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अनामिका से प्रिया तक, कई नौकरियों के साथ कई पहचान

June 08th, 2020 12:31 IST
 अनामिका से प्रिया तक, कई नौकरियों के साथ कई पहचान

हाईलाइट

  • अनामिका से प्रिया तक, कई नौकरियों के साथ कई पहचान

लखनऊ, 7 जून (आईएएनएस)। अनामिका शुक्ला से लेकर अनामिका सिंह और आखिरकार प्रिया। यह प्राथमिक विद्यालय की वह शिक्षिका है, जो एक साथ 25 स्कूलों में पढ़ाती हुई पकड़ी गई है और इस काम के लिए वह अपनी अलग-अलग पहचान भी बनाई हुई थी।

अनामिका को शनिवार को कासगंज जिले से गिरफ्तार किया गया था जब वह बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) अंजलि अग्रवाल द्वारा कारण बताओ नोटिस भेजे जाने के बाद अपना इस्तीफा सौंपने गई थीं।

अग्रवाल ने पुलिस को सूचित किया और अनामिका को गिरफ्तार कर लिया गया।

कासगंज बीएसए के मुताबिक, मूल रूप से फरुखाबाद के कायमगंज की रहने वाली अनामिका शुक्ला वर्तमान में गोंडा के रघुकुल डिग्री कॉलेज से बीएड कर रही हैं। उसके अन्य दस्तावेज भी उसी कॉलेज के हैं।

पूछताछ के दौरान अनामिका शुक्ला ने कहा कि वह वास्तव में अनामिका सिंह ही है, लेकिन जैसे-जैसे बात और सवाल-जवाब की प्रक्रिया आगे बढ़ती गई, तब पता चला कि वह प्रिया है, जो फरुर्खाबाद से है।

उसे आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति देने के लिए प्रेरित करना), 467 (मूल्यवान मूल्यवान प्रतिभूति को बनाने या हस्तांतरण की कूटरचना) और 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य के लिए जालसाजी) के तहत हिरासत में लिया गया है।

पुलिस के अनुसार, महिला ने दावा किया है कि उसने यह नौकरी पाने के लिए मैनपुरी के एक व्यक्ति को पांच लाख रुपये का भुगतान किया था।

उसने नौकरी पाने के लिए अनामिका शुक्ला के पहचान पत्र का इस्तेमाल किया, जबकि उसका असली नाम प्रिया है, जो फरुर्खाबाद जिले में कायमगंज पुलिस सर्कल के लखनपुर गांव के रहने वाले महिपाल की बेटी है।

सोरों स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) रिपुदमन सिंह ने कहा, पूछताछ के दौरान आरोपी ने शुरूआत में सुभास सिंह की बेटी अनामिका सिंह होने का दावा किया। हालांकि उसके दस्तावेज सुभाष चंद्र शुक्ला की बेटी अनामिका शुक्ला के नाम पर हैं।

आरोपी ने दावा किया है कि उसने नौकरी के लिए मैनपुरी के रहने वाले राज को मोटी रकम का भुगतान किया था और अगस्त 2018 से फरीदपुर कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) में कार्यरत थी।

पुलिस अब उस आदमी की तलाश कर रही है, जिसने उसे नौकरी दी थी।

पुलिस का यह भी मानना है कि यह हो सकता है कि ऐसे और भी कई उम्मीदवार हो, जो अनामिका शुक्ला की पहचान और योग्यता का इस्तेमाल करते हो - हालांकि वास्तविक अनामिका के बारे में अभी तक कुछ पता नहीं चल सका है।

उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार, अंबेडकर नगर, बागपत, अलीगढ़, सहारनपुर और प्रयागराज जिलों में पांच और अनामिका शुक्ला को केजीबीवी में काम करते हुए पाया गया है। कथित तौर पर उसने पिछले एक साल में करीब एक करोड़ रुपये का संयुक्त वेतन निकाला है।

केजीबीवी में शिक्षक अनुबंध पर नियुक्त किए जाते हैं और उन्हें प्रति माह लगभग 30,000 रुपये का भुगतान किया जाता है। जिले के प्रत्येक ब्लॉक में एक कस्तूरबा गांधी विद्यालय है, जो समाज के कमजोर वर्गों से ताल्लुक रखने वाली लड़कियों के लिए एक आवासीय शिक्षण संस्थान है।

-आईएएनएस

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।