नई दिल्ली : दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी में 12 मंजिला 2 विश्वस्तरीय हॉस्टल

July 20th, 2022

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश की बेहतरीन टेक्निकल यूनिवर्सिटीज में शुमार दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (डीटीयू) सीटों की संख्या 6,000 से बढ़कर 15,000 हो गई। डीटीयू विज्ञान के क्षेत्र में अपने विभिन्न रिसर्च के साथ कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के जरिए दिल्ली सरकार को सपोर्ट भी कर रही है। डीटीयू में पिछले 7 साल में क्रमवार तरीके से सीटों में यह इजाफा हुआ है। दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (डीटीयू) में विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस 12 मंजिला 2 नए हॉस्टल तैयार किए गए हैं। नवनिर्मित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम बॉयज हॉस्टल और वीरांगना लक्ष्मीबाई गर्ल्स हॉस्टल से 1,000 स्टूडेंट्स यहां मौजूद अत्याधुनिक सुविधाओं का लाभ उठा पाएंगे।

12 मंजिला डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम बॉयज हॉस्टल में 107 कमरे है जिसमें 321 स्टूडेंट्स रह सकते हैं। वहीं वीरांगना लक्ष्मीबाई गर्ल्स हॉस्टल में कुल 227 कमरे हैं जिसमें 681 स्टूडेंट्स रह सकते हैं। इसके अतिरिक्त यहां पूर्व से ही कई अन्य हॉस्टल भी मौजूद है जिनकी कुल क्षमता लगभग 1600 है। इन दोनों हॉस्टल के साथ डीटीयू अब अपने हॉस्टल में 2600 से अधिक स्टूडेंट्स को समायोजित कर सकता है। साथ ही यहां आने वाले दिनों में 2 नए अकेडमिक ब्लाक भी बनकर तैयार हो जाएंगे।

डीटीयू विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शानदार काम कर रहा है, जिसके कारण यह विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में ये आगे बढ़ा है। यूनिवर्सिटी को एक प्राइवेट रैंकिंग में 8वां स्थान मिला है। एनआईआरएफ रैंकिंग में यूनिवर्सिटी जहां 2015 में 63वीं रैंक पर थी अब 2022 में 35वें रैंक पर पहुंच गई है। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बुधवार को डीटीयू के नए हॉस्टल शुरू होने पर कहा कि सरकार में आने के बाद से ही हमारा उद्देश्य अपने उच्च शिक्षा संस्थाओं को बेहतर बनाते हुए सपने स्टूडेंट्स को वल्र्ड-क्लास शिक्षा व सुविधाएं मुहैया करवाना है। सिसोदिया ने कहा कि हमारी यूनिवर्सिटी एडमिशन की जरूरत पूरा कर रही है। सिर्फ डीटीयू में ही पिछले 7 साल में सीटों की संख्या 6,000 से बढ़कर 15,000 हो गई।

उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी का एक और बड़ा काम प्रॉब्लम सॉल्वर तैयार करना है। आज देश के सामने एक बहुत बड़ी समस्या ये है कि यहां 12 करोड़ लोग बेरोजगार हैं और 27 करोड़ लोग ऐसे है जो प्रतिदिन 35-40 रुपए से भी कम कमाते है। हमारे यूनिवर्सिटीज को ऐसे स्टूडेंट्स तैयार करने की जरुरत है जो इस समस्या का हल निकाल सकें। उन्होंने आगे कहा कि आज जापान-जर्मनी ऐसे देश जो विश्व-युद्ध में पूरी तरह तबाह हो चुके थे उनकी प्रतिव्यक्ति आए भारत की प्रतिव्यक्ति आय से 25-30 गुणा ज्यादा है। इसका सीधा अभिप्राय है कि कहीं न कहीं कोई कमी रह गई है और जिसे स्कूल सिस्टम व यूनिवर्सिटी सिस्टम के माध्यम से ही खोजते हुए दूर किया जा सकता है। इसके लिए हमारे विश्वविद्यालयों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि दुनिया भर के विश्व स्तरीय विश्वविद्यालयों ने उस देश के इतिहास में उसके वर्तमान को बदलने में क्या भूमिका निभाई है।

(आईएएनएस)

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