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Mars Mission: मंगल ग्रह पर इस महीने तीन देश भेज रहे अपने-अपने स्पेस क्राफ्ट, जानिए क्यों खास है ये मिशन?


हाईलाइट

  • मंगल ग्रह पर तीन देश - अमेरिका, चीन और UAE भेज रहे स्पेस क्राफ्ट
  • 483 मिलियन किलोमीटर से ज्यादा का सफर तय करेंगे तीनों स्पेसक्राफ्ट
  • क्या मंगल ग्रह पर अरबों साल पहले जीवन था जब वहा समुद्र हुआ करता था?

डिजिटल डेस्क, केप कैनावेरल मंगल ग्रह पर तीन देश - अमेरिका, चीन और संयुक्त अरब अमीरात - इस महीने मानवरहित अंतरिक्ष यान भेज रहे हैं। प्रत्येक अंतरिक्ष यान (space craft) अगले फरवरी में मंगल पर पहुंचने से पहले 300 मिलियन मील (483 मिलियन किलोमीटर) से अधिक की यात्रा करेगा। एक अंतरिक्ष यान को पृथ्वी की कक्षा से बाहर लूप करने और मंगल की कक्षा के साथ सिंक करने में, कम से कम छह से सात महीने लगते हैं। इन मिशनों के जरिए साइंटिस्ट जानना चाहते हैं कि क्या मंगल ग्रह पर अरबों साल पहले जीवन था जब वहा समुद्र, तालाब और नदिया हुआ करती थी? क्या अभी भी मंगल ग्रह पर जीवन मौजूद है? साइंटिस्ट, मानव को मंगल पर भेजने से पहले ज्यादा से ज्यादा जानकारी भी इकट्ठा कर पूरी तैयारी कर लेना चाहते हैं।

तीनों मिशन लगभग एक साथ लॉन्च होना संयोग नहीं
तीन देशों का लगभग एक साथ मिशन को लॉन्च करना कोई संयोग नहीं हैं। दरअसल, हर 26 महीने में साइंटिस्टों को मिशन लॉन्च करने के लिए ऐसी विंडो मिलती है जिसमें ट्रैवल टाइम न्यूनतम हो जाता है और फ्यूल भी कम लगता है। इस समय मंगल और पृथ्वी दोनों सूर्य के एक ही तरफ होते हैं। हालांकि मंगल पर भेजे गए 50% से ज्यादा मिशन फेल हुए हैं। साल 2011 में चीन ने रूस के साथ मिलकर मंगल ग्रह के लिए एक मिशन लॉन्च किया था जो फेल हो गया था। केवल अमेरिका ऐसा देश है जिसने मंगल ग्रह पर सफलतापूर्वक अंतरिक्ष यान को लैंड कराया है। 1976 में ट्विन वाइकिंग्स के साथ शुरुआत करते हुए वह 8 बार ऐसा कर चुका है। नासा के दो लैंडर इनसाइट और क्यूरियोसिटी अब भी वहां ऑपरेशनल है। छह अन्य अंतरिक्ष यान ऑर्बिट से ग्रह को एक्सप्लोर कर रहे हैं। इनमें तीन अमेरिकी, दो यूरोपीय और एक भारत से हैं। चीन और संयुक्त अरब अमीरात भी अब इस अलीट क्लब में शामिल होना चाहते हैं।

नासा 30 जुलाई को लॉन्च करेगा अपना मिशन
नासा 30 जुलाई को केप कैनावेरल से अपने मिशन को लॉन्च करेगा। इस मिशिन में, एक छह पहियों वाले रोवर को भेजा जा रहा है। कार के साइज के इस रोवर को परसेवेरेंस (Perseverance) नाम दिया गया है। ये पत्थर के सैंपल इकट्ठे करेगा जिसे करीब एक दशक में विश्लेषण के लिए पृथ्वी पर वापस लाया जाएगा। परसेवेरेंस की लैंडिंग को एंसीएंट रिवर डेल्टा और लेक में कराया जाना प्लान किया गया है। इसे जेज़ीरो क्रेटर के रूप में जाना जाता है जो बोल्डर, चट्टानों, रेत के टीलों से भरा है। यह क्रेटर फ्लोरिडा के लेक ओकीचोबी जितना बड़ा नहीं है। सतह तक पहुंचने के लिए, इस अंतरिक्ष यान को मंगल ग्रह के धुंधले आसमान को पार करना होगा। यह इस मिशन का सबसे रिस्की पार्ट होगा। इसमें करीब सात मिनट का समय लगेगा। यहीं सात मिनट तय करेंगे कि मिशन सफल हुआ या नहीं। हालांकि ब्रांड-न्यू गाइडेंस और पैराशूट-ट्रिगरिंग तकनीक यान को सुरक्षित रखने में मदद करेगी। 

