दैनिक भास्कर हिंदी: कोरोना संक्रमित बच्चों का इलाज एक चुनौती की तरह (आईएएनएस विशेष)

June 25th, 2020

हाईलाइट

  • कोरोना संक्रमित बच्चों का इलाज एक चुनौती की तरह (आईएएनएस विशेष)

लखनऊ, 25 जून (आईएएनएस)। कोविड अस्पतालों में भर्ती कोरोनावायरस से संक्रमित बच्चों का इलाज करना डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के लिए एक चुनौती बन गया है। उनमें से अधिकांश घबराहट, तनाव और डर की शिकायत करते हैं। पीपीई सूट पहने स्वास्थयकर्मियों को देखकर वे भूत चिल्लाते हैं।

बच्चे आइसोलेशन की जरूरत को नहीं समझ सकते हैं और इसलिए, चिड़चिड़े हो जाते हैं और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ सहयोग नहीं करते हैं।

केजीएमयू के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने कहा, कई मामलों में, अगर बच्चे परेशान करते हैं तो अब हम माता-पिता में से एक को बच्चे के साथ रहने की अनुमति दे रहे हैं। माता-पिता के लिए पीपीई किट पहनने सहित सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना आवश्यक है। हालांकि, कुछ बच्चे हमें पीपीई किट में घूमते देखकर डर जाते हैं।

प्रयागराज के एक चिकित्सक के अनुसार, कोविड अस्पतालों में भर्ती ज्यादातर बच्चे बेचैनी, अकेलेपन, भय का अनुभव करते हैं।

उन्होंने कहा कि वे हम सबको भूत समझकर चिल्लाने लगते हैं।

कोरोना पॉजिटिव एक चार साल के बच्चे का उदाहरण देते हुए, डॉक्टर ने कहा कि बच्चे को अस्पताल में भर्ती होने के कुछ ही घंटों में बुखार हो गया।

उन्होंने कहा, हमने महसूस किया कि वह उस माहौल में बहुत घबराया था जहां हर कोई पीपीई सूट में घूम रहा था। हमने नर्स से उसके माता-पिता और भाई-बहनों को वीडियो कॉल करने के लिए कहा। एक दिन बाद बच्चे का बुखार कम हो गया था और अधिक सहज लग रहा था। हमने उसे वायरस के कारण आइसोलेटेड रहने की आवश्यकता बताई और उसने धीरे-धीरे स्थिति को स्वीकार कर लिया।

एक अन्य मामले में एक तीन साल के कोरोना संक्रमित बच्चे के साथ डॉक्टरों को उसकी मां को साथ रहने की अनुमति देनी पड़ी क्योंकि बच्चा असहज था।

लखनऊ में कम से कम दो मामलों में बहुत ज्यादा डरे, घबराए बच्चों के लिए डॉक्टरों को उन्हें पेशेवर परामर्श प्रदान करना पड़ा।

बाल परामर्शदाताओं को बुलाया गया और उन्होंने बच्चों के साथ घंटों तक बातचीत की, उन्हें आइसोलेशन की आवश्यकता के बारे में समझाने की कोशिश की। बच्चों को सहज होने में लगभग दो से तीन दिन लग गए।

राज्य के कुछ अस्पताल अब बच्चों को मन बहलाने के लिए खिलौने, गेम और यहां तक कि कलर बुक दे रहे हैं।

कुछ एनजीओ ने भी खिलौने भेजे हैं ।