Exclusive Interview: आज लोग टॉयलेट भी मुहूर्त देखकर जाते हैं... मैं नास्तिक हूं, कर्म में यकीन रखता हूं- अन्नू कपूर

आज लोग टॉयलेट भी मुहूर्त देखकर जाते हैं... मैं नास्तिक हूं, कर्म में यकीन रखता हूं- अन्नू कपूर
चार दशक से ज्यादा समय से अभिनय की दुनिया में अपनी खास पहचान बनाने वाले अभिनेता अन्नू कपूर एक बार फिर फिल्म 'उत्तर दा पुत्तर' के जरिए दर्शकों के सामने आ रहे हैं। अंधविश्वास, वास्तु और शुभ-अशुभ जैसी मान्यताओं पर आधारित इस फिल्म को लेकर अन्नू कपूर ने अपनी बेबाक राय रखी है।

डिजिटल डेस्क, मुंबई। चार दशक से ज्यादा समय से अभिनय की दुनिया में अपनी खास पहचान बनाने वाले अभिनेता अन्नू कपूर एक बार फिर फिल्म 'उत्तर दा पुत्तर' के जरिए दर्शकों के सामने आ रहे हैं। अंधविश्वास, वास्तु और शुभ-अशुभ जैसी मान्यताओं पर आधारित इस फिल्म को लेकर अन्नू कपूर ने अपनी बेबाक राय रखी है। निजी जिंदगी में खुद को नास्तिक बताने वाले अन्नू कपूर कहते हैं कि वे किसी नाम दिए गए ईश्वर में नहीं, बल्कि एक सर्वशक्तिमान तत्व में विश्वास रखते हैं और इंसान के कर्म को सबसे ऊपर मानते हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में उन्होंने फिल्म के कॉन्सेप्ट, इंडस्ट्री में ज्योतिष और वास्तु के प्रभाव, आज की पीढ़ी के बदलते नजरिए और रिश्तों में बढ़ती संवेदनशीलता पर खुलकर बात की। उनका कहना है कि आज समाज में अंधविश्वास इतना बढ़ गया है कि लोग कई बार छोटे-छोटे फैसले भी शुभ-अशुभ देखकर लेने लगे हैं। वहीं उन्होंने नई पीढ़ी की परवरिश और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर भी अपनी चिंता जाहिर की।

सवाल-क्या आप ईश्वर में मानते हैं ?

जवाब-मैं नास्तिक हूं, हालांकि मैं एक सर्वशक्तिमान तत्व में मानता हूं लेकिन उसके नामकरण से मुझे आपत्ति है फिर वह नाम आपको धर्म की केटेगरी में डाल देता हैं। इसलिए मैं वस्तु शास्त्र में नहीं मानता। ना ही शुभ -अशुभ में यकीन है। इसलिए मुझे इस फिल्म का कांसेप्ट पसंद आया क्योंकि हमारे आसपास आज आपको हर कोई मिलेगा जो अंधविश्वास के जाल में फंस चुका है। लोग तो आजकल टायलेट भी मुहूर्त देखकर जाते हैं।

सवाल-फिल्म इंडस्ट्री में तो शास्त्रियों की काफी अहमियत है , अपने कभी कोशिश नहीं की टिप्स लेने की ?

जवाब-ग्लैमर इंडस्ट्री में आपको मुहूर्त , वास्तु, अंगूठियां और न्यूमरोलॉजी में मानने वाले कई मिल जाएंगे। क्योंकि यह जगह ही ऐसी है। कुछ भी स्थिर नहीं है। मुझे भी बहुत पहले लोग इन प्रयोगों के लिए कहते थे लेकिन मैं तो ज्योतिषियों, न्यूमरोलॉजी , वास्तु एक्सपर्ट सबकी क्लास ले लेता हूं। उनके पास जाकर मैं उनकी ही परीक्षा लेने लगता हूं। मेरी बहन सीमा कपूर ज्योतिष बहुत अच्छा जानती हैं। मुझे भी इसके बारे में थोड़ा सा पता है। मैं कर्म में यकीन रखता हूं। यहां एक बात कहना चाहूंगा , मत आकर अपने हाथों की लकीरों पर इतना गुमान, तक़दीर तो उनकी भी होती है जिनके हाथ नहीं होते।

सवाल- आपको फिल्म इंडस्ट्री में कभी अस्थिरता महसूस नहीं हुई ?

