फारस की खाड़ी: अमेरिकी नाकेबंदी और कार्रवाई से ईरान को तेल के राजस्व में करीब 4.8 अरब डॉलर का नुकसान

अमेरिकी नाकेबंदी और कार्रवाई से ईरान को तेल के राजस्व में करीब 4.8 अरब डॉलर का नुकसान
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के जनसंपर्क अधिकारी सीन पार्नेल ने पेंटागन के कार्यवाहक प्रेस सचिव जोएल वाल्डेज के बयान का हवाला देते हुए कहा अमेरिकी कार्रवाई का मकसद ईरान पर लगातार आर्थिक दबाव बरकरार रखना है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। फारस की खाड़ी में अमेरिकी नाकेबंदी और कार्रवाई से ईरान को तेल के राजस्व में करीब 4.8 अरब डॉलर का घाटा हुआ है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी। एक्सिओस ने पेंटागन के अनुमान के आधार पर अपनी रिपोर्ट में ऐसा दावा किया है। ईरान के घाटे की वजह अमेरिकी कार्रवाई और नाकेबंदी से ईरान के समुद्री व्यापार और ऊर्जा निर्यात में बाधित हुआ है।

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के आकलन के मुताबिक इस इलाके में अमेरिका की कार्रवाई के कारण ईरान को तेल से होने वाली आय में करीब पांच अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। यह नुकसान इसलिए हुआ, क्योंकि अमेरिका की तरफ से समुद्र में जो कार्रवाई की जा रही है, उससे ईरान का समुद्री व्यापार और ऊर्जा निर्यात बाधित हो गया है।

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरानी नेतृत्व को गटर के पाइप के चूहे बताया और कहा कि तेहरान की सरकार को जमीनी हकीकत का पता नहीं है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय उनके खिलाफ हो चुका है। बेसेंट ने कहा कि अमेरिका का होर्मुज पर पूरा कंट्रोल है और जब तक समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता (फ्रीडम ऑफ नेविगेशन) बहाल नहीं होती, तब तक नाकेबंदी जारी रहेगी।

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के जनसंपर्क अधिकारी सीन पार्नेल ने पेंटागन के कार्यवाहक प्रेस सचिव जोएल वाल्डेज के बयान का हवाला दिया। वाल्डेज ने कहा कि अमेरिकी कार्रवाई का मकसद ईरान पर लगातार आर्थिक दबाव कायम रखना है। उन्होंने एक्स पर लिखा, होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी नाकेबंदी पूरी ताकत से जारी है और वह अच्छा परिणाम दे रही है, जिसकी हमने उम्मीद की थी। ईरानी शासन की आतंकवाद और क्षेत्रीय अस्थिरता को फंड करने की क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। हमारे सशस्त्र बल इलाके में लगातार दबाव बनाए रखेंगे। पेंटागन रिपोर्ट ऐसे टाइम में आई है जब होर्मुज स्ट्रेट के पास जलमार्गों को लेकर तनाव जारी है, जो दुनिया के सबसे अहम व्यापारिक जलमार्गों में से एक है।

बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि डॉलर की कमी के चलते ईरान की स्थिति बहुत खराब है, सीमित मात्रा में भोजन और पेट्रोल का वितरण हो रहा है और पूरी दुनिया उसके खिलाफ है। नाकेबंदी जारी रहेगी। ईरानी दूतावास ने दक्षिण अफ्रीका में बेसेंट के बयान की निंदा की। इससे पहले इस्लामाबाद में वार्ता विफल होने के बाद 13 अप्रैल को अमेरिका ने ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी शुरू कर दी थी।

Created On :   2 May 2026 2:38 PM IST

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