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पुलिस कर्मी प्लाज्मा देने पहुँचा मेडिकल, जाँच में एंटी बॉडी लेवल कम मिला, नहीं हो सका डोनेशन

पुलिस कर्मी प्लाज्मा देने पहुँचा मेडिकल, जाँच में एंटी बॉडी लेवल कम मिला, नहीं हो सका डोनेशन

डिजिटल डेस्क जबलपुर । कोरोना से स्वस्थ हुए एक 25 साल के पुलिस कर्मी ने प्लाज्मा डोनेशन की इच्छा जताते हुए मेडिकल के डॉक्टर से संपर्क किया। पुलिस कर्मी की इस पहल पर उत्साहित डॉक्टर ने उन्हें मेडिकल बुलाकर एंटी बॉडी टेस्ट के लिए सैम्पल लिया। शाम को आई रिपोर्ट में एंटी बॉडी का लेवल काफी कम निकला, जिससे उक्त पुलिस कर्मी के प्लाज्मा डोनेशन के प्लान को रद््द करना पड़ा। 
जानकारी के अनुसार अप्रैल माह में उक्त पुलिस कर्मी कोरोना संक्रमित हुआ था। संक्रमित होने के एक माह से अधिक समय होने पर वे प्लाज्मा डोनेशन के लिए फिट थे, स्वेच्छा से वे किसी गंभीर मरीज को स्वस्थ करने के लिए प्लाज्मा देने तैयार थे। गुरुवार को वे प्लाज्मा डोनेशन के नोडल अधिकारी डॉ. नीरज जैन से संपर्क कर मेडिकल पहुँचे। डोनेशन के पहले उनका एंटी बॉडी व वायरल लोड जाँच का टेस्ट हुआ। इस टेस्ट की सुविधा फिलहाल मेडिकल में नहीं है तो प्राइवेट लैब में उनका सैम्पल भेजा गया। शाम को मिली रिपोर्ट में एंटी बॉडी निगेटिव तो नहीं आया, लेकिन उसका लेवल इतना कम था िक किसी मरीज को प्लाज्मा चढ़ाने से फायदा न के बराबर ही होना था। बी निगेटिव रक्त वाले इस पुलिस कर्मी का 15-20 दिन बाद फिर से एंटी बॉडी टेस्ट कराने का विचार किया जा रहा है। 
निजी हॉस्पिटल के मरीजों की क्या जानकारी है 
गुरुवार को 49 नए संक्रमितों के मुकाबले सिर्फ 11 मरीजों को डिस्चार्ज किए जाने के मामले में कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से इसका कारण पूछा। इस मामले में सीएमएचओ की टीम के सदस्यों की ढीली कार्यप्रणाली भी कहीं न कहीं कारण मानी जा रही है। सूत्रों का कहना है कि लिपिकीय स्तर पर वर्तमान में भूतपूर्व सीएमएचओ के विश्वासपात्रों की अधिकता है, उनका कामकाज संतोषप्रद नहीं होने पर भी सीएमएचओ चाहकर भी अपनी टीम नहीं बना पा रहे हैं। वहीं उन पर काम करने वाले कर्मी जो पूर्व अधिकारी की गुड बुक में नहीं हैं उन्हें हटाने का दबाव भी है। अधिकारी स्तर पर कुछेक ही शुरू से कोरोना संकट में सक्रिय हैं, बाद में जिन डॉक्टर्स को जिम्मेदारी दी गई वे अपनी प्राइवेट क्लीनिक या कमीशनबाजी पर ही ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। यही कारण है कि निजी अस्पतालों में भर्ती कोरोना संक्रमितों में से कितनों को स्वस्थ होने के बाद छुट्टी दी गई, डिस्चार्ज कम क्यों हैं.. कलेक्टर ने यह सवाल सीएमएचओ से किए। कलेक्टर ने इसके लिए अलग से टीम बनाने के निर्देश भी दिए हैं। 

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।