दैनिक भास्कर हिंदी: राफेल: बीजेपी ने गांधी परिवार को घेरा, कांग्रेस ने पीएम मोदी पर साधे निशाने

September 26th, 2018

हाईलाइट

  • राफेल डील को लेकर बीजेपी-कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी
  • संबित पात्रा बोले- वाड्रा के करीबी मित्र संजय भंडारी के यहां से मिले थे राफेल सौदे के खुफिया कागज
  • कपिल सिब्बल बोले- पीएम मोदी के अलावा राफेल सौदे के बारे में कोई अन्य मंत्री कुछ नहीं जानता था

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राफेल डील को लेकर बीजेपी-कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। बीजेपी जहां इस मामले में गांधी परिवार को घेर रही है तो वहीं कांग्रेस लगातार इस मुद्दे पर पीएम मोदी को निशाना बनाए हुए है। मंगलवार को दोनों ही दलों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आक्रामक बयानबाजी के इस दौर को जारी रखा। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि 2016 में रेड के दौरान राफेल डील के कागजात राबर्ट वाड्रा के करीबी मित्र संजय भंडारी के यहां से मिले थे, जो बताते हैं कि कांग्रेस इस डील में वाड्रा की कंपनी को फायदा पहुंचाना चाहती थी। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि राफेल डील के बारे में न तो न तो रक्षा मंत्री को कुछ पता था और न ही वित्त मंत्री को। इस डील के बारे में सिर्फ पीएम मोदी ही जानते थे।

बीजेपी कर रही वाड्रा का घेराव
बीजेपी नेता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, '2016 में संजय भंडारी के यहां छापा पड़ा था। वे राबर्ड वाड्रा के बेहद करीबी मित्र हैं। इस छापे में भंडारी के यहां से राफेल सौदे के कागजात बरामद हुए थे। इतने खुफिया दस्तावेज वहां कैसे पहुंचे, कांग्रेस को इसका जवाब देना चाहिए।' पात्रा ने कहा, 'मोदी सरकार के आते ही भंडारी की कंपनी ''ऑफसेट इंडिया सोल्यूशन'' को बंद कर दिया गया था।' संबित पात्रा ने यह भी कहा कि डील के लिए फ्रांस जाने के लिए संजय भंडारी को दो मेल भी भेजे गए थे। यह ट्रेवल टिकट वाड्रा की यात्रा के लिए थे जो करीब 8 लाख के थे।

कांग्रेस के निशाने पर अकेले मोदी
कपिल सिब्बल ने राफेल सौदे में पूरी केन्द्र सरकार की बजाय केवल पीएम मोदी को घेरते हुए कहा, '8 अप्रैल 2015 को भारत के विदेश सचिव ने बताया था कि पीएम मोदी के फ्रांस दौरे में राफेल मुद्दा नहीं था। इसके बाद अचानक पीएम मोदी 36 राफेल विमानों के सौदे को मंजूरी देते हैं। उनके इस फैसले से कोई अवगत नहीं था। मनोहर पर्रीकर, अरुण जेटली, निर्मला सीतारमण कोई इस सौदे के बारे में कुछ नहीं जानते थे। इस सौदे के बारे में महज फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांदे और पीएम मोदी ही बता सकते हैं।'

सिब्बल ने कहा, '25 मार्च 2015 को इरिक ट्रेपियर ने कहा था कि राफेल सौदे के लिए HAL को फाइनल किया गया है। 11 मार्च 2015 को HAL और डसॉल्ट कंपनी ने बयान जारी किया था कि HAL और डसॉल्ट द्वारा निर्मित राफेल के हिस्सों को दोनो कंपनियों द्वारा गारंटी दी जाएगी। इसके बाद 28 मार्च 2015 को रिलायंस डिफेंस लिमिटेड कंपनी बनाई गई और फिर HAl की जगह रिलायंस को डसॉल्ट का पार्टनर चुना गया।'

फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति के बयान से मचा है पूरा विवाद

राफेल पर यह नया विवाद फ्रांस के पूर्व प्रधानमंत्री फ्रांस्वा ओलांदे के उस बयान के बाद उपजा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि राफेल एयरक्राफ्ट बनाने के लिए अनिल अंबानी की रिलायंस कंपनी का नाम उन्हें भारत सरकार ने सुझाया था। उनके पास और कोई विकल्प नहीं था। इसीलिए डसाल्ट ने इसके बाद रिलायंस से राफेल को लेकर बातचीत शुरू की। ओलांदे के इस बयान के बाद फ्रांस सरकार ने भी एक बयान जारी कर कहा था कि इस सौदे के लिए भारतीय कंपनी के चुनाव में उनकी कोई भूमिका नहीं रही है। इन बयानों के बाद विपक्षी दल लगातार मोदी सरकार पर रिलायंस कंपनी को फायदा पहुंचाने का आरोप लगा रहे हैं।