव के नाम से भी जाना जाता है। इसलिये इसको धारण करने से मनुष्य स्त्रियों के आकर्षण का केन्द्र बना रहता है तथा पूर्ण स्त्री सुख मिलता है। इसको धारण करने से स्वर्ण चोरी के पाप से भी मुक्ति मिलती है।

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8. आठ मुखी रुद्राक्ष के लाभ

आठ मुखी रुद्राक्ष या अष्टमुखी रुद्राक्ष पर आठ धारियां होती हैं। अष्टमुखी रुद्राक्ष गणेश भगवान का स्वरूप है। भगवान गणेश सभी देवों में प्रथम पूज्य हैं। अष्टमुखी रुद्राक्ष को अष्टमूर्ति - पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि, आकाश, सूर्य, चन्द्र, और यजमान स्वरूप साक्षात शिव का शरीर माना जाता है।

मानव में भगवान की बनायी आठ प्रकृति- 
भूमि, आकाश, जल, अग्नि, वायु, मन, बुद्धि, अहंकार के आधीन रहता है। अष्टमुखी रुद्राक्ष धारण करने से आठों प्रवृत्तियां सहयोग प्रदान करती हैं, जिससे आठों दिशाओं में विजय प्राप्त होती है। जिस प्रकार सात मुखी रुद्राक्ष पहनने वालों की रक्षा सात माताएं करती हैं उसी प्रकार अष्टमुखी रुद्राक्ष धारण करने वाले की रक्षा आठ देवियां करती हैं। इसको धारण करने से गणेश भगवान की कृपा बनी रहती है। इसको धारण करके कोर्ट कचहरी के मामलो में असफलता का मुह नहीं देखना पड़ता तथा दैविक, दैहिक तथा भौतिक कष्टों का अन्त होता है। यह मनुष्य को अंतर्मुखी बनाकर उसके जीवन की समस्त उथल-पुथल समाप्त कर नीचे से ऊपर उठने का मार्ग प्रशस्त करता है।

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9. नौ मुखी रुद्राक्ष के लाभ

नौ मुखी रुद्राक्ष में नौ धारियां होती हैं। नौ मुखी रुद्राक्ष को नव शक्ति सम्पन्न माना जाता है। दुर्गा जी के सभी नव अवतारों की पूर्ण शक्तियां इसमें समाई होती हैं इसलिए यह धारण करने वाले को अलौकिक दिव्य शक्तियां प्रदान करता है। नौ मुखी रुद्राक्ष में नौ तीर्थों पशुपतिनाथ, केदारनाथ, सोमनाथ, मुक्तिनाथ, बद्रीनाथ, विश्वनाथ, जगन्नाथ, पारसनाथ एवं वैधनाथ के दर्शन का पुण्य लाभ होता है।

वैसे तो सभी रुद्राक्ष शिव शक्ति के रूप हैं, परन्तु नौ मुखी रुद्राक्ष देवी माता के उपासकों के लिए विशेष हितकर होता है। इसको धारण करने से वीरता, धीरता, साहस, कर्मठता, पराक्रम, सहनशीलता, तथा यश की वृद्धि की होती है, यह रुद्राक्ष धारण करने वाले को नवरात्रों के व्रत के समान पुण्य देता है तथा पति पत्नी, पिता-पुत्र के मतभेदों को दूर कर तन-मन से सदा पवित्र रखता है।

नौ मुखी रुद्राक्ष के देवता भैरव एवं यमराज हैं। इसको धारण करने से यमराज का भय नहीं रहता है, और इसको धारण करने वाला सदा सबका हित चिंतक होता है। यह धारण करने वाले की नौ ग्रहों से रक्षा करता है, तथा उन ग्रहों के परिणाम को धारण करने वाले के पक्ष में करवाता है।

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10. दस मुखी रुद्राक्ष के लाभ

