अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर खास: न स्टार किड, न बड़ा फिल्मी बैकग्राउंड... रिजेक्शन और संघर्ष के बाद इन नए चेहरों ने बनाई अपनी पहचान

मुंबई। बॉलीवुड में हर नए कलाकार को पहला मौका आसानी से नहीं मिलता। खासकर उन युवाओं के लिए यह सफर और मुश्किल होता है, जिनका फिल्म इंडस्ट्री से कोई सीधा संबंध नहीं होता। ऑडिशन, रिजेक्शन और छोटे-छोटे कामों से शुरुआत करने के बाद कुछ नए चेहरों ने अपनी प्रतिभा के दम पर दर्शकों का ध्यान खींचा है। आज बॉलीवुड में ऐसे कई युवा चेहरे नजर आ रहे हैं, जो बिना किसी बड़े फिल्मी सरनेम के अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ ने बाल कलाकार के तौर पर शुरुआत की, कुछ ने विज्ञापन और मॉडलिंग से कदम बढ़ाया तो कुछ को बड़े प्रोजेक्ट ने पहचान दिलाई। अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के मौके पर मिलिए ऐसे ही नए चेहरों से, जिनकी कहानी आने वाले समय की बॉलीवुड तस्वीर बदल सकती है।
रमनदीप- पहचान बनाने में लगे 4 साल
रमनदीप उन नए कलाकारों में हैं, जो ग्लैमर के साथ अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस साल की लोकप्रिय वेब सीरीज राख में रज्जो के किरदार में उन्हें खूब सराहा गया लेकिन इस एक मौके के लिए उन्होंने 4 सालों का लंबा इंतजार किया है। उन्होंने दैनिक भास्कर से कहा कि छोटे से शहर से मुंबई जब वह पहुंचे थे तो उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि इंडस्ट्री में अपनी जगह किसी विरासत के सहारे नहीं, बल्कि काम के दम पर बनाई जाए। नए कलाकारों के लिए हर ऑडिशन और हर भूमिका खुद को साबित करने का मौका होती है। उन्हें इन 4 सालों में कई रिजेक्शन मिले लेकिन जब यह मौका मिला तो उन्होंने जान लगा दी। रमनदीप ने बताया कि मुझे तो 4 साल में ही मौका मिल गया लेकिन मैं ऐसे लोगों को भी जानता हूं जो 35–40 से कोशिश कर रहे हैं लेकिन 1 मौके के लिए तरस रहे हैं।
12 साल में 7 साल बिना काम के गुजरे- लक्ष्यवीर
अभिनेता लक्ष्यवीर ने अपने अब तक के सफर में काम के लिए किए लंबे इंतजार को याद करते हुए बताया कि 12 साल के करियर में करीब सात साल ऐसे रहे, जब उनके पास कोई काम नहीं था। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल से उन्हें लगातार अच्छे प्रोजेक्ट मिल रहे हैं और यह दौर उनके लिए बेहद खास है। लक्ष्यवीर के मुताबिक अब शूटिंग के दौरान उन्हें एक साथ दो प्रोजेक्ट पर काम करना पड़ा। लगातार व्यस्त रहने की वजह से कई बार उन्हें ठीक से सोने तक का समय नहीं मिलता था, लेकिन इसके बावजूद वह अगले दिन पूरे उत्साह के साथ सेट पर पहुंचते थे। उनका कहना है कि लंबे समय तक काम से दूर रहने के बाद जब लगातार मौके मिलने लगे तो वह इन्हें किसी भी कीमत पर गंवाना नहीं चाहते थे।
आकाश मखीजा- 14 साल तक रिजेक्शन, फिर मिला बड़ा मौका
