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इंडिया रैंकिंग में टॉप संस्थानों ने कहा, टीम वर्क का है कमाल

June 13th, 2020 10:12 IST
इंडिया रैंकिंग में टॉप संस्थानों ने कहा, टीम वर्क का है कमाल

हाईलाइट

  • इंडिया रैंकिंग में टॉप संस्थानों ने कहा, टीम वर्क का है कमाल

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। उच्च शिक्षा संस्थानों की 10 श्रेणियों में इंडिया रैंकिंग 2020 जारी की गई है। ओवरआल रैंकिंग में आईआईटी मद्रास ने पहला स्थान प्राप्त किया है, बेंगलुरू का आईआईएससी दूसरे स्थान पर और आईआईटी दिल्ली तीसरे नंबर पर है।

इंडिया रैंकिंग 2020 पर ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) के चैयरमेन डॉक्टर अनिल सहस्त्रबुद्धे ने कहा, हमने पहली रैंकिंग 4 अप्रैल, 2016 को की थी। तब इसमें केवल चार श्रेणियां थीं, अब नौ श्रेणियां में 5000 से ज्यादा इंस्टीट्यूट हैं। रैंकिंग का आधार इस बात पर निर्भर करता है कि छात्रों का उक्त कॉलेज में जाने का क्या अनुभव है। इनोवेशन, रिसर्च और स्टार्टअप को संस्थान में कैसे बढ़ावा दिया जाता है। छात्रों की प्लेसमेंट और लोगों की संस्थान विशेष के बारे में क्या भावना है।

इंडिया रैंकिंग 2020 में डेंटल कॉलेजों की कैटेगरी में दिल्ली का मौलाना आजाद मेडिकल इस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंस पहले स्थान पर है। मौलाना आजाद मेडिकल इस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंस के वाइस चांसलर डॉक्टर महेश कुमार ने कहा, बेहतर सर्विस, सुविधाएं गुणवत्ता एवं छात्रों से कम फीस वसूलना हमारी विशेषताओं में शामिल है। इस उपलब्धि का पूरा श्रेय किसी एक व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता। यह छोटे से लेकर बड़े तक सभी की मेहनत का नतीजा है।

विश्वविद्यालयों की कैटेगरी में आईआईएससी बेंगलुरू टॉप पर है। कॉलेजों की श्रेणी में दिल्ली विश्वविद्यालय का मिरांडा हाउस पहले स्थान है। लेडी श्रीराम कॉलेज दूसरे और हिंदू कॉलेज को तीसरा स्थान मिला है। कॉलेजों की श्रेणी में प्रथम तीन आने वाले ये तीनों ही कॉलेज दिल्ली से हैं। यूजीसी के चेयरमैन प्रोफेसर डी.पी. सिंह ने कहा, पिछले कुछ वर्षों से हमने क्वालिटी एजुकेशन को काफी प्रमोट किया है। शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाते हुए दीक्षा, जीवन कौशल, मूल्य प्रभाव जैसे कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। यह शुरुआत विभिन्न संस्थानों के कुलपतियों के साथ मिलकर की गई है।

फार्मेसी संस्थानों की सूची में दिल्ली का जामिया हमदर्द पहले स्थान पर है। जामिया हमदर्द के वाइस चांसलर प्रोफेसर सैयद एहतेशाम हसनैन ने कहा, हमने बीते 3 वर्षों के दौरान लगभग 80 नए फैकेल्टी नियुक्त किए। जॉन हापकिंस यूनिवर्सिटी, आईआईटी, आईआईएम, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ और पेंसिलवेनिया के फैकेल्टी हमारे छात्रों को पढ़ाने आ रहे हैं। यूनिवर्सिटी की ग्रांट को तीन करोड़ रुपये से बढ़वा कर 70 करोड़ रुपये करवाया है। हमारी कामयाबी की असल वजह हमारी स्ट्रैटेजिक प्लैनिंग है। हर क्षेत्र में हमने टीमवर्क को बढ़ावा दिया है। मेडिकल संस्थानों में दिल्ली स्थित एम्स सर्वश्रेष्ठ मेडिकल संस्थान है। एम्स के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस सम्मान पर संतोष व्यक्त किया है।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।