जवाब- नहीं क्योंकि मुझे पता है आप जितने भी खुद को खुदा समझ लें आपकी हस्ती भी एक दिन जरूर मिटेगी। मैं 4 दशकों से अधिक इस इंडस्ट्री का हिस्सा हूं। टीवी, रेडियो , थिएटर और फिल्म हर जगह काम किया है। इन सालों में मैंने कई हस्तियों को खुद को राजा समझते हुए और गुमान में देखा है और फिर उनकी हस्ती भी मिटते देखी है। इसलिए मैं थोड़ा सावधान ही रहता हूं।

सवाल-उत्तर दा पुत्तर ही नाम क्यों ?

जवाब- आप किसी भी शास्त्र को देखें तो उसमें उत्तर दिशा को सबसे शुभ माना जाता है। फिल्म में मैं उस व्यक्ति के किरदार में हूं जो हर काम वास्तु और मुहूर्त से करता है जिसके बाद उसकी जिंदगी में भूचाल आ जाता है। लेकिन उसका अन्धविश्वास नहीं डगमगाता। हम भी अपनी जिंदगियों में ऐसे ही हैं। असफलता, संघर्ष हमें इन सबमें यकीन दिला देते हैं। इसलिए फिल्म का नाम उत्तर दा पुत्तर रखा गया।

सवाल-आपको लगता है, जेनजी इन बातों में यकीन रखती है ?

जवाब-नहीं, वह शायद इन चीजों में कम लेकिन हर बात को लेकर टची बहुत हो गए हैं। आजकल आपने ऐसे ही मजाक या गलती में किसी का हाथ भी टच कर लिया तो वह इसका मुद्दा बना सकते हैं। आपको कटघरे में खड़ा कर सकते हैं। शूट के पहले दिन मैंने हमारी अभिनेत्री की तारीफ कर दी लेकिन बाद में डर गया कि कहीं मुद्दा ना बन जाए। पर उन्होंने इसे बड़ी समझदारी से लिया और मैं बच गया। आज के बच्चों को तो हर मुद्दे पर बात करनी है। आमिर खान की तीसरी शादी में भी उन्हें दिलचस्पी है। उनके बैडरूम में भी उनको झांकना है। आजकल तो पति पत्नी भी घरेलू मुद्दों में सेंसेटिव हो गए हैं। तुरंत तलाक लेने पर अमादा। रिश्ता ख़त्म कर देते हैं। उत्तर की दिशा में शायद रहें तो कोई फर्क पड़ें।

सवाल -जेनजी से इतनी शिकायत क्यों ?

जवाब-मुझे शिकायत नहीं है बल्कि मैं दुखी हूं क्योंकि रिश्तों और प्यार अभाव में बच्चे ऐसे बन रहे हैं। हमारे माता पिता की हम पर नजर रहती जबकि ये बच्चे सोशल मीडिया के दौर में इतने जजमेंटल हैं। इन्हे परवरिश घर से नहीं सोशल मीडिया से मिल रही है। इसलिए बच्चे जल्दी आत्महत्या जैसे कदम उठा रहे हैं। मैं सिर्फ इन जेनजी माओं से अपील करना चाहता हूं बच्चों को हफ्ते में कुछ दिन अपने हाथ की रोटी बनाकर खिलाइये। सब ठीक हो जाएगा।

Created On :   24 July 2026 6:52 PM IST

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