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दिल्ली : 1971 का युद्ध लड़ चुके कैप्टन से 40 हजार रुपये की ठगी

October 04th, 2019 20:31 IST
 दिल्ली : 1971 का युद्ध लड़ चुके कैप्टन से 40 हजार रुपये की ठगी

नई दिल्ली, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। दक्षिणी दिल्ली के हौजखास इलाके में ठगी की एक अजीबो-गरीब घटना सामने आई है। दो महिलाओं ने 10 सेकेंड में भारतीय फौज के रिटायर्ड कैप्टन से 40 हजार रुपये उड़ा दिए। कैप्टन नरेंद्र कुमार महाजन 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध में हिस्सा ले चुके हैं।

पुलिस के अनुसार, थाना हौजखास इलाके में यह घटना गुरुवार अपराह्न् लगभग पौने दो बजे घटी। भारतीय फौज के रिटायर्ड कैप्टन नरेंद्र कुमार महाजन पत्नी एस. चंद्रा के साथ रहते हैं। पास ही स्थित सिंडीकेट बैंक में उनका बचत खाता है। गुरुवार को उन्होंने बैंक से 40 हजार रुपये निकाले। उसके बाद करीब ही मौजूद एटीएम से रुपये निकालने जा पहुंचे।

नरेंद्र महाजन एटीएम में जैसे ही घुसे और उन्होंने अपना कार्ड मशीन में डाला, पीछे से दो महिलाएं एटीएम केबिन के भीतर जा पहुंचीं। एटीएम में अचानक पहुंची महिलाओं में से एक ने महाजन को बातों में उलझा लिया। इतने में पीछे खड़ी महिला महज 10 सेकेंड में महाजन की जेब में मौजूद 40 हजार रुपये निकाल चुकी थी। रुपये हाथ लगते ही दोनों महिलाएं तेज कदमों से एटीएम के बाहर निकल गईं और वहां से रफूचक्कर हो गईं।

सेना का यह पूर्व कैप्टन जब तक कुछ समझ पाता और एटीएम से बाहर आया, तब तक दोनों ठग महिलाएं फरार हो चुकी थीं। फिलहाल इस सिलसिले में हौजखास पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ठगी का मामला सीसीटीवी में कैद हो गया है। अब दक्षिणी जिला पुलिस ठग महिलाओं की तलाश में अंधेरे में हाथ-पांव मार रही है।

ठगी के इस मामले में हालांकि दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता और मध्य दिल्ली जिले के डीसीपी मंदीप सिंह रंधावा से बात करने की कोशिश की गई, मगर उनकी तरफ से कोई जबाब नहीं मिला।

ठगी के शिकार हुए कैप्टन नरेंद्र कुमार महाजन ने आईएएनएस से अपने साथ घटी घटना की पुष्टि की है।

कैप्टन महाजन ने 1971 के युद्ध की घटना को याद करते हुए आईएएनएस को बताया, सन 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई जंग के दौरान मैं 56 माउंटेन रेजीमेंट में तैनात था। मेरी पोस्टिंग मेघालय में थी। मुझे लड़ाई के दौरान फॉरवर्ड आब्जर्वर अफसर बनाकर ढाका बार्डर पार करने के लिए भेजा गया था। वह मेरा स्पेशल टास्क था। बीच में ही मैं कई अन्य अफसरों के साथ गोलियों का शिकार बन गया। मेरे निचले जबड़े, पीठ, कमर और गर्दन में गोलियां घुसी हुई थीं।

राष्ट्रीय राजधानी में महिलाओं द्वारा ठगे जाने से हतप्रभ भारतीय सेना के इस जांबाज ने आगे कहा, मुझे मुर्दा समझकर बाकी मुर्दों के बीच में लिटा दिया गया था, ताकि मेरे शव को पैकिंग करके कफन में बांधकर घर भिजवाया जा सके। उसी समय मेरे बदन में हुई मामूली हरकत देखकर मौके पर मौजूद भारतीय फौज की नर्स रहीं लेफ्टिनेंट एस. चंद्रा (अब पत्नी नमिता महाजन) ने मुझे लाशों के बीच से उठवाकर प्राथमिक उपचार देकर बचा लिया। अब हम दोनों पति-पत्नी के रूप में रह रहे हैं।

-- आईएएनएस

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।