comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

इन फूड आइटम्स के अधिक सेवन से हड्डियों को होता है नुकसान

July 27th, 2018 21:57 IST

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हम अच्छी हेल्थ के लिए बहुत कुछ खाते हैं, लेकिन कई बार हम कुछ ऐसा खाने की आदत डाल लेते हैं जो हमें आगे चल कर काफी भारी पड़ती है। दरअसल बढ़ती उम्र में हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए उचित खानपान और संतुलित जीवनशैली होना बहुत जरूरी होता है। लेकिन कई लोग जाने-अनजाने कुछ गलत आदतों को अपना लेते हैं जिससे उनकी हड्डियों को नुकसान पहुंचता है। इतना ही नहीं कई बार हमें कुछ फुड आइटम्स की इस कदर आदत हो जाती है कि हम उन्हें जरूरत से ज्यादा खाने लगते हैं। आइए जानते हैं कि कौन से फूड आइटम ज्यादा खाने से आपकी हड्डियों पर असर पड़ता है। 

संबंधित इमेज

ज्यादा जंक फूड खाना

जंक फूड जैसे बर्गर, पिज्जा और पास्ता में सोडियम की काफी मात्रा होती है। ये शरीर में कैल्शियम की मात्रा को कम करते हैं, जिससे हड्डियां कमजोर होती हैं।

food habits के लिए इमेज परिणाम

ज्यादा सप्लीमेंट लेना

विटामिन A नैचुरल सोर्स, जैसे खाने के साथ लिया जाए तो नुकसान नहीं करता। लेकिन अगर इसका सप्लीमेंट ज्यादा मात्रा में लेते हैं तो ये हड्डियों को कमजोर बना देता है।

ज्यादा सप्लीमेंट लेना के लिए इमेज परिणाम

ज्यादा कॉफी पीना

कॉफी में मौजूद कैफीन बोन मास डेंसिटी कम करता है। इसकी ज्यादा मात्रा लेने से हड्डियां कमजोर होती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस की आशंका बढ़ जाती है।

ज्यादा कॉफी पीना के लिए इमेज परिणाम

ज्यादा चॉकलेट खाना

चॉकलेट ज्यादा खाने से शरीर में शुगर और ऑक्सिलेट का लेवल बढ़ जाता है। इससे कैल्शियम सही तरह से एब्जॉर्ब नहीं होता और हड्डियां कमजोर होने लगती हैं।

चॉकलेट खाना के लिए इमेज परिणाम

ज्यादा शराब पीना

ज्यादा शराब पीने से शरीर में कैल्शियम और विटामिन डी की कमी हो जाती है। इससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।

शराब पीना के लिए इमेज परिणाम

ज्यादा मीठा खाना

ज्यादा चीनी वाले खाने और ड्रिंक्स में फॉस्फॉरिक ऐसिड जैसे केमिकल्स की काफी मात्रा होती है। इन्हें रोज खाने या पीने से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं।

शराब पीना के लिए इमेज परिणाम

चिप्स, नमकीन ज्यादा खाना

नमकीन, चिप्स में सोडियम काफी होता है। ज्यादा खाने से शरीर का कैल्शियम यूरिन के साथ बाहर निकल जाता है। इससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं।

चिप्स, नमकीन के लिए इमेज परिणाम

कमेंट करें
uZE5N
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।