दैनिक भास्कर हिंदी: झारखंड की इस लड़की ने हल कर दी महिलाओं की सबसे बड़ी समस्या

August 31st, 2018

डिजिटल डेस्क। ऐसी बातें जो लड़कियां सिर्फ अपनी मां से ही कर पाती है, एक उम्र के बाद किसी भी लड़की को जिन परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उस पर बात करने से अकसर हमारा समाज झिझकता है। स्कूल के दिनों में तो टीचर भी बायोलॉजी की किताब के दो चैप्टर बिना पढ़ाए ही आगे बढ़ जाते थे। अब तक आप समझ गए होंगे कि यहां लड़कियों की किन परेशानियों का जिक्र किया जा रहा है। पीरियड्स यानि की मासिक धर्म ये वो समस्या है जो हर किसी लड़की को झेलनी ही पड़ती है। कई घरों में तो इसे लेकर इस तरह की पाबंदियां हैं कि अगर लड़की के पीरियड्स के दिन शुरू हो गए हैं तो उसे घर के दूसरे सदस्यों के साथ बैठने से मना कर दिया जाता है। 

 

घर में पूजा पाठ से जुड़े किसी काम में उसे बैठने की इजाजत नहीं होती है। लड़की को अपने कपड़े सबसे अलग धोकर फैलाने के लिए कहा जाता है। अचार या खाने की किसी भी वस्तु को छूने से मना कर दिया जाता है ताकि वह सामान खराब न हो जाए। पीरियड्स के दौरान सात दिनों के बाद ही उसे बाल धोने की इजाजत दी जाती थी। पीरियड्स खत्म होने के बाद से बेडशीट धोनी ही है। ऐसी ही कुछ पाबंदियों का शिकार हुईं थीं झारखंड के घरवा की अदिति गुप्ता। जिनका नाम आज फोर्ब्स इंडिया की अंडर 30 लिस्ट में शुमार हुआ है। अदिति के द्वारा तैयार की गई सामग्री को उत्तर भारत के पांच राज्यों के स्कूलों में पढ़ाया जा रहा है। इतना ही नहीं बीबीसी हिंदी की 100 दमदार औरतों की सीरीज में भी अदिति का नाम किया गया है।


घरवा के मध्यवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाली अदिति का कहना है कि जब उन्हें पहली पीरियड्स हुए तो वह 12 साल की थी। उन्होंने अपनी मां को बताया तो मां ने नहाने के लिए कहा, पर सिर्फ ढाई मग पानी से. इस ढाई मग पानी से नहाने के पीछे का कारण ये था कि पीरियड्स में बहाव भी सिर्फ ढाई दिन ही रहेगा। हालांकि अदिति को ये बातें बिल्कुल भी समझ नहीं आई, और धीरे-धीरे जब अदिति ने शहर के बोडिंग स्कूल में एडमिशन लिया तो उन्हें सेनिटरी नैपकिन खरीदने की सलाह कुछ सहेलियों ने दी। 15 साल की उम्र में पहली बार ऐसा था कि अदिति सेनिटरी पैड का इस्तेमाल करने जा रहीं थीं। अदिति ने मेडिकल स्टोर पर झिझकते हुए सेनिटरी नैपकिन के ब्रांड का नाम लिया तो दुकानदार ने झट से काले रंग की पॉलिथीन में रखकर उन्हें पकड़ा दिया।

 


इसके बाद जब अदिति ने अपने कुछ पोस्ट ग्रेजुएशन वाले दोस्तो के साथ लगभग एक साल तक पीरियड्स के बारे में जागरुक करने वाले अभियान पर काम किया। बस यहीं से उन्हें एक नया आइडिया मिला। इस आइडिया ने उनकी किस्मत बदल दी। जिन बातों को करने में उन्हें झिझक महसूस होती थी, उसे अपने ही जैसी तमाम लड़कियों को समझाने और उससे जागरूक करने के लिए अदिति ने मेन्स्ट्रुपीडिया कॉमिक शरू की, जिसमें उन्होंने पूरी ज़िंदगी झेले पीरियड्स मिथकों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से गलत साबित किया।

अदिति की कॉमिक को न सिर्फ महिलाओं बल्कि पुरुषों ने भी खरीदा, और अपनी वाइफ को दिया। जिसने भी इसके बारे में सुना उसने इस कॉमिक में जिज्ञासा दिखाई।   

इस लिंक पर क्लिक कर देखें 'मेन्स्ट्रुपीडिया कॉमिक'  

 
बता दें कि आज लड़कियां इस कॉमिक में कहानियां पढ़ना पसंद करती हैं और अपने दम पर माहवारी के बारे में जानने लगी हैं। हालांकि यह कॉमिक विशेष रूप से 9-14 वर्ष की आयु के लड़कियों के लिए है, लेकिन बड़ी लड़िकयां भी इसे पढ़ रही हैं। सुंदर चित्रण और कार्टून पात्रों के जरिए इसमें हर वह बात बताई गई है, जिस पर बात करने या पूछने में लड़कियां असहज महसूस करती हैं। मेंस्ट्रुपीडिया पीरियड्स के दौरान आने वाली परेशानियों से रू-ब-रू कराता है। 

 

कई भाषाओं में अनुवादित जानकारी


मेंस्ट्रुपीडिया कॉमिक का भारत की 8 रीजनल भाषाओं समेत अंग्रेजी में अनुवाद है। इसके साथ ही कई विदेशी भाषाओं में भी इसका अनुवाद किया गया है। इसकी एक वेबसाइट भी है, जिसमें महिलाओं के लिए नौकरी के सुनहरे मौके भी हैं।