आकाश मखीजा की कहानी बताती है कि लगातार मिलने वाला रिजेक्शन भी किसी के हौसले को नहीं तोड़ सकता। आकाश कहते हैं , महज 17 साल की उम्र में उल्हासनगर से अभिनेता बनने का सपना लेकर कल्याण से अंधेरी तक ऑडिशन देने जाता था। न कोई फिल्मी बैकग्राउंड था और न ही इंडस्ट्री में कोई पहचान। करीब 14 साल तक कभी ‘लुक सही नहीं है’ तो कभी ‘फिट नहीं हैं’ जैसे जवाब सुनने पड़े। सैकड़ों ऑडिशन में नाकामी मिली लेकिन कोशिश जारी रखी। करीब 100 विज्ञापनों में काम किया और टेलीविजन के जरिए अपनी पहचान बनानी शुरू की। फिल्म ‘राख’ में बाबू के किरदार के लिए मुझे करीब 700-800 कलाकारों के बीच छह दौर के ऑडिशन से गुजरना पड़ा। आखिरी चरण तक पहुंचने के बावजूद भी चयन नहीं हुआ। यह एक और बड़ा झटका था, लेकिन मैंने उम्मीद नहीं छोड़ी। कुछ महीनों बाद जब निर्माताओं ने उसी किरदार के लिए दोबारा कलाकार तलाशना शुरू किया, तो मुझे फिर बुलाया गया। इस बार बाबू का किरदार मिल गया। आज मेरे अभिनय की तारीफ हो रही है।
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अंजलि आनंद- वजन को लेकर ताने सुने, 246 रीटेक के बाद मिला बड़ा मौका
अंजलि आनंद आज सोशल मीडिया के नामचीन चेहरों में शामिल हैं लेकिन इंडस्ट्री के जूनियर आर्टिस्ट की बेटी का सफर भी आसान नहीं रहा। अभिनय की दुनिया में कदम रखने से पहले उन्होंने शादी समारोहों में कोरियोग्राफर के तौर पर काम किया। इसके बाद टेलीविजन से अभिनय की शुरुआत की और ‘ढाई किलो प्रेम’ व ‘कुल्फी कुमार बाजेवाला’ जैसे धारावाहिकों से पहचान बनाई। लेकिन बड़े पर्दे तक पहुंचने के रास्ते में उन्हें अपने वजन और शरीर को लेकर कई तरह की टिप्पणियां सुननी पड़ीं। अंजलि ने बताया कि उन्हें अक्सर उनके अभिनय से पहले उनके वजन के आधार पर आंका जाता था।
फिल्म में गायत्री के किरदार के लिए हुए ऑडिशन के दौरान उन्होंने करीब 246 रीटेक दिए। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार यह भूमिका हासिल की। आज भी वह शरीर को लेकर होने वाली टिप्पणियों और ट्रोलिंग के खिलाफ खुलकर बात करती हैं।
अनीत पड्डा- मुंबई जाने के पैसे नहीं थे, घर पर छिपकर रिकॉर्ड किए ऑडिशन
अमृतसर से ताल्लुक रखने वाली अनीत पड्डा बचपन से ही अभिनेत्री बनना चाहती थीं। 17 साल की उम्र में उन्होंने काम की तलाश शुरू की, लेकिन उनके माता-पिता के पास उन्हें हर ऑडिशन के लिए मुंबई ले जाने के पर्याप्त साधन नहीं थे। ऐसे में अनीत ने रास्ता खुद तलाशा। वह घर के कमरे में दरवाजा बंद करके ऑडिशन रिकॉर्ड करती थीं और माता-पिता से कहती थीं कि वह पढ़ाई कर रही हैं। काम पाने की कोशिश में उन्होंने करीब 50-70 प्रोडक्शन हाउस को खुद ईमेल भी किए। शुरुआत में उन्हें ऑडिशन के नाम पर फर्जी वेबसाइटों का सामना करना पड़ा और कई बार सही रास्ता समझना भी मुश्किल हुआ। इसके बावजूद उन्होंने अभिनय का सपना नहीं छोड़ा। पढ़ाई के साथ वह विज्ञापनों में मॉडलिंग और ऑडिशन करती रहीं। बाद में ‘सलाम वेंकी’ में छोटा किरदार और ‘बिग गर्ल्स डोंट क्राई’ में काम मिला। ‘सैयारा’ ने उनके करियर को बड़ा मोड़ दिया। फिल्म में वाणी के किरदार ने उन्हें रातोंरात पहचान दिलाई।
Created On :   11 Aug 2026 7:24 PM IST












