US Midterm Election: ट्रंप की हार से भारत को मिल सकती है राहत! टैरिफ से लेकर H-1B वीजा और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ेगा असर

डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिका मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगा है। कल यानी 3 नवंबर को वोटिंग हुई और आज उसकी काउंटिंग हो रही है। अभी तक आए नतीजों में रिपब्लिकन पार्टी कई अहम सीटों पर हार रही है। पार्टी ने टैक्सस जैसे राज्य खो दिए हैं जहां कभी चार दशक से डेमोक्रेट को बढ़त नहीं मिली थी।
ट्रंप की हार के भारत के लिए क्या मायने हैं। क्या इसका असर दोनों देशों के बीच खराब होते रिश्तों पर भी पड़ेगा? आइए जानते हैं...
मिडटर्म चुनाव में हुए उलटफेर भारत के लिए काफी मायने रखता है। ट्रंप सरकार ने टैरिफ और ए-1बी वीजा से जुड़े नियमों में कड़ाई करने समेत अन्य कई ऐसे फैसले लिए, जिसके चलते दोनों देशों के रिश्ते बीते तीन दशक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए।
ट्रंप सरकार ने जिस तरह की नीतियां अपनाईं, उससे भारत और अमेरिका के बीच बना वर्षों पुराना विश्वास कम हो गया है। ट्रंप ने दूसरी बार सत्ता संभालते ही ट्रेड वॉर छेड़ दिया। सख्त इमिग्रेशन पॉलिसी को लागू किया, 50 फीसदी भारी भरकम टैरिफ लगाया और रूसी तेल खरीदने पर धमकियां दीं। यही नहीं, 2025-26 में 4800 से ज्यादा भारतीयों को डिपोर्ट किया। H-1B वीजा नियमों में कड़ाई की।
पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के बाद ट्रंप सरकार ने पाकिस्तान के साथ नजदीकियां बढ़ाईं। भारत सरकार के ऐतराज जताने के बावजूद कई बार भारत-पाक सीजफायर कराने की बात कही। इसके अलावा इसी साल दो बार अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो दो बार भारत के दौरे पर आए। उनके द्वारा हर बार दोनों देशों के बीच ट्रेड डील होने की बात कही गई, लेकिन अभी तक उसमें कोई प्रगति नहीं हुई।
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भारत को होगा फायदा!
अब अमेरिकी कांग्रेस में ट्रंप के कमजोर पड़ने से भारत को फायदा पहुंच सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा सरकार ने भारत के साथ जिस तरह के संबंध बनाए हैं, उससे सत्ताधारी सांसदों के साथ विपक्षी सांसद (रिपब्लिकन) भी नाराज हैं। वे भारत के साथ अमेरिका के मजबूत रिश्ते होने के पक्षधर हैं।
अमेरिकी संसद में ट्रंप की पकड़ धीमी पड़ने से उनके बनाए कानून और नीतियों का विरोध रिपब्लिकन पार्टी के सांसद कर सकते हैं। मसलन, पिछले सितंबर में घोषित नए H-1B वीजा आवेदनों पर 100,000 डॉलर की फीस लगाने के फैसले पर वह सवाल उठा सकते हैं।
ट्रंप की ताकत कम होने से ईरान के साथ चल रहा अमेरिका का युद्ध रुक सकता है। क्योंकि, सत्ता पर पकड़ ढीली पड़ने से वह ज्यादा दिन तक युद्ध को नहीं खींच पाएंगे। इससे रक्षा बजट और सैन्य खर्च में कमी आएगी, जिससे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें कम हो सकती हैं।
कीमतें कम होने से भारत पर इसका बड़ा असर पड़ेगा, क्योंकि वह अपनी ईंधन जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। कच्चे तेल की कीमतें कम होने से भारत के आयात बिल और घरेलू अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिलेगी।
हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस चुनाव नतीजे से भारत के मामले में बनी ट्रम्प की नीति पर कुछ असर पड़ेगा। उनके मुताबिक, ट्रम्प अपने बचे हुए दो साल के कार्यकाल में अमेरिकन को फायदा पहुंचाने वाली नीतियों पर ही चलेंगे। वे एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स के जरिए ‘अमेरिका फर्स्ट’ की पॉलिसी बरकरार रखेंगे।
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