फैक्ट चैक: क्या ध्यान कर रहे साधु की फोटो केदारनाथ धाम के पास माइनस 10 डिग्री तापमान में तपस्या करने की है? जानें वायरल फोटो का सच

November 22nd, 2022

डिजिटल डेस्क, भोपाल। देवभूमि उत्तराखंड में हिमालय पर्वत पर स्थित केदारनाथ धाम सर्दियों के आने से पहले बंद हो जाता है। इस साल बीते 27 अक्टूबर को मंदिर के कपाट बंद हो चुके हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है। इस फोटो में एक साधु नजर आ रहे हैं जो कि ध्यान की मुद्रा में बैठे हुए हैं। उनके शरीर पर कोई पदार्थ लिपटा हुआ है जो दिखने में बर्फ जैसा लग रहा है। फोटो को शेयर करते हुए दावा किया जा रहा है कि केदारनाथ के कपाट बंद होने के बाद यह साधु माइनस 10 डिग्री तापमान में मंदिर के पास बैठकर तपस्या कर रहे हैं।

वायरल तस्वीर को शेयर करते हुए एक फेसबुक यूजर ने लिखा,  “माइनस 10 डिग्री सेंटीग्रेट में, केदारनाथ यात्रा बंद होने के बावजूद भी केदार नाथ धाम के दरबार में तपस्या करते एक साधू महाराज। सत्य सनातन धर्म की जय।”

पड़ताल - वायरल फोटो की सच्चाई का पता लगाने के लिए हमने इसके बारे में जानकारी एकत्रित की। इसके लिए सबसे पहले हमनें वायरल फोटो को रिवर्स सर्च के माध्यम से सर्च किया। सर्च करने पर हमें वायरल फोटो फेसबुक पर मिली। 18  जून 2019 को एक फेसबुक द्वारा शेयर की गई इस फोटो के साथ लिखा ये फोटो पंचनाम जूना अखाड़ा के बाबा भले गिरी जी महाराज की तस्वीर है। तस्वीर में साधु के शरीर बर्फ नहीं बल्कि राख जैसा कोई पदार्थ लिपटा है। इस फोटो को एडिट करके वायरल किया जा रहा है।

इसके अलावा हमें इसी फेसबुक प्रोफाइल पर सर्च करने पर जून 2019 में अपलोड हुई कुछ फोटोज मिलीं। जिनमें साधु जलते हुए गोबर के उपलों के मध्य में ध्यान लगाए हुए बैठे नजर आ रहे हैं। आगे सर्च करने पर हमें एक यू्ट्यूब चैनल पर इसका वीडियो मिला। अगस्त 2019 में अपलोड किए गए इस वीडियो में साधु गोबल के उपलों के ढेरों के मध्य बैठ जाते हैं। इसके बाद कुछ पास में खड़े लोग उन पर उपलों की राख को लगाते हैं।

हमारी सर्च में हमें पता चला कि ये साधु हरियाणा के सोनीपत जिले के हैं। यह यहां के पाराशर ऋषि तीर्थ स्थल के महंत हैं। 

इस तरह हमने अपनी पड़ताल में पाया कि सोनीपत के साधु की तस्वीर को एडिट करके उसे केदारनाथ धाम के बाहर माइनस 10 डिग्री तापमान में तपस्या करता हुआ बताया गया है। इसके अलावा इनके शरीर पर बर्फ नहीं बल्कि उपलों की राख है। 

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