चीन पर कानून तोड़ने का आरोप: ताइवान के बाद चीन की हरकतों पर भड़का मलेशिया, चीन राजदूत को किया तलब

October 7th, 2021

हाईलाइट

  • चीन को मलेशिया ने दिखाई आंख

डिजिटल डेस्क,नई दिल्ली। चीन साउथ चाइना सी को अपना बताता है,लेकिन उसके आसपास के कई देश मलेशिया, फिलीपीन्स, ब्रूनेई, ताइवान और वियतनाम उसके इस दावे का पुरजोर विरोध करते हैँ। कुछ सालों से चीन ने इस विवादित इलाके में अपनी गतिविधियों को काफी तेज कर दिया है। हाल ही में मलेशिया ने साउथ चाइना सी में कुआलालंपुर इलाके में चीनी जहाजों की मौजूदगी को लेकर कड़ा विरोध जताया है। आपत्ति जताते हुए मलेशिया के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि चीन के जहाजों के साथ एक बोट भी थी। जो सबा और सरवाक तटों पर थी। उनकी मौजूदगी और कार्य संयुक्त राष्ट्र के 1982 के समुद्री कानून का उल्लघंन है। 

 विशेष आर्थिक क्षेत्र में चीन के ठिकाने
चीन ने इस क्षेत्र में कृत्रिम द्वीप से लेकर सैन्य ठिकानों का निर्माण किया है। चीन इसके पीछे की वजह भले ही शांतिपूर्ण बताता रहा हो,लेकिन उसके इरादे नेक नहीं है। वहीं मलेशिया का कहना है, वह जो भी एक्शन ले रहा है, वह अंतर्राष्ट्रीय कानूनों पर आधारित है, जो मलेशिया के जल क्षेत्र की संप्रभुता और अधिकारों के सुरक्षा के लिए जरूरी है। मलेशिया इससे पहले भी इस इलाके में चीन के जहाजी डेरा का विरोध कर चुका है। साउथ चाइना सी में स्थित बर्नियो द्वीप पर मलेशिया अपना दावा करता है। यह क्षेत्र उसके विशेष आर्थिक क्षेत्र में आता है। जहां चीन गतिविधियों का अंजाम देता है।

जून के बाद फिर तना जून माह में साउथ चाइना सी के विवादित क्षेत्र में चीन के 16 फाइटर जेट की उपस्थिति के बाद मलेशिया ने चीन के राजदूत को तलब किया था। चीन की संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी का पता करने के लिए चीन के जहाजों का मलेशिया के लड़ाकू विमानों ने पीछा भी किया। उस वक्त मलेशिया ने इस घटना को राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए खतरा बताया था। जबकि चीन अंतर्राष्ट्रीय कानूनों की दुआई देता रहा।चीन तोड़ता है कानून: मलेशिया

चीन कुछ समय से कई मुद्दों को लेकर विवादों में है। चीन ने अभी हाल ही में अपने राष्ट्रीय दिवस पर कई लड़ाकू विमानों के जत्थे को ताइवान के हवाई रक्षा क्षेत्र से निकाला था। जिस पर ताइवान की राष्ट्रपति ने कड़ी आपत्ति ली। वहीं भारत के साथ भी उसका इरादा ठीक नहीं है। एलएसी पर भारत के साथ चीन कुछ ना कुछ खुरापाती हरकत करता रहता है,जिससे दोनों देशों के बीच तनातनी बनी रहती है। इसके अतिरिक्त ऑकस  समझौते को लेकर जिसमें आस्ट्रेलिया,अमेरिका और ब्रिटेन के बीच पनडुब्बी परमाणु साझा नीति पर चीन अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में छाया रहा।