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बेबस मजदूर: लॉकडाउन के दौरान देशभर में 1,461 सड़क हादसे हुए, इनमें 198 प्रवासी मजदूरों सहित 750 लोगों ने जान गवाई

बेबस मजदूर: लॉकडाउन के दौरान देशभर में 1,461 सड़क हादसे हुए, इनमें 198 प्रवासी मजदूरों सहित 750 लोगों ने जान गवाई

हाईलाइट

  • अधिकतर हादसे ड्राइवर की थकान और तेज रफ्तार के कारण हुए
  • उत्तरप्रदेश में सबसे ज्यादा 94 मौतें हुई
  • तीसरे और चौथे चरण में सबसे ज्यादा मौतें

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देशभर में 25 मार्च से 31 मई के बीच लॉकडाउन के दौरान 198 प्रवासी मजदूरों की मौत घर लौटने के दौरान 1,461 सड़क दुर्घटनाओं में हुई है। सेव लाइफ फाउंडेशन द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार इन दुर्घटनाओं में 198 प्रवासी कामगारों सहित कुल 750 लोगों की मौत हुई है। 

अधिकतर हादसे ड्राइवर की थकान और तेज रफ्तार के कारण हुए
कोरोनोवायरस संक्रमण चेन को तोड़ने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के कारण हजारों परिवार घर जाने के लिए निकल पड़े। मीडिया-ट्रैकिंग और कई सूत्रों से वेरिफिकेशन द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, अधिकांश दुर्घटनाएं तेज रफ्तार और ड्राइवर की थकान के कारण हुई।

उत्तरप्रदेश में सबसे ज्यादा 94 मौतें
लॉकडाउन के दौरान उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 94 मौतें हुईं। इसके बाद मध्य प्रदेश (38), बिहार (16), तेलंगाना (11) और महाराष्ट्र (9) रहे। 68 दिनों के लॉकडाउन के दौरान, 1,390 लोग सड़क दुर्घटना में घायल हुए थे। उत्तर प्रदेश 30 प्रतिशत यानी 245 घायलों के साथ शीर्ष पर है। इसके बाद तेलंगाना (56), मध्य प्रदेश (56), बिहार (43), पंजाब (38) और महाराष्ट्र (36) हैं। इन सबके बीच, 68 फीसदी मौतों में पैदल यात्री, दोपहिया और तिपहिया वाहनों को शामिल किया गया है।

तीसरे और चौथे चरण में सबसे ज्यादा मौतें
सेवलाइफ फाउंडेशन के संस्थापक और सीईओ पीयूष तिवारी ने कहा कि कोविड-19 के साथ अभी भी चारों ओर, हम बस सड़क दुर्घटना से संबंधित ट्रॉमा के साथ अत्यधिक हेल्थकेयर प्रणाली का बोझ नहीं उठा सकते। आंकड़ों से पता चलता है कि तीसरे और चौथे चरण में राज्यों से प्रतिबंधों को हटाने के साथ सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि हुई है।

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।