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Covid-19: वैक्सीन लगने के 9 दिन बाद भोपाल के 42 वर्षीय वॉलंटियर की मौत, भारत बायोटेक बोली- डोज से संबंध नहीं

Covid-19: वैक्सीन लगने के 9 दिन बाद भोपाल के 42 वर्षीय वॉलंटियर की मौत, भारत बायोटेक बोली- डोज से संबंध नहीं

हाईलाइट

  • भोपाल में एक वॉलंटियर की हुई मौत
  • परिवार ने मौत पर उठाए थे सवाल
  • भारत बायोटेक ने शनिवार को दी सफाई

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में भारत बायोटेक की कोरोना वैक्सीन को ट्रायल के दौरान एक 42 वर्षीय वॉलंटियर की मौत का  मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि युवक को 9 दिन पहले ट्रायल के तौर पर कोवैक्सीन का टीका लगाया गया था। युवक की मौत पर सवाल उठाए हैं। वहीं मामले को लेकर भारत बायोटेक की ओर से कहा गया कि वॉलंटियर की मौत डोज देने के 9 दिन बाद हुई और प्रारंभिक जांच के मुताबिक मृत्यु का डोज से कोई संबंध नहीं है। कंपनी ने मृतक के परिवार के प्रति सहानुभूति जताई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक भोपाल के पीपुल्स मेडिकल कॉलेज में 12 दिसंबर को कोवैक्सीन का ट्रायल टीका लगवाने वाले दीपक मरावी नाम के वॉलंटियर की 21 दिसंबर को मौत हो गई थी। मरावी टीला जमालपुरा स्थित सूबेदार कॉलोनी में अपने घर में मृत पाए गए थे। मृतक के बेटे ने मृत्यु की सूचना पीपुल्स कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर को दी थी।पुलिस ने मामले की जांच करते हुए 22 दिसंबर को उनके शव का पोस्टमॉर्टम कराया। परिवार ने मौत पर सवाल उठाए थे।

भारत बायोटेक ने कहा कि वॉलंटियर ने नामांकन के समय तीसरे चरण के ट्रायल में एक भागीदार के रूप में स्वीकार किए जाने के लिए सभी मानदंडों को पूरा किया था। जब उसे वैक्सीन की डोज दी गई, उसके बाद भी उसके सेहत पर निगरानी रखी जा रही थी। 

भारत बायोटेक ने कहा कि वैक्सीन की डोज देने के 7 दिन बाद रिपोर्ट में उसके स्वस्थ होने की सूचना दी गई थी। भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज के द्वारा जारी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हवाले से भोपाल पुलिस के मुताबिक मौत का संभावित कारण कार्डियो रेस्पिरेटरी फेलियर हो सकता है, जो कि हो सकता है जहर के चलते हुआ हो। भारत बायोटेक ने कहा कि कंपनी यह नहीं बता सकती कि वॉलंटियर को वैक्सीन दी गई थी या प्लेसिबो, क्योंकि स्टडी का अभी खुलासा नहीं हुआ है।

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।