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देश के 68.2 प्रतिशत लोग चीनी उत्पादों के बहिष्कार को तैयार : सर्वे

June 23rd, 2020 23:01 IST
 देश के 68.2 प्रतिशत लोग चीनी उत्पादों के बहिष्कार को तैयार : सर्वे

हाईलाइट

  • देश के 68.2 प्रतिशत लोग चीनी उत्पादों के बहिष्कार को तैयार : सर्वे

नई दिल्ली, 23 जून (आईएएनएस)। भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद के मद्देनजर देश के 68.2 प्रतिशत लोगों का कहना है वे चीन द्वारा निर्मित मोबाइल फोन, टीवी, इलेक्ट्रॉनिक सामान सहित अन्य उत्पादों को खरीदना बंद कर देंगे। यह जानकारी आईएएएस सी-वोटर स्नैप सर्वेक्षण में सामने आई है।

सर्वेक्षण के अनुसार, 68.2 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे चीनी उत्पादों का बहिष्कार करेंगे, जबकि 31.8 प्रतिशत ने कहा कि इस तरह का कुछ भी नहीं होने जा रहा है और हमेशा की तरह व्यापार होगा, जहां लोग चीनी उत्पादों को खरीदना जारी रखेंगे।

विभिन्न आयु वर्ग के लोगों के बीच किए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि सभी उम्र के लोग इस बात पर सहमत हैं कि वे चीनी उत्पादों का बहिष्कार करेंगे। मध्यम आयु वर्ग में 75 प्रतिशत (45 से 60 वर्ष), 25 से 45 वर्ष आयु वर्ग में 66 प्रतिशत, 60 वर्ष से ऊपर की आयु में 79 प्रतिशत बुजुर्ग और 60.9 प्रतिशत फ्रेशर्स (25 वर्ष से नीचे) ने माना कि वे चीनी उत्पादों का बहिष्कार करेंगे।

शिक्षा समूह की सभी श्रेणियों में भी चीन विरोधी भावना स्पष्ट रूप से सामने आई है। निम्न शिक्षित समूह में 70 प्रतिशत, मध्यम शिक्षा समूह में 65 प्रतिशत और उच्च शिक्षा समूह में 64.6 प्रतिशत लोगों का कहना है कि वे चीनी सामान नहीं खरीदेंगे।

आय वर्ग की श्रेणी में चीन विरोधी भावना अधिक प्रचलित और विभिन्न वर्गों में सुसंगत है। निम्न, मध्यम और उच्च आय वर्ग में 68 प्रतिशत लोगों की यही सोच देखने को मिली है।

वहीं अगर सामाजिक समूह की श्रेणी की बात करें तो सर्वेक्षण में पाया गया कि 93.9 प्रतिशत ईसाई चीनी उत्पादों का बहिष्कार करने के इच्छुक हैं। इसके बाद हिंदुओं में अनुसूचित जनजातियों के 80.7 प्रतिशत, अन्य पिछड़े वर्गों के 73.8 प्रतिशत, अनुसूचित जाति के 70 प्रतिशत और सर्वण (उच्च जाति) 74 प्रतिशत लोगों ने चीनी उत्पादों का बहिष्कार करने की बात कही।

सर्वेक्षण में चीन विरोधी भावना मुस्लिमों (35.1 प्रतिशत) और सिखों (44 प्रतिशत) को छोड़कर सभी वर्गों में बहुत अधिक देखने को मिली है।

पिछले आम चुनाव में वोट डालने वाले लोगों से भी सर्वेक्षण में सवाल पूछे गए। विपक्षी पार्टियों को वोट देने वाले 58.2 प्रतिशत मतदाताओं ने चीनी उत्पादों के बहिष्कार का समर्थन किया। वहीं राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को वोट देने वाले 72.8 प्रतिशत मतदाताओं ने भी कहा कि वे चीनी उत्पादों का बहिष्कार करने को तैयार हैं।

लिंग के आधार पर देखा जाए तो 74 प्रतिशत पुरुषों ने चीनी उत्पादों का बहिष्कार करने पर सहमति व्यक्त की, जबकि 61.7 प्रतिशत महिलाओं ने चीनी समान को नहीं खरीदने की बात कही।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।