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मलाला के बर्थडे पर रिलीज हुआ गुल मकई का टीजर, दिखेगी उनकी इंस्पिरेशनल स्टोरी

September 25th, 2018 14:31 IST

डिजिटल डेस्क, मुंबई। पाकिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ लड़ने वाली, नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई के जीवन पर बन रही बायोपिक 'गुल मकई' का टीजर उनके जन्मदिन पर रिलीज किया गया। 12 जुलाई को मलाला का जन्मदिन पूरी दुनिया में मलाला डे के नाम से मनाया जाता है। 'गुल मकई' दरअसल मलाला का ही नाम है जो प्यार से लोग उन्हें बुलाते हैं। डर, दहशत के बीच आशा की एक किरण की कहानी को बयां करने वाला ये टीजर किसी के भी रौंगटे खड़े कर सकता है।

अमजद खान के डायरेक्शन में बन रही इस फिल्म में मलाला के जीवन की कहानी दिखाई गई है। फिल्म, एक छोटा सा ट्रिब्यूट है मलाला को जिन्होंने धर्म, जाति और देश से ऊपर उठकर पूरी दुनिया के लिए काम किया। टीजर का पहला डायलॉग ही जिहाद के बारे में बताते हुए कहता है- "जब अल्लाह ने जिहाद के बारे में कहा तो उसका मतलब था सारी बुराइयों और अंधेरों से लड़ना। पर कुछ लोगों की चाहत और लालच ने जिहाद का मतलब ही बदल कर रख दिया। ये उन दिनों की बात है जब तालिबान जिहाद और धर्म के नाम पर पाकिस्तान और अफगानिस्तान को तबाह कर रहा था"।

फिल्म में मलाला का किरदार टीवी की जानीमानी ऐक्ट्रेस रीम शेख निभा रही हैं। इससे पहले रीम को सीरियल 'ना आना इस देस लाडो' में देखा गया है। मलाला की कहानी को पूरी दुनिया के सामने लाने के लिए बनी इस फिल्म में स्वात घाटी से नोबल प्राइज जीतने तक के उनके सफर को दिखाया गया है। टीजर को फिल्म के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल और यूट्यूब पर शेयर किया गया है। रेनिसेन्स पिक्चर्स के बैनर तले बन रही इस फिल्म के डायलॉग्स और स्क्रीनप्ले भस्वती चक्रवर्ती ने लिखे हैं।

दिव्या दत्ता मूवी में मलाला के मां के रोल में हैं जो मलाला को उनके नाम का सही मतलब बताती हुई नजर आ रही हैं। फिल्म इसलिए भी स्पेशल है क्योंकि ये एक्टिंग लीजेंड ओम पुरी की आखिरी मूवी है। डायरेक्शन की बात की जाए तो अमजद खान एक मंझे हुए निर्देशक हैं जिन्होंने 2012 में आई 'ले गया सद्दाम' भी डायरेक्ट की थी। गुल मकई से वो फिर वापसी कर रहे हैं। टीजर रिलीज के लिए भी प्रोडक्शन टीम ने बहुत सही दिन चुना है। फिल्म में रीम शेख के साथ दिव्या दत्ता, मुकेश ऋषि, अभिमन्यु सिंह और एजाज खान भी नजर आएंगे। मूवी की रिलीज डेट फिलहाल डिसाइड नहीं हुई है।

बता दें कि मलाला युसुफजई दुनिया की सबसे कम उम्र की नोबल प्राइज विजेता हैं। 2012 में पाकिस्तान में एक तालिबानी हमले से बचने के बाद उन्हें 2014 में दुनिया भर में बच्चों की पढ़ाई पर काम करने के लिए नोबल पीस प्राइज से सम्मानित किया गया है। इसके बाद से वो लगातार इस फील्ड में काम करती आ रही हैं। 2013 में उन्होंने 'मलाला फंड' नाम से एक ऑर्गनाइजेशन भी खोली। 

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