दैनिक भास्कर हिंदी: अन्ना के सत्याग्रह का आज तीसरा दिन, हार्दिक हो सकते हैं शामिल

March 25th, 2018

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। लोकपाल बिल के बाद किसानों को उनका हक दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे अन्ना हजारे के अनशन का आज तीसरा दिन है। राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में चल रहे आंदोलन में आज अन्ना को गुजरात के पाटीदार नेता हार्दिक पटेल का समर्थन मिल सकता है। बताया जा रहा है कि हार्दिक दोपहर तक अन्ना के इस आंदोलन में शामिल होने पहुंचेंगे। हालांकि, वह शनिवार को आने वाले थे, लेकिन उनका कार्यक्रम रद्द हो गया था। वहीं, दूसरी तरफ 2011 के आंदोलन से सीख लेते हुए अन्ना पहले ही साफ कर चुके हैं, कि उनके इस आंदोलन में कोई भी राजनीतिक पार्टी से जुड़े लोग शामिल नहीं होंगे।

 

घटने लगा अन्ना का वजन 

 

बता दें कि दो दिनों से सत्याग्रह आंदोलन पर बैठे समाजसेवी अन्ना हजारे का वजन घट गया है। अन्ना के सहयोगियों ने यह दावा किया है। सहयोगियों का कहना है, कि अन्ना किसानों की मांगों को लेकर भूख हड़ताल कर रहे हैं, जिसके कारण उनका वजन भी घट चुका है, लेकिन अन्ना को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। 

 

नहीं आ रहे ज्यादा लोग

7 साल पहले सरकार को हिलाकर रख देने वाले अन्ना का आंदोलन इस बार उतना प्रभावित नहीं कर पा रहा है। आंदोलन के दूसरे दिन भी कुछ खास भीड़ नजर नहीं आई, हालांकि इस दौरान देश के कई हिस्सों से किसान इस आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। कहा जा रहा है कि रविवार को छुट्टी का दिन होने के कारण लोग इस आंदोलन में शामिल हो सकते है। 

 

राजनीतिक पार्टी नहीं होंगी शामिल

बताया जा रहा है कि हार्दिक आज अन्ना के साथ आंदोलन में शामिल होंगे, लेकिन अन्ना दो टूक कह चुके है कि इस आंदोलन में किसी भी राजनीतिक पार्टी या व्यक्ति को जगह नहीं दी जाएगी और अगर कोई भी राजनीतिक व्यक्ति इस आंदोलन में शामिल होना चाहता है, तो उसे भीड़ के साथ जगह मिलेगी। मंच पर किसी भी दल को जगह नहीं दी जाएगी। जिसको लेकर आज कयास लगाए जा रहे हैं, कि हार्दिक भीड़ के साथ बैठकर ही अन्ना के आंदोलन का समर्थन देंगे। 

 

पहले दिन स्टांप पर करवाए थे साइन 

आंदोलन के पहले दिन अन्ना हजारे ने इस आंदोलन के लिए बनाई गई 26 सदस्यों की कोर कमिटी के प्रत्येक सदस्य से 100 रुपए के स्टांप पर साइन करवाया था, जिसमें लिखावाया था कि वह किसी भी राजनीतिक स्वार्थ के चलते इस आंदोलन से नहीं जुड़ रहे हैं। इसके साथ ही यह भी लिखवाया गया था कि वह जिंदगी भर न तो पार्टी बनाएंगे और न ही किसी राजनीतिक पार्टीं की सदस्यता ग्रहण करेंगे। वहीं, इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए दूसरे राज्यों में बनाई गई समितियों के सदस्यों ने इसी तरह का हलफनामा अन्ना को भेजा था।