दैनिक भास्कर हिंदी: ट्रंप-किम की मुलाकात एक बार फिर पटरी पर, नॉर्थ कोरिया पहुंचा अमेरिका का दल

May 29th, 2018

हाईलाइट

  • खटाई में पड़ी 12 जून को सिंगापुर में होने वाली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और नार्थ कोरिया के शासक किम जोंग उन की मुलाकात एक बार फिर पटरी पर है।
  • माना जा रहा है कि ट्रंप और किम की मुलाकात तय समय और दिन पर ही होगी।
  • अमेरिका का एक दल मेरे और किम जोंग उन की मीटिंग की तैयारियों के लिए नॉर्थ कोरिया पहुंच गया है।

डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। खटाई में पड़ी 12 जून को सिंगापुर में होने वाली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और नार्थ कोरिया के शासक किम जोंग उन की मुलाकात एक बार फिर पटरी पर है। ट्रंप ने ट्वीट कर इस मीटिंग की तैयारियां शुरू होने की जानकारी दी है। ऐसे में अब एक बार फिर ये माना जा रहा है कि ट्रंप और किम की मुलाकात तय समय और दिन पर ही होगी।

अमेरिका का दल पहुंचा नॉर्थ कोरिया
डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट कर कहा, अमेरिका का एक दल मेरे और किम जोंग उन की मीटिंग की तैयारियों के लिए नॉर्थ कोरिया पहुंच गया है। मुझे पूरा विश्वास है कि उत्तरी कोरिया में बहुत अधिक क्षमता है और एक दिन यह राष्ट्र एक महान आर्थिक और वित्तीय राष्ट्र बनेगा। किम जोंग उन भी इस पर मुझसे सहमत हैं। यह होगा! हालांकि, अमेरिका ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के नामों की घोषणा नहीं की है।

 

 

बयानों से नाराज होकर रद्द कर दी थी मुलाकात
बता दें कि 12 जून को सिंगापुर में ट्रंप और किम जोंग उन के बीच ऐतिहासिक मुलाकात होने वाली थी, लेकिन ट्रंप ने इसे बीते दिनों नार्थ कोरिया की तरफ से आए बयानों को देखते हुए रद्द कर दिया था। ट्रंप ने मुलाकात को रद्द करते हुए कहा था, मैंने 12 जून को सिंगापुर में तय शिखर सम्मेलन को समाप्त करने का फैसला किया है। एक बड़ा मौका संभावित रूप से आगे है, मेरा मानना है कि यह उत्तर कोरिया के लिए जबरदस्त झटका होगा।

वैश्विक समुदाय में निराशा
मीटिंग रद्द होने के बाद नार्थ कोरिया विदेश मंत्रालय के उच्च अधिकारी किम काय ग्वान ने कहा था, ट्रंप के इस फैसले से कोरियन प्रायदीप पर शांति चाहने वाले वैश्विक समुदाय को निराशा हुई है। हम एक बार फिर अमेरिका को बताना चाहते हैं कि हमारा इरादा अमेरिका के साथ बैठकर समस्याओं का समाधान करने का है। हम किसी भी वक्त प्रेसिडेंट ट्रंप से मिलने को तैयार हैं। ग्वान ने कहा था, ट्रंप का फैसला दुनिया में शांति और स्थिरता के लिए मानव जाति की इच्छा के अनुरूप नहीं है।