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Education: नीट और जेईई छात्रों को मिला है परीक्षा केंद्र चुनने का विकल्प

Education: नीट और जेईई छात्रों को मिला है परीक्षा केंद्र चुनने का विकल्प

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। NEET और JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में 27 लाख से अधिक छात्रों को अपनी पसंद का परीक्षा केंद्र चुनने का अवसर दिया गया है। इससे कोरोना संक्रमण के इस दौर में कई छात्रों को प्रवेश परीक्षाएं देने के लिए दूसरे शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। हालांकि छात्र इस विकल्प से बहुत ज्यादा संतुष्ट नहीं हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक छात्रों को अपनी पसंद का केंद्र चुनने का विकल्प इसलिए दिया गया, ताकि उन्हें लंबी यात्रा न करनी पड़े और वो अपनी सुविधा के अनुसार परीक्षा केंद्र का चुनाव कर सकें।

गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण के कारण बड़ी संख्या में छात्र इन परीक्षाओं को स्थगित करने की मांग कर चुके हैं। ऐसे ही एक छात्र देवव्रत चतुर्वेदी ने कहा कोरोना के इस दौर में हमें परीक्षा केंद्रों तक पहुंचकर, प्रवेश परीक्षा में शामिल होना होगा। इस दौरान छात्रों को कोरोना से संक्रमित होने का भय है।

नीट प्रतियोगी परीक्षा के लिए 16.84 लाख छात्रों ने फॉर्म भरा
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने इस विषय में एक आधिकारिक सूचना जारी की थी। इस सूचना में एनटीए के महानिदेशक ने कहा नीट परीक्षा में शामिल होने वाले छात्र परीक्षा केंद्र व परीक्षा के शहर का विकल्प चुन सकते हैं। इस बदलाव के लिए एनटीए ने वेबसाइट पर 15 जुलाई तक का समय दिया था। नीट प्रतियोगी परीक्षा के लिए 16.84 लाख छात्रों ने फॉर्म भरा है। सभी 16.84 लाख छात्र अपनी सुविधा अनुसार फार्म में बदलाव के पात्र हैं। इसी तरह जेईई की प्रवेश परीक्षा में भी ये सुविधा प्रदान की गई है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए ने इसके लिए जरूरी प्रावधान किए हैं। इसके अंतर्गत लगभग 10 लाख छात्रों को ये सुविधा उपलब्ध कराई गई है। 

जेईई मेन परीक्षा 1 से 6 सितंबर के बीच होंगी
एनटीए के मुताबिक छात्रों को परीक्षा केंद्रों की मौजूदगी के आधार पर उनका नजदीकी परीक्षा केंद्र आवंटित किया जाएगा। कोरोनावायरस के कारण देशभर में जेईई और नीट की परीक्षा देने वाले लाखों छात्रों की अनिश्चितताओं को विराम देते हुए, इन परीक्षाओं की नई तिथियां भी घोषित की गई हैं। जेईई मेन परीक्षा 1 से 6 सितंबर के बीच होंगी। नीट की परीक्षा 13 सितंबर को होगी। जेईई एडवांस की परीक्षा 27 सितंबर को होगी। पहले जेईई की परीक्षा 18 जुलाई से 23 जुलाई के बीच और नीट की परीक्षा 26 जुलाई को होने वाली थी।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस महामारी के दौरान हमारी प्राथमिकता छात्रों के स्वास्थ को सुरक्षित रखना है। हम ये सुनिश्चित करेंगे कि परीक्षा आयोजित करवाते समय, गृह मंत्रालय और स्वास्थ मंत्रालय द्वारा दिए गए दिशानिर्देशों का पालन सख्ती से किया जाए, ताकि छात्रों को इस महामारी की चपेट से दूर रखा जाये। मंत्रालय ने कहा परीक्षा केंद्रों में सोशल डिस्टेसिंग का भी पूरा पालन किया जायेगा और बाकि सभी ऐहतियाती इंतजाम भी किये जायेंगे।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।