दैनिक भास्कर हिंदी: क्या डोपामीन केमिकल से प्रभावित होता है मनुष्यों का इंटेलिजेंस ?

August 31st, 2018

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हाल ही में वैज्ञानिकों ने इस बात पर रिसर्च की है कि केमिकल डोपामीन की अधिकता से हमें खुशी मिलती है। यह केमिकल हमारे ब्रेन पावर के लिए भी जिम्मेदार हो सकता है। बता दें कि कई प्राइमेट स्पीशीज के दिमागों की तुलना करके वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं। वैज्ञानिकों को पता चला है कि ऐसे कौन से फीचर्स हैं जो ह्यूमन ब्रेन को स्पेशल बनाते हैं। इंसानों और प्राइमेट्स के दिमाग में काफी समानताएं पाई गई हैं, लेकिन हमारी सुपीरियर इंटेलिजेंस का ये दावा है कि इनमें काफी अंतर हैं।

 


साइंज जर्नल में छपी एक स्टडी के अनुसार, यही अंतर इंटिलेजेंस और असमानता में बड़ा रोल प्ले कर सकते हैं। वैज्ञानिकों की टीम ने एक अडल्ट ह्यूमन, चिंपैंजी और मकाक मंकी के दिमाग के 16 भागों पर फोकस किया। जिसमें उन्होंने दिमाग के इन भागों में पाए जाने वाले जीन्स की एक्टिविटी देखी। इसके साथ ही यह भी पाया कि अलग-अलग स्पीशीज में कौन सा जीन ऑन और कौन सा ऑफ होता है साथ ही वे डोपामीन जैसे कितने पदार्थ बनाते हैं।

 

न्यूरोसाइंटिस्ट आंड्रे का कहना है कि "हमारा दिमाग तीन गुना बड़ा है, इसमें ज्यादा सेल्स होती हैं। मानव दिमाग में चिंपैंजी या बंदर से ज्यादा प्रॉसेसिंग पावर होता है। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ साइज में फर्क ही हमारे दिमाग को प्राइमेट्स से अलग नहीं बनाता। बल्कि स्पीशीज में और भी कई छोटे-छोटे फर्क होते हैं।"

 

वैज्ञानिकों के अनुसार, ज्यादातर हिस्सों में दूसरे प्राइमेट्स और इंसानों में बहुत कम फर्क दिखा, लेकिन बंदरों की अपेक्षा इंसानों में ज्यादा विकसित एरिया निओकॉर्टेक्स में यह फर्क ज्यादा था। डोपामीन प्रोड्यूस करने वाला जीन टीएच मनुष्यों के निओकॉर्टेक्स में था, लेकिन दूसरे प्राइमेट्स में नहीं। बता दें कि डोपामीन लर्निंग, मूवमेंट और मेमोरी जैसी कई क्रियाओं के लिए जिम्मेदार होता है। हालांकि वैज्ञानिक अभी इस बात के लिए पूरी तरह आश्वस्त नहीं है कि डोपामीन किस हद तक मनुष्यों की इंटेलिजेंस को प्रभावित करता है।