Israel Election 2026: इजराइल में सत्ता की जंग तेज, नेतन्याहू ने उठाए चुनाव पर सवाल, अरब पार्टियों पर लगाए गंभीर आरोप

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इजराइल में हुए आम चुनाव ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर दी है। इजराइल में राजनीतिक उठापटक के बीच पीएम नेतन्याहू ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाकर विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने लिकुड पार्टी की ओर से जारी बयान में राअमगेट मामले को भूकंप जैसा बताया और दावा किया कि देश में चुनाव चुरा लिए गए हैं। यह बयान ऐसे समय आया है, जब इजरायल में त्रिशंकु सरकार बनने की आशंका और अरब पार्टी के किंगमेकर की भूमिका निभाने की चर्चा हो रही है।
नेतन्याहू ने अपने आरोपों के समर्थन में जस्टिस सोलबर्ग के बयान का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि विदेशी ताकतों ने चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया और अरब पार्टियों के पक्ष में वोटरों को पैसे देकर प्रभावित किया। उनके मुताबिक, यह बेहद चौंकाने वाला मामला है, जिसका उदाहरण पहले नहीं देखा गया।
हालांकि, द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू के आरोपों पर इजरायली पुलिस और सेंट्रल इलेक्शन कमिटी ने कहा है कि चुनाव में धांधली होने का कोई सबूत नहीं मिला है।
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नेतन्याहू बोले- लोकतंत्र पर हमला करने की कोशिश
नेतन्याहू ने अपने बयान में चुनावी प्रक्रिया में कथित हस्तक्षेप को इजराइल के लोकतंत्र पर हमला बताया। उनका आरोप है कि इसके पीछे नेसेट यानी इजरायल की संसद पर विदेशी ताकतों का प्रभाव बढ़ाने, देश का इस्लामीकरण करने और दक्षिणपंथी सरकार को सत्ता से हटाने की कोशिश है।
उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा हालात का असर इजराइल की सुरक्षा और सैन्य रणनीति पर भी पड़ सकता है। नेतन्याहू के मुताबिक, इजराइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) को विभिन्न मोर्चों पर पीछे हटना पड़ सकता है और उसे हार का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने विशेष रूप से ईरान से जुड़े मोर्चे का जिक्र किया।
अरब पार्टियों के साथ गठबंधन का विरोध
नेतन्याहू ने दावा किया कि यदि विदेशी ताकतों की ओर से नेसेट पर प्रभाव जमाने की कोशिश की गई है, तो किसी भी जायोनी पार्टी को राअम और जॉइंट लिस्ट के साथ सहयोग नहीं करना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन दलों से जुड़े लोग पैसे देकर वोट खरीदते हैं और नेसेट के स्पीकर को बदलने जैसी गतिविधियों में शामिल हैं। नेतन्याहू ने ऐसी किसी भी राजनीतिक व्यवस्था को इजराइल के हितों के लिए खतरनाक बताया।
उन्होंने मांग की कि कथित अनियमितताओं की जांच के लिए इजराइल की घरेलू सुरक्षा एजेंसी शिन बेट और पुलिस तत्काल कार्रवाई करें। साथ ही, उन्होंने जांच एजेंसियों से उपलब्ध सभी संसाधनों का इस्तेमाल करने की अपील की।
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बेन गवीर ने की अरब नेताओं को गिरफ्तार करने की मांग
इस विवाद के बीच इजराइल के कट्टर दक्षिणपंथी नेता और राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन गवीर ने भी सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने शिन बेट से उन अरब राजनीतिक दलों के नेताओं को गिरफ्तार करने की मांग की, जिन पर कतर से जुड़े फंड हासिल करने का संदेह जताया जा रहा है।
बेन गवीर के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसी को इसी सुबह ऐसे नेताओं की गिरफ्तारी के आदेश देने चाहिए थे। हालांकि, इस मामले में शिन बेट की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
फिलहाल, नेतन्याहू और बेन गवीर के आरोपों के बीच चुनावी धांधली के दावों की पुष्टि नहीं हुई है। इजराइली पुलिस और चुनाव आयोग की ओर से सबूत नहीं मिलने की बात कही गई है। ऐसे में यह विवाद देश की राजनीति में आगे क्या मोड़ लेता है, इस पर नजर बनी हुई है।
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