दस मुखी रुद्राक्ष में दस धारियां होती हैं। ये भगवान विष्णु का स्वरूप है, इसे दशावतार मत्स्य, कृष्ण, राम, परशुराम, वाराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, बुद्ध, महावीर के स्वरूप का प्रतीक माना जाता है। इसे धारण करने से दसों देवता अति प्रसन्न होकर धारण करने वाले को अनेक प्रकार की दिव्य शक्तियां प्रदान करते हैं। इसको धारण करने से दसों दिशाएं तथा दिक्पाल कुबेर, इन्द्र, अग्नि यम, वरुण, वायु, ईशान, अनन्त तथा ब्रह्म सन्तुष्ट रहते हैं। दस मुखी रुद्राक्ष धारण करने से दसों दिशाओं में यश फैलता है तथा दसों इंद्रियों द्वारा किये गये समस्त पापों का अन्त हो जाता है। दस मुखी रुद्राक्ष धारण करने वालों पर किसी ग्रह का आधिपत्य नहीं रहता है।

दस मुखी रुद्राक्ष धारण करने वाले को लोक सम्मान मिलता है राजसी कार्यो में सफलता मिलती है। उसे कीर्ति विभूति और धन की प्राप्ति होती हैं तथा धारणकर्ता की सभी लौकिक तथा परलौकिक कामनायें पूर्ण होती हैं। भूत, पिशाच, बेताल, राक्षस आदि का भय समाप्त हो जाता है। जिस प्रकार एक मुखी रुद्राक्ष सम्पूर्ण शिव स्वरूप है उसी प्रकार दस मुखी रुद्राक्ष सम्पूर्ण विष्णु स्वरूप है। इसी कारण यह नेताओं, समाज सेवियों तथा कलाकारों के लिये उत्तम माना जाता है। इसको धारण करने वाला शत्रु के मारने से भी नहीं मरता है।

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11. ग्यारह मुखी रुद्राक्ष के लाभ

ग्यारह मुखी रुद्राक्ष में ग्यारह धारियां होती हैं। ग्यारह मुखी रुद्राक्ष भी रुद्र स्वरूप है। यह भगवान शंकर के भक्तों के लिये बहुत ही प्रभावशाली तथा अमोघ वस्तु है। शिवजी के ग्यारहवें रुद्र महावीर बजरंगबली है। जिनके नाम से ही भूत प्रेत भागते हैं। वह विद्यवान, गुणवान तथा चतुरता प्रदान करने वाले देवता हैं। ग्यारह मुखी रुद्राक्ष बल बुद्धि तथा शरीर को बलिष्ठ एवं निरोगी बनाता है। भगवान इन्द्र भी इसके देवता माने जाते हैं। यदि किसी मनुष्य की कुछ दान करने की अभिलाषा हो या वह कभी दान न कर पाया हो तो ग्यारह मुखी रुद्राक्ष को धारण करे। इससे दान की पूर्ति हो जाती है। इसके विषय में कहा गया है कि इसे धारण करने से सहस्त्र अश्वमेघ यज्ञ तथा एक लाख गाय दान करने के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है।

जिनके जीवन में सदा संघर्ष बना रहता हो अधैर्य के कारण गलत निर्णय ले लेते हों। जिस मनुष्य को मानसिक कष्ट सदा बना रहता हो, जिसके कारण से वह अपने को दुखी तथा अपमानित महसूस करता हो या जिसे अधिकतम किन्हीं कारणों से अपमानित होना पड़ता हो उन्हें ग्यारह मुखी रुद्राक्ष अवश्य ही धारण करना चाहिए। इसको धारण करने से सांसारिक ऐश्वर्य तथा उसके भोगने का सुख प्राप्त होता है। इसको धारण करने से एकादशी व्रत का पुण्य सदा ही प्राप्त होता है तथा मनुष्य हमेशा विजय प्राप्त करता रहता है। स्त्रियों के लिए यह रुद्राक्ष सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। पति की सुरक्षा उसकी दीर्घायु एवं उन्नति तथा सौभाग्य प्राप्ति में यह रुद्राक्ष अत्यन्त शुभ है। इसकी महिमा यह बताई गई है कि श्रद्धा तथा विश्वासपूर्वक इसे धारण करने से बन्ध्या स्त्री भी संतान प्राप्त कर सकती है। वेदान्त निष्ठ एवं कथा वाचक को यही रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।

