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झारखंड : तीखी मिर्ची की खेती से महिलाएं जिंदगी में घोल रही मिठास

June 01st, 2020 16:01 IST
 झारखंड : तीखी मिर्ची की खेती से महिलाएं जिंदगी में घोल रही मिठास

हाईलाइट

  • झारखंड : तीखी मिर्ची की खेती से महिलाएं जिंदगी में घोल रही मिठास

रांची, 1 जून (आईएएनएस)। एक ओर जहां कोरोना संक्रमण काल में सबुकछ लॉकडाउन था, वहीं झारखंड राज्य की सखी मंडल से जुड़ी महिलाएं पूरी मेहनत कर हर रोज परिश्रम से समृद्धि एवं सफलता की नई मिसाल कायम कर रही हैं। यहां की महिलाएं जैविक तरीके से मिर्ची की खेती कर अपनी और परिवार के सदस्यों की जिंदगी में मिठास घोल रही हैं।

देवघर के पालाजोरी प्रखंड के सगरभंगा गांव की महिला विकास सखी मंडल से जुड़ी सलिता देवी फरवरी महीने में सखी मंडल से 3000 की आर्थिक मदद लेकर मिर्च की खेती करने की ठानी। मिर्च की खेती शुरू भी की, लेकिन पौधे सूखने की नौबत आ गई। ऐसे में सलिता ने अपने गांव की आजीविका कृषक मित्र आशा देवी से बात की एवं जानकारी साझा की।

सलिता की मेहनत एवं आशा जैसी आजीविका कृषक मित्र की सूझ बूझ से सलिता विगत दो महीनों में लगभग एक क्विंटल मिर्च का उत्पादन कर, करीब 30,000 रुपये की आमदनी कर चुकी हैं।

सगरभंगा गांव देवघर जिला के पालोजोरी प्रखंड के अंतर्गत आता है जिसमें सलिता जैसी दर्जनों महिलाएं खेती का कार्य वृहद स्तर पर कर रही हैं और अच्छी कमाई भी कर रही हैं।

झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाईटी के तहत सखी मंडल की महिलाएं अपने संगठन से ऋण लेकर अपनी आजीविका को सुदृढ़ करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

साल 2018 में आशा देवी की पहल पर उनके गांव में कनवर्जेस की मदद से अच्छे बीज के पौधों हेतु पॉली हाउस का निर्माण कराया गया। इसके माध्यम से आज इन के गांव के करीब 10 से 15 किसानों की पैदावार में काफी बढ़ोत्तरी हुई है। आजीविका कृषक मित्र आशा देवी दर्जनों महिला किसानों को उनके गांव में तकनीक से खेती की प्रशिक्षण देती हैं।

आशा देवी जैसी करीब 10 हजार से ज्यादा आजीविका कृषक मित्र झारखंड के विभिन्न गांवों में छोटे एवं सीमांत किसानों को तकनीक एवं उन्नत विधियों पर प्रशिक्षित करते हैं, जिससे ज्यादा से ज्यादा खेती कर अच्छी कमाई सुनिश्चित कर सके।

ये कृषक मित्र किसानों को जैविक खाद एवं समुदाय आधारित सतत कृषि के लिए प्रोत्साहित करते हैं। ये सभी कृषक मित्र दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत प्रशिक्षित किए गए हैं एवं लोगों को बहुफसली खेती, धान की उन्नत खेती, सब्जी की खेती एवं अन्य जरूरी बातों से प्रशिक्षित एवं अवगत कराते हैं, ताकि आम किसानों की आमदनी बढ़े।

सलिता अपना अनुभव साझा करते हुए बताती हैं, खेती तो सभी करते हैं परंतु अच्छी उत्पाद किसी-किसी को मिलती है। आज अच्छी उत्पाद के लिए हर तरह की जानकारी हमें मिल पाती है और अच्छे किस्म के बीज के चुनाव से लेकर जैविक खाद बनाना, पॉलीहाउस में बीज के पौधे तैयार करना इस सबकी विस्तृत जानकारी मिल पाने से हम भी अच्छा उत्पादन कर पाने में सफल हुए हैं।

सलिता देवी कहती हैं कि इसी कारण मात्र 10 डिसमिल जमीन में मिर्च की खेती कर, वह इतना अच्छा आमदनी कर पाने में सफल हुई हैं। साथ ही इन विधियों का उपयोग कर धान के उत्पादन में करीब ढाई गुना की बढ़ोतरी कर पाई हैं।

सलिता बताती हैं कि प्रत्येक दुकानदार करीब 10 से 30 किलो मिर्च आसानी से खरीद रहा है।

अरतोपा गांव की पुतुल देवी सब्जियों की खेती कर लॉकडाउन के दौरान भी प्रतिदिन करीब 500 रुपये की आमदनी कर पा रही हैं। इनकी फसलों में मुख्य रूप से लौकी, कद्दू, भिंडी तथा अन्य लत्तेदार सब्जियां शामिल हैं।

पूरे झारखंड में सखी मंडल की 5 लाख से ज्यादा महिलाओं को खेती की विभिन्न गतिविधियों में जोड़ा गया है।

ग्रामीण विकास विभाग के विशेष सचिव और झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाईटी के सीईओ राजीव कुमार ने आईएएनएस से कहा, हमलोग सखी मंडल की महिलाओं को कृषि आधारित आजीविका से लगातार जोड़ रहे हैं। विभिन्न योजनाओं के कनवर्जेस से हम सखी मंडल की बहनों को सिंचाई की सुविधाएं एवं टपक सिंचाई से भी जोड़ रहे हैं, जिससे इनको सिंचाई के साधनों की दिक्कत न हो।

उन्हांेने आगे कहा, सुदूर गांव के आखिरी परिवार को भी अच्छी तकनीक एवं उन्नत खेती के तौर तरीके पता हो इसके लिए आजीविका मिशन के तहत आजीविका कृषक मित्र प्रशिक्षित किए गए हैं। ये कैडर्स गांव में खेती से जुड़े किसानों को प्रशिक्षित करते हैं एवं हर तरह से मदद भी करते हैं।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।