दैनिक भास्कर हिंदी: तो क्या नीतीश कुमार की 25 सीटों की मांग पर राजी होगी बीजेपी? ये है पूरा गणित..

June 5th, 2018

हाईलाइट

  • साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन दलों में सीटों की खींचतान शुरू हो गई है।
  • रविवार को जेडीयू प्रवक्ता अजय आलोक ने बिहार की 40 में से 25 सीटों पर लड़ने की बात कही है।
  • साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी यहां 22 सीटों पर जीती थी।
  • नशक्ति पार्टी को 6 और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी को 3 सीटें मिली थी।
  • 2014 के आम चुनाव में एनडीए को 31 सीटें मिली थी।
  • एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ी नीतीश कुमार की जदयू की इस चुनाव में बुरी गत हुई थी। जदयू को महज 2 सीटें हासिल हुई थी।

डिजिटल डेस्क, पटना। साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन दलों में सीटों की खींचतान शुरू हो गई है। एक ओर जहां विपक्षी दल बीजेपी के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने के लिए सीटों के बंटवारे को लेकर बैठकें शुरू कर चुके हैं, वहीं एनडीए के घटक दलों में भी सीट बंटवारे को लेकर बयानबाजी शुरू हो गई है। रविवार को जेडीयू प्रवक्ता अजय आलोक ने बिहार की 40 में से 25 सीटों पर लड़ने की बात कही है। अब ऐसे में सवाल उठता है कि पिछले लोकसभा चुनाव में 40 में से 22 सीटें जीतने वाली बीजेपी क्या 2 लोकसभा सीटों वाले अपने सहयोगी दल की इस मांग पर राजी होगी?

पिछले चुनाव में ये रहा था नतीजा


बिहार में 40 लोकसभा सीटें हैं। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी यहां 22 सीटों पर जीती थी। वहीं उसके सहयोगी दल लोक जनशक्ति पार्टी को 6 और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी को 3 सीटें मिली थी। इस तरह से 2014 के आम चुनाव में एनडीए को 31 सीटें मिली थी। एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ी नीतीश कुमार की जदयू की इस चुनाव में बुरी गत हुई थी। जदयू को महज 2 सीटें हासिल हुई थी।

 



 

2 सीटों वाली जदयू क्यों मांग रही है 25 सीटें


साल 2014 के बाद से हो रहे उपचुनावों में लगातार बीजेपी को हार मिल रही है। उत्तर से लेकर दक्षिण तक विपक्षी पार्टियां एकजुट हो रही हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा ने एकजुट होकर बीजेपी को लगातार तीन लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनावों में हराया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धीरे-धीरे मजबूत हो रहे विपक्षी पार्टियों के गठबंधन का मुकाबला करने के लिए बीजेपी को भी मजबूत सहयोगियों की जरूरत होगी। दक्षिण भारत में TDP के नाता तोड़ने और महाराष्ट्र में शिवसेना से मतभेद के चलते NDA की हालत पहले से कमजोर हुई है। ऐसे में बीजेपी अपने किसी भी सहयोगी दल से के रूठने का रिस्क नहीं ले सकती। इसी बात का फायदा उठाकर जदयू ने यह दांव खेला है।

 



 

क्या जदयू की मांग पर राजी होगी बीजेपी


अगर बीजेपी अपने सहयोगी दल जदयू को 25 सीटें दे देती है तो उसके पास महज 15 सीटें बचेंगी। इसमें उसे लोजपा और रालोसपा को भी सीटें देनी होंगी। ऐसे में बीजेपी के पास खुद के लिए 10 से भी कम सीटें रह जाएंगी। ऐसे में सीटों के इस बंटवारे पर बीजेपी का राजी होना अंसभव सा लगता है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बीजेपी, जदयू को 25 सीटें तो नहीं देगी, लेकिन सहयोगियों की कमी से जूझ रही बीजेपी, नीतीश कुमार को 15 से 20 सीटों पर मनाने की कोशिश करेगी।

 



 

बात नहीं बनी तो क्या


बीजेपी और जदयू के बीच अगर सीटों के बंटवारे को लेकर बात नहीं बनी, तो बीजेपी अपने एक और सहयोगी दल को खो देगी। बिहार में जदयू या तो अलग से चुनाव लड़ेगी या फिर से महागठबंधन की ओर झुकेगी। दोनों ही स्थितियों में बीजेपी को बिहार में बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है।



 

 

बीजेपी का क्या है कहना


JDU की 25 सीटों की मांग पर बिहार के उपमुख्यमंत्री और बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी ने स्पष्ट जवाब तो नहीं दिया लेकिन उनका कहना है कि जब दिल मिल गए तो सीट क्या बड़ी चीज है, इस पर भी बात बन जाएगी। सुशील मोदी ने कहा, 'दोनों दलों के बीच इसे लेकर कोई विवाद नहीं है। चुनाव में कौन कितनी सीटों पर लड़ेगा, सब ऐलान समय आने पर कर दिया जाएगा।' उन्होंने इस दौरान जदयू प्रवक्ता अजय आलोक के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने बिहार में नीतीश कुमार को NDA का चेहरा बताया था। मोदी ने कहा, 'देश में नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री हैं, लेकिन बिहार के नेता तो नीतीश ही हैं। बिहार में जो भी वोट मिलेगा वो पीएम मोदी और सीएम नीतीश के नाम पर मिलेगा। इसमें कोई विरोधाभास नहीं है।'
 



क्या कहा था अजय आलोक ने


जदयू प्रवक्ता अजय आलोक ने रविवार को कहा था कि बिहार में सीटों के बंटवारे को लेकर कोई कनफ्यूजन नहीं है। हम 25 सीटों पर लड़ेंगे और बीजेपी 15 सीटों पर। बाकी जो गठबंधन दल हैं उन पर टॉप लीडर चर्चा करेंगे। बिहार में नीतीश कुमार ही NDA का चेहरा होंगे।