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FAKE NEWS: फेसबुक 13 जून से बदलने जा रहा है अपनी प्राइवेसी पॉलिसी, जानें वायरल पोस्ट का सच

FAKE NEWS: फेसबुक 13 जून से बदलने जा रहा है अपनी प्राइवेसी पॉलिसी, जानें वायरल पोस्ट का सच

डिजिटल डेस्क। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर फेसबुक से जुड़ा एक पोस्ट वायरल हो रहा है। इस पोस्ट में यह दावा किया जा रहा है कि 13 जून, शनिवार से फेसबुक अपनी प्राइवेसी पॉलिसी में बदलाव करने जा रहा है। वायरल पोस्ट में एक मैसेज के साथ यह चेतावनी दी गई है कि अगर यूजर्स इस लिखे हुए मैसेज को कॉपी करके अपनी वॉल पर पोस्ट नहीं करते हैं, तो उन्हें कानूनी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

किसने किया शेयर?
कई फेसबुक यूजर्स ने पोस्ट को शेयर किया है। 

वायरल मैसेज का हिंदी ट्रांसलेशन
कोविड-19 के कन्फ्यूजन के बीच, यह मत भूलो कि कल (यानी शनिवार 13 जून) फेसबुक एक नया नियम शुरू करने जा रहा है। इसके तहत हमारी तस्वीरों का उपयोग किया जा सकता है। उनका इस्तेमाल हमारे खिलाफ मुकदमों में किया जा सकता है। आज कल हम जो भी पोस्ट करते हैं वह सार्वजनिक हो जाता है। यहां तक ​​कि डिलीट किए गए मैसेज भी। इसलिए बाद में पछताने से बेहतर है कि इस मैसेज को अपनी वॉल पर कॉपी-पेस्ट करें।

"मैं फेसबुक को अपनी तस्वीरों, सूचनाओं, संदेशों या पोस्ट का उपयोग करने की अनुमति नहीं देता, न तो अतीत से न ही भविष्य में।" मैं फेसबुक को सूचित करता हूं कि इस प्रोफाइल / या इसके कंटेंट का उपयोग मेरे खिलाफ करने की सख्त मनाही है। इस प्रोफ़ाइल का कंटेंट निजी है और इसमें मेरी गोपनीय जानकारी है। मेरे निजी जीवन के उल्लंघन को कानून द्वारा दंडित किया जा सकता है।

नोट: "फेसबुक" अब एक सार्वजनिक संस्था है। सभी सदस्यों को इस तरह से एक नोट पोस्ट करना चाहिए। यदि आप चाहें, तो आप इस पोस्ट की एक कॉपी अपने पास रख सकते हैं। यदि आप कम से कम एक बार बयान पोस्ट नहीं करते हैं, तो आप चुपचाप अपनी तस्वीरों का उपयोग करने की अनुमति देंगे। "शेयर" नहीं, लेकिन "कॉपी + पेस्ट"।

क्या है सच?
भास्कर हिंदी टीम ने पाया कि, वायरल पोस्ट के साथ किया जा रहा दावा गलत है। सर्च करने पर हमें ऐसी कोई खबर नहीं मिली, जिससे इस बात की पुष्टि होती हो कि फेसबुक अपनी प्राइवेसी पॉलिसी बदलने जा रहा है। फेसबुक की तरफ से जारी किया गया ऐसा कोई बयान भी हमें नहीं मिला है।  मैसेज को ही फेसबुक पर सर्च करने पर यह पता चला कि ये पोस्ट पहले भी कई बार वायरल हो चुकी है। 2012 में फेसबुक ने इसका खंडन भी किया था। फेसबुक के न्यूजरूम सेक्शन में 27 नवंबर, 2012 का बयान है। जिसमें फेसबुक ने इस तरह के वायरल मैसेज को अफवाह बताया है।

फेसबुक ने हेल्प कम्युनिटी नाम का एक सेक्शन भी बनाया है, जहां यूजर्स सवाल पूछ सकते हैं। फेसबुक की टीम इन सवालों के जवाब भी देती है। यहां एक यूजर ने भी इस वायरल मैसेज से जुड़ा सवाल पूछा है। जवाब देते हुए फेसबुक की टीम ने इस मैसेज को स्कैम बताते हुए रिपोर्ट करने की सलाह दी है।

निष्कर्ष
फेसबुक पर वायरल पोस्ट के साथ किया जा रहा दावा गलत है। फेसबुक अपनी प्राइवेसी पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं करने जा रहा है। फेसबुक ने खुद इस पोस्ट को गलत बताया है।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।