दैनिक भास्कर हिंदी: भारत के हाथ नहीं आएगा जाकिर नाईक, मलेशियाई पीएम ने सौंपने से किया इनकार

September 5th, 2018

डिजिटल डेस्क, कुआलालम्पुर। डॉक्टर के तौर पर अपने करियर की शुरुआत करने वाले इस्लामिक उपदेशक डॉ जाकिर नाईक को मलेशिया पीएम की ओर से बड़ी राहत मिली है। मलेशिया सरकार ने जाकिर नाईक को भारत को सौंपने से मना कर दिया है। मलेशिया के पीएम ने कहा है कि नाईक से हमारे देश को अभी तक किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं हुई है। नाईक जब तक चाहे यहां रह सकते हैं। उन्हें यहां की नागरिकता प्राप्त है। 

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 31 मई को मलेशिया का दौरा किया था। इस दौरान दोनों देशों के बीच हुई वार्ता में मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने आतंकवाद से निपटने के लिए भारत का साथ देने की बात कही थी। इस बीच जाकिर नाईक मलेशिया में शरण पाने में कामयाब रहा था, लेकिन मलेशिया सरकार के साथ ही खुद जाकिर नाईक ने भारत आने से मना कर दिया था।

गौरतलब है कि नाईक ने जुलाई 2016 में भारत छोड़कर दूसरे देश में शरण ली थी। नाईक को बांग्लादेश की शेख हसीना सरकार ने उनके विवादित भाषणों के चलते देश में आने से मना कर दिया था। हसीना सरकार का मानना है कि नाईक के भाषणों से युवाओं में गलत संदेश गया और उन्हीं के भाषणों से प्रेरित होकर युवा अनैतिक गतिविधियों में लिप्त हो गए। हसीना सरकार जाकिर नाईक को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में 2016 में हुई हमले के लिए जिम्मेदारी मानती हैं। 

जाकिर नाईक के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग के मामले में एनआईए ने विवादित इस्लामिक उपदेशक नाइक के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर रखी है। नाईक के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं में केस दर्ज है। जाकिर पर IRF की धारा 10 UA (P) और IPC की 120B, 153A, 295A, 298 and 505(2) धाराएं लगाई गईं हैं। जांच में यह पाया गया था कि जाकिर नाईक अपने भाषणों से विभिन्न समुदायों के बीच नफरत पैदा कर रहा था।