दैनिक भास्कर हिंदी: विश्वकर्मा जयंती 17 को, ये हैं लंका, द्वारका और इन चीजों के रचनाकार

September 15th, 2017

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सृष्टि के सबसे पहले इंजीनियर और वास्तुकार भगवान विश्वकर्मा थे। इनके लिए किसी भी इमारत, मंदिर या महल को बनाना चुटकियों का काम था। कहा जाता है कि इनकी शिल्पकला इतनी बेजोड़ होती थी कि खुद श्रीहरि भी इनका स्मरण किया करते थे। इन्हें शिल्पकला का जनक भी माना जाता है। 17 सितंबर रविवार को विश्वकर्मा जयंती मनाई जाएगी। इस उपलक्ष्य में हम आपको कुछ रोचक तथ्य बताने जा रहे हैं...

ऋग्वेद में उल्लेख 

ऋग्वेद के 10वे अध्याय के 121वे सूक्त में लिखा है कि विश्वकर्मा जी के द्वारा ही धरती,आकाश और जल की रचना की गई है। विश्वकर्मा पुराण के अनुसार आदि नारायण ने सर्वप्रथम ब्रह्मा जी और फिर विश्वकर्मा जी की रचना की।

इनका किया निर्माण

  • भगवान विश्वकर्मा नें देवताओं के अस्त्र-शस्त्रों, गहने, विमान आदि की भी रचना की। 
  • त्रेता युग में विश्वकर्मा जी ने भगवान शंकर व माता पार्वती के लिए सोने की लंका का निर्माण किया था। जिसे दक्षिणा रूप में रावण ने भोलेनाथ से मांग लिया था। 
  • दशरथजी के आग्रह पर कनक महल की रचना भी विश्वकर्मा जी ने ही की थी। 
  • पांडवों के लिए इंद्रप्रस्थ के रचनाकार भी भगवान विश्वकर्मा ही थे।
  • श्रीहरि का चक्र और शिव के त्रिशूल का रचनाकार भी इन्हें ही माना जाता है। 
  • भगवान श्रीकृष्ण के लिए द्वारका का निर्माण विश्वकर्माजी ने ही किया था। 
  • रावण के पुष्पक विमान के निर्माणकर्ता भी भगवान विश्वकर्मा ही थे। 

पूजन

  • बुनकर, बढ़ई से लेकर सभी प्रकार के शिल्पी इस दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते हैं। 
  • जिस भी स्थान पर पूजा करना है वहां विश्वकर्मा जी की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से उनका पूजन करें। 
  • इस दिन मशीन, गाड़ी या अपने औजारों का भी विश्वकर्मा जी का नाम लेकर पूजन करें और उनसे कुशलता से काम करने के लिए प्रार्थना करें। 
  • इस दिन मशीनों या अन्य औजारों को नहीं चलाना चाहिए। माना जाता है कि इस दिन पूजन के बाद इन्हें नहीं चलाने से ये कुशलता से काम करते हैं। 
  • हवन-पूजन के बाद विश्वकर्माजी की आरती कर उन्हें प्रसन्न किया जाता सकता है।