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लद्दाख सीमा के पास टेंट लगाकर सुरंग बना रही चीनी सेना, भारतीय सेना को प्रवेश करने से रोका

लद्दाख सीमा के पास टेंट लगाकर सुरंग बना रही चीनी सेना, भारतीय सेना को प्रवेश करने से रोका

हाईलाइट

  • सीमा पर चीन की सेना ने बढ़ाई गश्त
  • दोनों सेनाओं के बीच बढ़ा तनाव
  • चीन ने इस इलाके में कुछ सुरंगें बना ली हैं

डिजिटल डेस्क, लद्दाख। चीनी सेना के लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के पास निर्माण कार्य शुरू करने सुरंग बनाने से सीमा पर तनाव बढ़ गया है। रक्षा मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने लद्दाख क्षेत्र में पैंगोंग झील के पास सैन्य बुनियादी ढांचे के विकास पर काम करना शुरू कर दिया है। चीन के सैनिकों ने यहां टेंट लगाए हैं और गश्त भी बढ़ा दी है।

सेना ने कुछ सुरंग बना ली हैं, जबकि कुछ का निर्माण जारी है। इन सुरंगों को पेनगॉन्ग लेक क्षेत्र में विवादित फिंग 8 माउंटेन के पास तैयार किया जा रहा है। वहीं, चीनी सैनिक अब इस क्षेत्र में भारतीय सेना को आने-जाने से रोक रहे रहे हैं। इससे पहले भारतीय सैनिक इस क्षेत्र में आते-जाते रहे हैं। ऐसे में दोनों देशों की सेना के बीच तनाव बढ़ रहा है।

एक सूत्र ने बताया कि चीनी सेना ने इस इलाके में टेंट स्थापित किया है और वह इस इलाके में भूमिगत सुरंगों का निर्माण किया है, वहीं पेनगॉन्ग क्षेत्र के पास विवादित फिंगर 8 माउंटेन स्पर में और अधिक सुरंगों का निर्माण चीनी सेना कर रही है। सूत्र के मुताबिक ये देखा जा रहा है कि चीनी सेना ने तैनाती और इलाके में गश्त बढ़ाई है। वे अब इलाके के आसपास के इलाकों में भारतीय सेना के जवानों की आवाजाही पर ऐतराज जता रहे हैं।

चीन का पेनगॉन्ग लेक के दो तिहाई हिस्से पर कब्जा
पेनगॉन्ग लेक का काफी हिस्सा विवादित है। इसका दो तिहाई हिस्सा चीन के कब्जे वाले तिब्बत में है, बाकी भारतीय सीमा में है। इस झील की सीमा की लंबाई करीब 134 किलोमीटर है। चीन को झील के उत्तरी हिस्से में भारतीय जवानों की मौजूदगी पर ऐतराज रहा है। इस साल सितंबर में भी चीनी सैनिकों ने लद्दाख के उत्तरी हिस्से में घुसपैठ कर तंबू लगा दिए थे। दोनों सेनाओं के बीच फ्लैग मीटिंग होने के बाद चीनी पीछे हटने को तैयार हो गए थे।

लद्दाख में सीमा पर भारत और चीन के बीच विवाद
यह पहली बार नहीं है कि जब इस विवादित क्षेत्र में निर्माण कार्य हो रहा है। हालांकि, भारत-चीन सीमा पर स्थित यह क्षेत्र हमेशा से विवादों का कारण रहा है। इसका कारण सीमा का स्पष्ट नहीं होना है। दोनों देशों का एलएसी को लेकर अपना-अपना दावा है। दूसरी तरफ चीनी सैनिकों के लिए यह स्थाई ठिकाना बनता जा रहा है। यह भारत की सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक है।

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। टोक्यो ओलंपिक का काउंटडाउन शुरु हो चुका हैं। 23 जुलाई से शुरु होने जा रहे एथलेटिक्स त्यौहार में भारतीय दल इस बार 120 खिलाड़ियों के साथ 18 खेलों में दावेदारी पेश करेगा। बता दें 81 खिलाड़ियों के लिए यह पहला ओलंपिक होगा। 120 सदस्यों के इस दल में मात्र दो ही खिलाड़ी ओलंपिक पदक विजेता हैं। पी.वी सिंधू ने 2016 रियो ओलंपिक में सिल्वर तो वहीं मैराकॉम ने 2012 लंदन ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया था।

भारत पहली बार फेंनसिग में चुनौता पेश करेगा। चेन्नई की भवानी देवी पदक की दावेदारी पेश करेंगी। भारत 20 साल के बाद घुड़सवारी में वापसी कर रहा है, बेंगलुरु के फवाद मिर्जा तीसरे ऐसे घुड़सवार हैं जो ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। 

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युवा कंधो पर दारोमदार

टोक्यो ओलंपिक में भाग लेने जा रहे भारतीय दल में अधिकतर खिलाड़ी युवा हैं। 120 खिलाड़ियों में से 103 खिलाड़ी 30 से भी कम आयु के हैं। मात्र 17 खिलाड़ी ही 30 से ज्यादा उम्र के होंगे। 

भारतीय दल में 18-25 के बीच 55, 26-30 के बीच 48, 31-35 के बीच 10 तो वहीं 35+ उम्र के 7 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। इस लिस्ट में सबसे युवा 18 साल के दिव्यांश सिंह पंवार हैं, जो शूटिंग में चुनौता पेश करेंगे, तो वहीं सबसे उम्रदराज 45 साल के मेराज अहमद खान होंगे जो शूटिंग में ही पदक के लिए भी दावेदार हैं।