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SC का बड़ा फैसला, अब चीफ जस्टिस का ऑफिस भी होगा RTI के दायरे में

SC का बड़ा फैसला, अब चीफ जस्टिस का ऑफिस भी होगा RTI के दायरे में

हाईलाइट

  • CJI ऑफिस में भी RTI अधिनियम होगा लागू
  • न्यायिक स्वतंत्रता को कम नहीं करती पारदर्शिता : सुप्रीम कोर्ट
  • 5 जजों वाली संविधान पीठ ने सुनाया फैसला

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मुख्य न्यायाधीश (CJI) और सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) को लेकर सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों वाली संविधान पीठ ने आज (बुधवार) बड़ा फैसला सुनाया है। अब मुख्य न्यायाधीश (CJI) का ऑफिस भी सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के दायरे में होगा। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि CJI का ऑफिस भी एक पब्लिक अथॉरिटी है, जिसके तहत यह भी RTI के दायरे में आएगा। साथ ही कोर्ट ने कहा कि 'पारदर्शिता, न्यायिक स्वतंत्रता को कम नहीं करती है।' CJI रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली इस पीठ में जस्टिस एन वी रमण, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना शामिल रहे।

साल 2009 में दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि जिस तरह से RTI अधिनियम के अंतर्गत अन्य पब्लिक अथॉरिटी द्वारा आवेदकों को सूचनाएं दी जाती हैं, उसी तरह सुप्रीम कोर्ट और CJI कार्यालय को भी अपनी सूचना आवेदकों को प्रदान की जानी चाहिए। साल 2007 में RTI एक्टिविस्ट सुभाष चंद्र अग्रवाल द्वारा जजों की संपत्ति जानने के लिए एक RTI आवेदन दाखिल किया गया था। इसके बाद आवेदन में मांगी गई जानकारी देने से इनकार कर दिया गया तो यह मामला केंद्रीय सूचना आयुक्त (CIC) तक जा पहुंचा। हांलाकि CIC ने भी आवेदक की अपील के दौरान जानकारी देने के आदेश दिए थे लेकिन तब भी कोई जानकारी नहीं दी गई।

जब मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने जानकारी देने के आदेश दिए। साथ ही कोर्ट ने कहा था कि न्यायिक स्वतंत्रता न्यायाधीश का  न सिर्फ विशेषाधिकार है, बल्कि एक जिम्मेदारी भी है। इसके बाद साल 2010 में सुप्रीम कोर्ट के जनरल सेक्रेटरी और केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी, दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा पहुंचे। बता दें कि इस मामले पर पीठ ने 4 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। 9 साल बाद आज इस मामले पर पूर्ण विराम लगा है। बता दें कि मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने अपने रिटायरमेंट से पहले इस मामले में फैसला सुनाया है। इससे पहले भी वह 9 नवंबर (शनिवार) को अयोध्या राम मंदिर विवाद पर फैसला दे चुके हैं। वह 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं।

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।