मनोरंजन: अनुपमा ने बदली महिलाओं के प्रति सोच, टीवी इंडस्ट्री को भी मिलना चाहिए सम्मान - रुपाली गांगुली

अनुपमा ने बदली महिलाओं के प्रति सोच, टीवी इंडस्ट्री को भी मिलना चाहिए सम्मान - रुपाली गांगुली
टीवी की दुनिया में जब भी लंबे समय तक दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले शोज की बात होती है, तो स्टार प्लस पर प्रसारित होने वाले लोकप्रिय धारावाहिक ‘अनुपमा' का नाम सबसे पहले लिया जाता है।

डिजिटल डेस्क, मुंबई। टीवी की दुनिया में जब भी लंबे समय तक दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले शोज की बात होती है, तो स्टार प्लस पर प्रसारित होने वाले लोकप्रिय धारावाहिक ‘अनुपमा' का नाम सबसे पहले लिया जाता है। रूपाली गांगुली अभिनीत इस शो ने हाल ही में अपने सफल प्रसारण के छह साल पूरे किए हैं। इस खास मौके पर दैनिक भास्कर से खास बातचीत में रूपाली ने ‘अनुपमा' की ऐतिहासिक सफलता, टेलीविजन इंडस्ट्री में लगातार लंबी शिफ्ट्स में काम करने की चुनौती, टीवी कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर अपेक्षित पहचान न मिलने और शो से जुड़े अपने छह साल के यादगार सफर पर खुलकर बात की। उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश...

‘अनुपमा’ आज हर घर में

आज लोग भले देश में रुपाली गांगुली को नहीं जानते होंगे लेकिन अनुपमा आज घर घर में पहुंच चुकी है। देश के प्रधानमंत्री जी से लेकर आम नागरिक तक हर कोई अनुपमा से परिचित है। 6 सालों में यही इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि है। अनुपमा का किरदार मुझे मिला इसके लिए सच में राजन शाही की आभारी हूं। टीवी इंडस्ट्री में काम मिलना और इतने लंबे समय तक दर्शकों का प्यार मिलना आज एक बड़ी बात है। देश में अगर एक भी महिला अपने सपनों को पूरे करने की हिम्मत रखती है तो वह अनुपमा है।

अनुपमा के बाद लिया अपना घर

मैं कई सालों से टीवी इंडस्ट्री में काम कर रही थी, लेकिन अपना घर नहीं था। ‘अनुपमा' के बाद मैंने अपनी मेहनत की कमाई से पहला घर खरीदा। जिस दिन चाबी हाथ में आई, मैं बहुत रोई। हर इंसान का सपना होता है कि उसका अपना घर हो, क्योंकि वही सबसे बड़ी सुरक्षा का एहसास देता है। मेरे पति ने हमेशा मेरा साथ दिया, बल्कि घर भी उन्होंने ही पसंद किया, लेकिन एक महिला के लिए अपनी कमाई से खरीदे घर की नेमप्लेट पर अपना नाम देखना अलग ही खुशी और आत्मविश्वास देता है। संयोग से ‘अनुपमा' में भी इन दिनों घर का ट्रैक चल रहा है। आमतौर पर भावुक दृश्यों में मैं ग्लिसरीन इस्तेमाल करती हूं, लेकिन इन सीन में उसकी जरूरत ही नहीं पड़ी, क्योंकि उस वक्त मैं सचमुच अपनी जिंदगी के उस पल को फिर से जी रही थी और मेरे आंसू बिल्कुल असली थे।

पापा का अधूरा सपना पूरा कर दिया

मेरे पिता अनिल गांगुली हिंदी सिनेमा के जाने-माने निर्देशक थे। बचपन से ही मैंने फिल्मी माहौल देखा और उनके साथ सेट पर रहकर अभिनय सीखा। लेकिन वक्त हमेशा एक जैसा नहीं रहता। उनकी कुछ फिल्में नहीं चलीं और देखते ही देखते हमारा घर समेत बहुत कुछ बिक गया। बाद में मां ने पगड़ी सिस्टम वाला एक छोटा-सा घर लिया, लेकिन वह कभी अपना घर होने का एहसास नहीं दे पाया। पापा हमेशा कहते थे कि चाहे एक कमरे का ही सही, लेकिन अपना घर जरूर होना चाहिए। मैंने उस समय बहुत कोशिश की, लेकिन उनकी जिंदगी में उनका यह सपना पूरा नहीं कर सकी। उनके जाने के बाद यह बात हमेशा मेरे दिल में रही। जब मैंने अपनी मेहनत की कमाई से अपना घर खरीदा और उसकी चाबी हाथ में ली, तो लगा जैसे मैंने सिर्फ अपना नहीं, बल्कि अपने पापा का अधूरा सपना पूरा कर दिया हो। इसलिए यह घर मेरे लिए सिर्फ एक मकान नहीं, बल्कि उनसे जुड़ी सबसे अनमोल याद और विरासत है।

महिला किरदार पहले से कहीं ज्यादा सशक्त

अनुपमा और मुझमें काफी समानताएं हैं, लेकिन इस किरदार से मैंने सबसे बड़ी सीख यह ली कि जिंदगी में पुरानी बातों का बोझ लेकर आगे नहीं बढ़ना चाहिए। अनुपमा हर सुबह नई उम्मीद और नए हौसले के साथ शुरुआत करती है। जब आप इतने लंबे समय तक किसी किरदार को जीते हैं, तो उसके कुछ हिस्से आपकी अपनी जिंदगी का भी हिस्सा बन जाते हैं। मुझे लगता है कि अनुपमा में देश की हर महिला की झलक है। वैसे भी टेलीविजन पर हमेशा से महिला किरदारों का दबदबा रहा है, लेकिन समय के साथ उनकी सोच और प्रस्तुति में बड़ा बदलाव आया है। आज टीवी की महिलाएं सिर्फ परिवार संभालने वाली नहीं, बल्कि अपने फैसले खुद लेने वाली, मजबूत और आत्मनिर्भर किरदारों के रूप में दिखाई जा रही हैं।

फिल्म में साइड रोल से बेहतर टीवी की मुख्य भूमिका

मुझे लगता है कि मैं टीवी के लिए ही बनीं हूं। बड़े परदे पर आपको वो सम्मान और प्यार नहीं मिलता जितना टीवी के कलाकारों को मिलता है। टीवी सीरियल्स सालों तक चलते है लोग इन किरदारों से जुड़ जाते हैं। इसलिए मैंने जहां भी जाती हूं मुझे लोगों ने बहुत सम्मान दिया है। बेहतर है आप छोटे परदे पर मुख्य भूमिका निभाए बजाय बड़ी फिल्म में साइड रोल के, इससे आप कहीं खोएंगे नहीं।

हमें भी तो सम्मान दो

टीवी इंडस्ट्री एक ऐसी इंडस्ट्री है जो सबसे ज्यादा काम करती है क्योंकि हमारा शो रोज दिखाया जाता है। यहां बारिश हो, आंधी हो हम नहीं रुक सकते। हमने कोविड में भी काम किया था लेकिन मुझ इस बात का बेहद अफसोस है कि हमें नेशनल वार्ड के लायक ही नहीं समझा जाता है। टीवी के सारे सदस्य छाए वह अभिनेता ही क्यों ना हो हम 16-18 घंटे कमा करते हैं और हमेस सम्मान के लायक ही नहीं समझा जाता। मैंने इसकी मांग उठाई है। उम्मीद है किसी समय हम भी सम्मान के हकदार होंगे।

Created On :   13 July 2026 8:24 PM IST

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