ब्राजील राष्ट्रपति चुनाव 2026: कारोबार में बढ़ोतरी से लेकर ब्रिक्स में सहयोग तक, लूला दा सिल्वा की वापसी से भारत को कितने फायदे?

कारोबार में बढ़ोतरी से लेकर ब्रिक्स में सहयोग तक, लूला दा सिल्वा की वापसी से भारत को कितने फायदे?
लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने ब्राजील राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक फ्लावियो बोल्सोनारो को मात दी। राष्ट्रपति चुनाव में लूला दा सिल्वा की यह चौथी जीत है।

डिजिटल डेस्क, दिल्ली। लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने ब्राजील राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक फ्लावियो बोल्सोनारो को मात दी। राष्ट्रपति चुनाव में लूला दा सिल्वा की यह चौथी जीत है। इससे पहले उन्होंने साल 2022 के चुनाव में फ्लावियो के पिता और ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो को भी हराया था।

पिछड़ने के बाद वापसी

पहले दौर की मतगणना में लूला बोल्सोनारो से पिछड़ गए थे। लेकिन दूसरे दौर की गणना में उन्होंने शानदार वापसी कर जीत हासिल की। बता दें कि 1989 के चुनाव के बाद यह पहली बार हुआ है जब कोई प्रत्याशी पहले दौर में पिछड़ने के बाद आखिरी राउंड में जीतकर राष्ट्रपति बना है।

भारत के लिए क्यों अहम है लूला की जीत?

लूला दा सिल्वा की इस ऐतिहासिक जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी है। उन्होंने कहा कि भारत और ब्राजील के रिश्तों और मजबूत करने के लिए दोनों साथ काम करना चाहते हैं। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि भारत और ब्राजील ग्लोबल साउथ के देशों के हितों को आगे बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे।

लूला दा सिल्वा की ब्राजील राष्ट्रपति चुनाव में शानदार जीत भारत के लिए काफी अहम मानी जा रही है। लूला की वापसी से दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और रेयर अर्थ्स मटेरियल जैसे खनिज के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ सकता है।

दोनों देशों के बीच 2025 में 15.21 अरब डॉलर का कारोबार हुआ। दोनों देशों ने अगले 5 साल में इसे 20 अरब डॉलर तक ले जाने का टारगेट रखा है।

भारत ब्राजील के कच्चे तेल का खरीददार है। अपनी जरूरतों को पूरी करने के लिए भारत अलग-अलग देशों से कच्चा तेल खरीदता है, जिससे किसी एक देश पर उसकी निर्भरता कम हो सके।

लूला को पश्चिमी देशों के मुकाबले विकासशील देशों का पक्षधर माना जाता है। भारत विकासशील देश है और वह ब्राजील के साथ ब्रिक्स का सदस्य भी है। ऐसे में अमेरिका के साथ संतुलन स्थापित करने में उसे ब्राजील का साथ मिल सकता है।

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