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महिंदा राजपक्षे बने श्रीलंका के नए प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति गोतभाया ने दिलाई शपथ

November 21st, 2019 19:56 IST
महिंदा राजपक्षे बने श्रीलंका के नए प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति गोतभाया ने दिलाई शपथ

हाईलाइट

  • महिंदा राजपक्षे ने गुरुवार को श्रीलंका के 23वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली
  • एक दिन पहले ही राष्ट्रपति गोतभाया राजपक्षे ने उन्हें प्रधानमंत्री घोषित किया था
  • अगस्त 2020 में आम चुनाव तक कार्यवाहक कैबिनेट के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य करेंगे

डिजिटल डेस्क, कोलंबो। महिंदा राजपक्षे ने गुरुवार को श्रीलंका के 23वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। एक दिन पहले ही महिंदा के भाई और राष्ट्रपति गोतभाया राजपक्षे ने उन्हें प्रधानमंत्री घोषित किया था। 74 वर्षीय नेता अगस्त 2020 में आम चुनाव तक कार्यवाहक कैबिनेट के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य करेंगे।

इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे, पूर्व राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना और कई अन्य पॉलिटिकल लीडर उपस्थित थे। यह प्रधानमंत्री के रूप में महिंदा की दूसरी पारी है। देश में एक प्रमुख राजनीतिक उथल-पुथल के बीच वह 2018 में एक संक्षिप्त अवधि के लिए प्रधानमंत्री बने थे।

इससे पहले दिन में, विक्रमसिंघे ने औपचारिक रूप से राष्ट्रपति गोतभाया को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने नए प्रधानमंत्री के लिए अपने आधिकारिक निवास को भी खाली कर दिया। विक्रमसिंघे ने राष्ट्रपति चुनाव में मिली हार के बाद बुधवार को अपने इस्तीफे की घोषणा की थी।

विक्रमसिंघे ने कहा कि उन्होंने मंगलवार को राष्ट्रपति राजपक्षे से मुलाकात की और श्रीलंका के संसद के भविष्य पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि 'उनकी सरकार के पास अभी भी संसद में बहुमत है, लेकिन राष्ट्रपति चुनाव में राजपक्षे को दिए गए जनादेश का सम्मान करते हुए पद छोड़ने का फैसला लिया है।

बता दें कि महिंदा राजपक्षे को पिछले साल 26 अक्टूबर को तत्कालीन राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने प्रधानमंत्री नियुक्त कर विक्रमसिंघे को बर्खास्त कर दिया था। श्रीलंका की राजनीति में अचानक इस तरह का बदलाव इसलिए आया था क्योंकि सिरिसेना की पार्टी यूनाइटेड पीपुल्स फ्रीडम (UPFA) ने  रणिल विक्रमेसिंघे की यूनाइटेड नेशनल पार्टी (UNP) के साथ गठबंधन तोड़ लिया था। इसके बाद मैत्रिपाला सिरिसेना ने 225 सदस्यीय संसद को भंग कर दिया था।

विक्रमसिंघे ने संसद भंग करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इसके बाद संसद भंग के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी। चीफ जस्टिस नलिन परेरा की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने यह फैसला सुनाया था। इसके बाद रानिल विक्रमसिंघे ने संसद में स्पष्ट बहुमत साबित कर दिया था। 225 सदस्यीय संसद में विश्वास प्रस्ताव को पारित करने के पक्ष में रानिल विक्रमसिंघे को 117 वोट मिले थे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के चलते 15 दिसंबर 2018 को महिंदा ने इस्तीफा दे दिया था।

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