comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

इंटरपोल ने बताया- हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी अमेरिका में नहीं

July 16th, 2018 18:59 IST
इंटरपोल ने बताया- हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी अमेरिका में नहीं

हाईलाइट

  • इंटरपोल वॉशिंगटन ने कहा है कि फरार हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी संयुक्त राज्य अमेरिका में नहीं हैं।
  • इंटरपोल वाशिंगटन ने पिछले बुधवार को भारत के अनुरोध पर जवाब दिया था।
  • भारत ने चोकसी के ठिकाने के बारे में और जानकारी मांगने के लिए इंटरपोल को दोबारा लेटर लिखा है।

डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। इंटरपोल वॉशिंगटन ने कहा है कि भारत के फरार हीरा कारोबारी नीरव मोदी के चाचा मेहुल चोकसी अमेरिका में नहीं हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इंटरपोल वाशिंगटन ने पिछले बुधवार को भारत के अनुरोध पर जवाब दिया था कि चोकसी अमेरिका में नहीं है। सूत्रों ने बताया कि भारत ने चोकसी के ठिकाने के बारे में और जानकारी मांगने के लिए इंटरपोल को दोबारा लेटर लिखा है।

11 जून को, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने प्रिवेन्शन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) कोर्ट मुंबई में फ्यूजीटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर ऑर्डिनेंस, 2018 के तहत नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के खिलाफ दो अलग-अलग आवेदन दायर किए थे। ईडी ने भारत, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त अरब अमीरात में उसकी संपत्ति जब्त करने के आदेश भी जारी करने को कहा। सूत्रों ने कहा, नीरव मोदी ने ब्रिटेन में राजनीतिक शरण नहीं मांगी है। बता दें कि नीरव मोदी के खिलाफ पहले ही गैर जमानती वारंट जारी किया जा चुका है।

इससे पहले इंटरपोल ने पंजाब नेशनल बैंक में हुए करोड़ों के घोटाले के मामले में नीरव के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया था। इसके अलावा नीरव के भाई निश्चल मोदी और कंपनी के एक्जिक्यूटिव सुभाण परब के खिलाफ भी रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। 28 जून को मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स (MEA) के एक अधिकारी ने बताया था कि भारत ने कई देशों से अनुरोध किया है कि वह नीरव मोदी में अपने देश में न आने दें। MEA ने नीरव मोदी पर प्रतिबंध लगाने के लिए फ्रांस, ब्रिटेन और बेल्जियम समेत कुछ यूरोपीय देशों से भी सहायता मांगी है।

पीएनबी ने इस साल की शुरुआत में हजारों करोड़ के घोटाले का पता लगाया था, जिसमें नीरव मोदी और मेहुल चोकसी ने बैंक के कुछ कर्मचारियों की कथित मिलिभगत से 2 बिलियन अमरीकी डालर की कथित तौर पर धोखाधड़ी को अंजाम दिया था।

कमेंट करें
HgnVQ
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।