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बिहार : उपचुनाव ने राजद को दी संजीवनी, महागठबंधन में तेजस्वी का कद बढ़ाया

October 26th, 2019 18:00 IST
 बिहार : उपचुनाव ने राजद को दी संजीवनी, महागठबंधन में तेजस्वी का कद बढ़ाया

हाईलाइट

  • बिहार : उपचुनाव ने राजद को दी संजीवनी, महागठबंधन में तेजस्वी का कद बढ़ाया

पटना, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। बिहार की पांच विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजों ने जहां सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को झटका दिया है, वहीं महज पांच महीने पहले लोकसभा चुनाव में एक भी सीट न पाने वाले राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के लिए यह उपचुनाव संजीवनी माना जा रहा है।

पांच सीटों पर हुए उपचुनाव में विपक्षी राजद सत्ताधारी जनता दल युनाइटेड (जदयू) से दो सीटें झटकने में कामयाब रहा।

इस साल हुए लोकसभा चुनाव में राजग को 40 में से 39 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि राजद खाता भी नहीं खोल सका था, मगर इसके नेतृत्व वाले विपक्षी दलों के महागठबंधन में शामिल कांग्रेस प्रत्याशी मोहम्मद जावेद किशनगंज सीट जीतने में कामयाब रहे हैं।

बिहार में हुए उपचुनाव में बेलहर से राजद प्रत्याशी रामदेव यादव और सिमरी बख्तियारपुर से जफर आलम विजयी हुए हैं। जदयू ने नाथनगर सीट जीती। पार्टी उम्मीदवार लक्ष्मीकांत मंडल ने राजद की राबिया खातून को महज पांच हजार मतों के मामूली अंतर से हराया है।

राजनीति के जानकार भी मानते हैं कि इस उपचुनाव ने राजद को संजीवनी उपलब्ध कराई है।

राजनीतिक विश्लेषक सुरेंद्र किशोर कहते हैं, बिहार उपचुनाव के परिणाम ने राजद को मनोवैज्ञानिक संजीवनी तो उपलब्ध करा ही दी है, वहीं इससे राजद नेता तेजस्वी का कद भी बढ़ा है। दो सीटों पर जीत पार्टी के लिए कोरामिन है। इससे कुछ दिनों तक राजद का हौसला बुलंद रहेगा।

उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में राजद की हार के बाद महागठबंधन में तेजस्वी का कद घटा था, मगर उपचुनाव में जीत से उनका जरूर बढ़ा है।

वैसे, इस उपचुनाव के नतीजे 2020 के विधानसभा चुनाव की दशा व दिशा कितनी तय करेंगे, इस पर अभी भी संदेह है। मगर इस उपचुनाव को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल जरूर माना जा रहा था।

उपचुनाव में विपक्षी दलों की एकता भले ही तार-तार होती रही, मगर राजद अपने निर्णय से पीछे नहीं हटा। नाथनगर विधानसभा सीट पर महागठबंधन में शामिल हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) और सिमरी बख्तियारपुर सीट पर विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) ने राजद के खिलाफ अपना-अपना प्रत्याशी खड़े कर दिया। दोनों सीटों पर इन दोनों पार्टियों की हालांकि हार हुई। सिमरी बख्तियारपुर सीट राजद को मिली, जबकि नाथनगर सीट जदयू के खाते में गई।

पटना के वरिष्ठ पत्रकार मनोज चौरसिया भी मानते हैं कि लोकसभा चुनाव में महागठबंधन की हार के बाद से राजद नेता तेजस्वी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाए जाते रहे, अब उसमें कमी आएगी।

राजद के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि उपचुनाव के परिणाम जनता के बीच राजद की स्वीकार्यता बढ़ने और राजग का प्रभाव घटने का परिचायक हैं।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।