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बिहार विधान चुनाव से पहले भाजपा ने शुरू की विधान परिषद चुनाव की तैयारी

June 14th, 2020 17:30 IST
 बिहार विधान चुनाव से पहले भाजपा ने शुरू की विधान परिषद चुनाव की तैयारी

हाईलाइट

  • बिहार विधान चुनाव से पहले भाजपा ने शुरू की विधान परिषद चुनाव की तैयारी

नई दिल्ली, 14 जून (आईएएनएस)। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने विधान परिषद चुनाव के लिए बिसात बिछानी शुरू कर दी है। पार्टी हाईकमान से ग्रीन सिग्नल मिलने के बाद बिहार भाजपा प्रभारी भूपेंद्र यादव इस बावत जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं से लगातार बैठक कर रहे हैं। जेडीयू नेताओं के साथ उनकी कई दौर की बातचीत हो चुकी है।

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा विधान परिषद चुनाव के लिए जेडीयू के साथ बेहतर तालमेल चाहती है। भाजपा के लिए विधान परिषद का चुनाव लिटमस टेस्ट जैसा है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक भाजपा इस बार नये चेहरों पर भी दांव लगा सकती है।

ध्यान रहे कि बिहार में विधान परिषद की कुल 75 सीटें हैं, जिनमें 29 सीटें इस वक्त खाली हैं। इनमें अलग-अलग कैटेगरी में विधानसभा कोटे की कुल 9 सीटें खाली हो गई हैं, जबकि स्नातक और शिक्षक कोटे की चार-चार सीटें खाली हो गई हैं। इसके अलावा राज्यपाल कोटे की 12 सीटें खाली हुई हैं।

बिहार में जिन लोगों का विधानपरिषद का कार्यकाल समाप्त हुआ है, उनमें नीतीश सरकार में जेडीयू कोटे के दो मंत्री शामिल हैं। इधर भाजपा की तरफ से पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी संजय मयूख, राधा मोहन शर्मा और कृष्ण कुमार सिंह की सीट खाली हुई है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पार्टी नये लोगों पर दांव लगा सकती है, जिनमे राज्यसभा सांसद आर के सिन्हा के पुत्र रितुराज सिन्हा का नाम शामिल है। इसके अलावा संजय मयूख और राधा मोहन शर्मा को पार्टी फिर से विधान परिषद भेज सकती है।

विधान परिषद में मौजूदा संख्या बल के हिसाब से जेडीयू को तीन और बीजेपी को दो विधान परिषद की सीटें मिलनी तय हैं, जबकि आरजेडी को तीन और कांग्रेस को एक सीट मिलने की संभावना है।

गौरतलब है कि देश भर में जारी कोरोना संकट और देशव्यापी बंदी की वजह से विधान परिषद का चुनाव टाल दिया गया था। लेकिन कोरोना काल में ही चुनाव आयोग ने 21 मई को महाराष्ट्र विधानपरिषद का चुनाव कराया है। ऐसे में बिहार में भी जल्दी ही विधान परिषद का चुनाव कराने की उम्मीद जताई जा रही है।

गौरतलब है विधान परिषद के चुनाव में विधानसभा के सदस्य हिस्सा लेते हैं। ऐसे में 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में मौजूदा समीकरण के हिसाब से विधानपरिषद की एक सीट के लिए 25 विधायकों की जरूरत होगी। एनडीए की संख्या बल के हिसाब से बिहार विधानसभा में जेडीयू के 70, बीजेपी के 54 और एलजेपी के दो एमएलए हैं, जबकि विपक्षी दलों में आरजेडी के 79 और कांग्रेस के 26 एमएलए हैं।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।