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12. बारह मुखी रुद्राक्ष के लाभ

बारह मुखी रुद्राक्ष में बारह धारियां होती हैं। बारह मुखी रुद्राक्ष भगवान सूर्य के बारह रूपों के ओज, तेज और शक्ति सामर्थ्य का केन्द्र बिन्दु है। भगवान सूर्य नारायण संसार को चलाने वाले देवता हैं। सम्पूर्ण पृथ्वी सूर्य भगवान की कृपा पर निर्भर हैं। पृथ्वी के सभी प्राणियों के प्राण रक्षक सूर्य भगवान हैं। जिस प्रकार सूर्य नारायण सम्पूर्ण विश्व को प्रकाश प्रदान करते हैं उसी प्रकार बारह मुखी रुद्राक्ष धारक मनुष्य की ख्याति सूर्य की किरणों की तरह सभी दिशाओं में प्रकाशित करता है।

बारह मुखी रुद्राक्ष ज्योतिर्लिंगों, 1 महाकाल, 2 रामेश्वर, 3 सोमनाथ, 4 मल्लिकार्जुन, 5 ओंकारेश्वर, 6 वैद्यनाथ, 7 भीमशंकर, 8 नागेश्वर, 9 विश्वेश्वर, 10 त्र्यम्बकेश्वर, 11 केदारेश्वर, 12 धुरुमेश्वर, का प्रतीक माना जाता है। इसको धारण करने वाला व्यक्ति कभी रोग, चिन्ता, भय, भ्रम में नहीं होता है। धन, वैभव, ज्ञान और अन्य भौतिक सुखों का प्रदाता यह रुद्राक्ष अद्भुत रूप से प्रभावशाली होता है इसको धारण करने से बारह आदित्य प्रसन्न होते हैं।

महामंत्र - ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।।

इसके जप से जो फल मिलता है, वह बारह मुखी रुद्राक्ष के धारण करने वाले को स्वतः ही प्राप्त हो जाता है। इसको धारण करने से सदा मुख पर प्रसन्नता रहती है तथा समाज में सम्मान और वाणी में चातुर्यता उत्पन्न होती है। बारह मुखी रुद्राक्ष बहुत शक्तिशाली और तेजस्वी रुद्राक्ष होता है। इसे धारण करने से हिंसक पशु (जानवरों) का भय नहीं होता है। यह जानवर हत्या के पाप से मुक्ति दिलाता है। बारह मुखी रुद्राक्ष धारण करने से मनुष्य को शासक का पद प्राप्त होता है। यह शादी विवाह सम्बन्धों की विवशताओं को दूर करता है। इसको धारण करने से शारीरिक व मानसिक पीड़ा मिट जाती है तथा जीवन निरोगी और सुखी व्यतीत होता है। यह सूर्य के समान कर्मशील तथा प्रखर तेजस्वी है। इसे धारण करने वाला राजा बनने योग्य होता है।

रुद्राक्ष धारण करने से पूर्व शिवजी के विग्रह से बहते जल, पंचामृत या गंगाजल से धोकर त्र्यंम्बकमंत्र या शिवपंचाक्षर मंत्र ओम नमः शिवाय से प्राणप्रतिष्ठा करनी चाहिए।

उक्त जानकारी सूचना मात्र है, किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले कुंडली के और भी ग्रहों की स्थिति, बलाबल को भी ध्यान में रखकर तथा हम से परामर्श कर ही किसी भी निर्णय पर पहुंचना चाहिए।


 

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