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आतिश अली का OCI कार्ड हुआ रद्द, PM मोदी को बताया था 'डिवाइडर इन चीफ'

आतिश अली का OCI कार्ड हुआ रद्द, PM मोदी को बताया था 'डिवाइडर इन चीफ'

हाईलाइट

  • भारत सरकार ने आतिश अली का OCI कार्ड रद्द किया
  • आतिश ने अपने स्वर्गीय पिता के पाकिस्तानी मूल के होने की जानकारी छिपाई थी
  • पत्रिका 'टाइम' के अपने लेख में PM मोदी को बताया था भारत का 'डिवाइडर इन चीफ'

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत सरकार द्वारा लेखक और पत्रकार आतिश अली तासीर का ओवरसीज सिटीजनशीप ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड रद्द कर दिया गया है। ब्रिटेन में जन्मे आतिश अली का OCI कार्ड अपने स्वर्गीय पिता के पाकिस्तानी मूल के होने की जानकारी छिपाने के कारण रद्द किया गया है। गृह मंत्रालय ने भी गुरूवार को इस कार्ड के लिए आतिश को अयोग्य ठहराया है। बता दें कि आतिश ने अपने एक लेख में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत का 'डिवाइडर इन चीफ' बताया था।

दरअसल आतिश के दिवंगत पिता सलमान तासीर पाकिस्तानी थे, जिसकी जानकारी आतिश ने भारत सरकार से छिपा रखी थी। इस बात कि जानकारी उन्होंने OCI कार्ड का आवेदन जमा करते हुए भी नहीं दी थी। गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता द्वारा बताया गया कि नागरिकता अधिनियम 1955 के अनुसार, आतिश OCI कार्ड के लिए अयोग्य हो चुके हैं क्योंकि यह कार्ड ऐसे व्यक्ति को जारी नहीं किया जाता, जिसके माता-पिता या दादा-दादी पाकिस्तान मूल के हों और आतिश ने बहुत ही बुनियादी आवश्यकताओं और छिपी जानकारी का अनुपालन नहीं किया।

गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि आतिश को अपने OCI कार्ड के बारे में अपना उत्तर और आपत्तियाँ प्रस्तुत करने का अवसर भी दिया गया था, लेकिन वह नोटिस पर विवाद करने में विफल रहे। इस पर आतिश का कहना है कि उन्हें अपना जवाब देने के लिए सरकार द्वारा पर्याप्त समय ही नहीं दिया गया।

क्या है OCI कार्ड ?

बता दें कि OCI कार्ड भारतीय मूल के विदेशियों को भारत आने, यहां रहने और काम करने का अधिकार देता है। इसके अलावा उन्हें वोट देने और संवैधानिक पद प्राप्त करने जैसे कुछ अन्य अधिकार नहीं दिए जाते हैं। वहीं नागरिकता अधिनियम के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति धोखे से OCI कार्ड प्राप्त करता है तो तो उस व्यक्ति का रजिस्ट्रेशन रद्द करके ब्लैक लिस्ट में डाल दिया जाता है। साथ ही उस व्यक्ति पर हमेशा के लिए भारत में प्रवेश करने के लिए प्रतिबंध लगा दिया जाता है।

अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट 'द प्रिंट' ने गुरुवार को अपनी एक स्टोरी में लिखा था कि 'टाइम पत्रिका में मोदी की आलोचना वाले लेख के बाद सरकार लेखक आतिश का OCI कार्ड रद्द करने के लिए विचार कर रही है।' इस पर गृह मंत्रालय ने आपत्ति जताते हुए कहा कि 'द प्रिंट' द्वारा लिखी गई यह स्टोरी पूर्ण रूप से गलत और तथ्यहीन है।

बता दें कि आतिश तासीर ने अमरीका की प्रतिष्ठित पत्रिका 'टाइम' के इस साल के मई अंक में पीएम मोदी पर एक लेख लिखा था। इस पत्रिका के 20 मई 2019 वाले अंतरराष्ट्रीय संस्करण के कवर पेज पर छपे आतिश के लेख के शीर्षक में पीएम मोदी की तस्वीर के साथ 'India's Divider In Chief' लिखा गया था। जिसके बाद इस लेख और उसके शीर्षक को लेकर भारत में काफी विवाद भी हुआ था।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।