जेज़ीरो क्रेटर को 60 अन्य संभावित साइटों में चुना 
वैज्ञानिकों ने जेज़ीरो क्रेटर को 60 अन्य संभावित साइटों में चुना है, क्योंकि 3.5 बिलियन साल पहले यह पानी में बह गया था। वैज्ञानिकों को लगता है कि यहां पर जीवन के सबूत मिल सकते हैं। परसेवेरेंस ऐसे बायोलॉजिकल सिग्नेचर वाली चट्टानों की खोज करेगा और करीब आधा किलो सैंपल कलेक्ट करने के लिए उसमें ड्रिल करेगा। इन सैंपलों को दर्जनों टाइटेनियम ट्यूबों में इकट्ठा किया जाएगा जिसे दूसरा रोवर कलेक्ट करेगा। ये सैंपल पृथ्वी पर मौजूद रोगाणुओं से दूषित न हो इसे रोकने के लिए, ट्यूबों को सुपर-स्टरलाइज किया जाएगा। इसके अलावा परसेवेरेंस पर मौजूद रेडार की मदद से वहां मौजूद पानी के किसी भी भूमिगत पूल का पता लगाया जा सकेगा। परसेवेरेंस में एक 4-पाउंड (1.8-किलोग्राम) का हेलीकॉप्टर होगा। ये किसी अन्य ग्रह पर उड़ान भरने वाला पहला रोटरक्राफ्ट होगा। 

पहली बार कैमरे में कैद होगा पैराशूट के साथ नीचे आता रोवर
परसेवेरेंस के कैमरे रोवर का कलर वीडियो शूट करेंगे, जबकि माइक्रोफोन साउंड को कैप्चर करेंगे। यह पहली बार होगा जब मंगल ग्रह पर पैराशूट के साथ नीचे आते किसी रोवर का वीडियो हमें देखने को मिलेगा। इसके अलावा रोवर पतले मार्टियन वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड से ऑक्सीजन का उत्पादन करने का भी प्रयास करेगा। इस ऑक्सीजन का उपयोग किसी दिन अंतरिक्ष यात्री के सांस लेने के साथ-साथ रॉकेट प्रोपेलेंट बनाने के लिए किया जा सकता है। नासा 2024 तक अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर दोबारा भेजना चाहता है और 2030 के दशक में उन्हें वहां से मंगल ग्रह पर भेजना चाहता है। इसके लिए अंतरिक्ष एजेंसी परसेवेंस के साथ स्पेससूट सामग्री के सैंपल भेज रही है, यह देखने के लिए कि वे कठोर मार्टियन इन्वायरमेंट में कितने सफल रहते हैं। नासा इस मिशन पर करीब 3 बिलियन डॉलर खर्च करेगा। ये मिशन करीब दो साल तक चलेगा।

UAE बुधवार को जापान से लॉन्च करेगा अपना यान
संयुक्त अरब अमीरात के अंतरिक्ष यान का नाम अमल यानी 'होप' है। ये एक ऑर्बिटर है जिसे बुधवार, 15 जुलाई को जापान से लॉन्च किया जाएगा। यह अरब दुनिया का पहला इंटरप्लेनेटरी मिशन होगा। अंतरिक्ष यान कोलोराडो बोल्डर विश्वविद्यालय के साथ साझेदारी में बनाया गया है। यह यूएई की स्थापना की 50वीं वर्षगांठ वाले साल में मंगल पर पहुंचेगा। इस मिशन के जरिए यूएई अरब युवाओं को एक बहुत मजबूत संदेश भेजना चाहता है। प्रोजेक्ट मैनेजर ओमरान शराफ ने कहा, 'यहां संदेश यह है कि अगर यूएई 50 साल से कम समय में मंगल ग्रह पर पहुंच सकता है, तो आप बहुत कुछ कर सकते हैं। ... अंतरिक्ष के बारे में अच्छी बात है, यह वास्तव में उच्च मानकों को निर्धारित करता है।' इस मिशन में ऑर्बिटर (44,000 किलोमीटर x 22,000 किलोमीटर) के ऑर्बिट से ऊपरी वायुमंडल और जलवायु परिवर्तन की स्टडी करेगा। यूएई के इस प्रोजेक्ट की लागत 200 मिलियन डॉलर है, जिसमें लॉन्च शामिल है लेकिन मिशन ऑपरेशन्स नहीं है।

23 जुलाई के आसपास चीन अपना मिशन लॉन्च करेगा
चीन 23 जुलाई के आसपास किसी समय रोवर और ऑर्बिटर के अपने मिशन को लॉन्च करेगा। मिशन का नाम तियानवेन है। चीन का रोवर अमेरिका के रोवर की तुलना में छोटा है और जिस जगह पर इसे लैंड कराया जाएगा वो जगह भी थोड़ी फ्लैट होगी। अमेरिकी यान की ही तरह इस अंतरिक्ष यान को भी मंगल ग्रह के धुंधले आसमान को पार करना होगा। ये इस मिशन का सबसे रिस्की पार्ट होगा। इसमें करीब सात मिनट का समय लगेगा। यहीं सात मिनट तय करेंगे कि मिशन सफल हुआ या नहीं। अमेरिकी रोवर की ही तरह चीन का रोवर भी अपने रडार की मदद से ये पता लगाने की कोशिश करेगा कि कही जमीन के अंदर पानी तो मौजूद नहीं है? चीन को अपने इस मिशन पर कितनी लागत आ रही है उसने इसका खुलासा नहीं किया है। वहीं यूरोप और रूस ने COVID-19 की वजह से इस गर्मी में मंगल ग्रह पर अपने रोवर को भेजने के प्लान को ड्रॉप कर दिया है।

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