Anjali Anand Interview: लोग कहते थे वजन कम करो, वरना करियर खत्म हो जाएगा‘टैलेंट किसी बॉडी साइज में फिट नहीं होता': अंजलि आनंद

डिजिटल डेस्क, मुंबई। फिल्म ‘धमाल 4' अपनी रिलीज से पहले ही सुर्खियों में है। अजय देवगन, अरशद वारसी और रितेश देशमुख जैसे सितारों के बीच एक नाम सबसे ज्यादा ध्यान खींच रहा है, अंजलि आनंद। फिल्म में उनके दो गाने पहले ही सुपरहिट हो चुके हैं और अपने आत्मविश्वास, बेफिक्र डांस व दमदार स्क्रीन प्रेजेंस से उन्होंने साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी तयशुदा पैमाने की मोहताज नहीं होती। बॉडी शेमिंग और रूढ़ियों को पीछे छोड़ अंजलि ने अपनी मेहनत के दम पर वह मुकाम हासिल किया है, जिसे कभी उनके जैसी अभिनेत्रियों के लिए मुश्किल माना जाता था। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में उन्होंने अपने संघर्ष, मिले तानों और इस सफलता तक पहुंचने के सफर पर खुलकर बात की।
इंडस्ट्री में कुछ भी परमानेंट नहीं
यह इंडस्ट्री ऐसी है जहां कुछ भी कभी भी बदल सकता है। स्टारडम और लोकप्रियता भी कम समय तक ही आपके साथ रहती है फिर वो किसी और की झोली में चली जाती है। इसलिए मैं ना ही लोकप्रियता से खुश हूं और ना ही इसके जाने से मुझे कोई फर्क पड़ेगा क्योंकि मैंने वो समय भी देखा है जब लोगों ने कहा है कि तुम्हारे लिए तो लिमिटेड ऑप्शन हैं आगे कैसे काम करोगी? तुम्हे वजन कम करना पड़ेगा। वरना करियर खत्म हो जाएगा। मैंने चुपचाप अपना काम किया और आज गुलाबी साड़ी के गाने और और मेरे डांस ने साबित कर दिया कि टैलेंट एक बॉडी आकर में फिट नहीं हो सकता।
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10 साल पीछे चल रही हूं
मेरी 3 साल पहले एक फिल्म आयी थी जिसका नाम था रॉकी और रानी की प्रेम कहानी जिसमे आलिया भट्ट भी थीं। हम दोनों एक ही उम्र के हैं लेकिन उनके काम को देखकर लगा कि मैं अपने करियर में 10 साल पीछे चल रही हूं। क्योंकि काम में आप इतना मशगूल हो जाते हैं कि आपके पास परिवार के लिए समय नहीं रहता। मई परिवार नहीं बना पायी। उन्हें समय नहीं दे पायी। मुझे और मेहनत करनी होगी। हालांकि उससे पहले मैंने कई टीवी शो किये थे और वो हिट भी हुए थे लेकिन मुझे तो और आगे बढ़ना था इसलिए मैंने वो सारे काम किये जिनके ऑफर मुझे हुए किसी के लिए ना नहीं कहा। मैंने 2 रियलिटी शो किए, वेब सीरीज में काम किया क्योंकि मुझे ये पता था कि मेरे पास ना कहने का मौका नहीं है।
महिलाओं को लेकर नहीं बदलेगी मानसिकता
समाज आज भी महिलाओं की प्रतिभा को पहचानने से पहले उनके रूप-रंग के आधार पर उनका मूल्यांकन करता है। मुझे भी कई बार कहा गया कि यह जगह तुम्हारे लिए नहीं है। मुझे लगता है कि यह अभी भी हो रहा है क्योंकि समाज अभी भी उसी सोच को दर्शाता है। समाज अभी भी मानता है, और अभी भी मेरे काम से पहले मेरे वजन को देखता है। इसलिए जब तक ऐसा होता रहेगा, तब तक मैं यह काम करती रहूंगी, यह साबित करने के लिए कि यह गलत है। लेकिन आपकी मेहनत रंग लाती है। आप अच्छा काम करते हैं तो लोग आपको प्यार देते हैं. मई इसका जीता जागता सबूत हूं।
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अगर दम है तो टिके रहो
मेरे माता -पिता जूनियर आर्टिस्ट थे। बचपन से मेरी पढ़ाई में कोई रूचि नहीं थी। गणित और साइंस मुझे समझ नहीं आते। ज्यादातर मैं क्लास के बाहर बैठकर कोई न कोई स्क्रिप्ट लिख रही होती थी। जैसे तैसे पास हो जाती थी। मुझे पता था कि मैं सिर्फ एक्टिंग ही कर सकती हूं। मेरी मां ने मुझे डांस क्लास में डाला था लेकिन अपने वजन की वजह से मुझे हिचक होती थी लेकिन एक दिन कॉलेज में मैंने डांस परफॉरमेंस का पम्पलेट देखा और परफॉर्म करने की हिम्मत जुटाई। वहीं से मुझमे एक आत्मविश्वास जागा। मैं यही आज के युवा एक्टर्स से कहना चाहूंगी कि काम ना मिल रहा हो लेकिन हिम्मत से जुटे रहो। मौका जरूर मिलेगा।
महिलाओं के लिए बेहतर भूमिकाएं लिखना बाकी
फिल्म निर्माताओं को अभी भी उन महिलाओं के लिए सार्थक भूमिकाएं लिखने में काफी लंबा सफर तय करना है जो पारंपरिक नायिका के सांचे में फिट नहीं बैठतीं। महिलाओं के लिए बेहतर भूमिकाएँ लिखने के मामले में अभी बहुत कुछ करना बाकी है। मैं यही करने की कोशिश कर रही हूं । जितने ज्यादा लोग मुझे देखेंगे, उनकी सोच उतनी ही बड़ी होगी। वे यह मानना शुरू कर देंगे कि वे इस अभिनेत्री के लिए, इस भूमिका के लिए कुछ बेहतर लिख सकते हैं। कुछ ऐसा जो केवल उनके शरीर का नहीं बल्कि उनकी प्रतिभा का उपयोग करे।
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मोटापे को लेकर शर्मिंदगी से परे
यह सिर्फ मोटापे को लेकर शर्मिंदा करने की बात नहीं है। लोग दूसरों को बहुत पतले होने, त्वचा के रंग, बाल न होने, उनके रूप-रंग, पहनावे, ब्रांड, हर चीज के लिए शर्मिंदा करते हैं। जिस दिन यह सब बंद होगा, जो शायद कभी न हो, उस दिन हम इन मुद्दों को एक अलग दृष्टिकोण से पेश कर सकते हैं और लोगों को दिखा सकते हैं कि क्या संभव है। हालात धीरे-धीरे बदल रहे हैं। पहले मिस मिमी जैसे किरदारों को सिर्फ बर्गर खाते हुए दिखाया जाता था, या स्वीटू को डबल चॉकलेट फ्रैपुचिनो और मफिन खाते हुए। इन किरदारों के लिए कोई स्टैंड नहीं लिया जाता था। लेकिन स्वीटू के आने से चीजें बदलने लगीं।
Created On :   13 July 2026 6:51 PM IST












