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GST Meeting: मोदी सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को दिया बड़ा तोहफा, 10 हजार का एडवांस, LTC के कैश वाउचर्स


हाईलाइट

  • वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जीएसटी काउंसिल की बैठक

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जीएसटी परिषद की बैठक की। देश के आर्थिक हालात पर मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि कोरोना वायरस महामारी की वजह से अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा विभिन्न घोषणाओं में गरीब और कमजोर वर्गों की जरूरतों को पूरा करने का प्रयास किया गया है।

उन्होंने कहा कि आपूर्ति की बाधा को कम किया गया लेकिन उपभोक्ता मांग को अभी भी प्रोत्साहित करने की जरूरत है। वित्त मंत्री ने कहा कि अर्थव्यवस्था में मांग को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाये जा रहे हैं। मांग को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार उपभोक्ता खर्च और पूंजीगत व्यय बढ़ाने के लिए उपाय कर रही है।

#WATCH: Finance Minister Nirmala Sitharaman addresses media https://t.co/5hFOxm7BbZ

— ANI (@ANI) October 12, 2020

उपभोक्ता मांग में इजाफा करने के लिए सरकार LTC कैश बाउचर्स और फेस्टिवल एडवांस स्कीम लेकर आई है। इसके तहत एलटीसी के बदले कैश वाउचर की व्यवस्था रहेगी। कैश वाउचर स्कीम के तहत मांग बढ़ाने पर जोर है। वाउचर के लिए एलटीए का इस्तेमाल हो सकता है। कैश वाउचर का वित्त वर्ष 2021 में इस्तेमाल जरूरी है।

वित्त मंत्री ने कहा कि, सरकार LTC कैश बाउचर्स और फेस्टिवल एडवांस स्कीम लेकर आई है। अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ाने के लिए सरकारर के कुल चार कदम उठाए हैं। 
1. सरकारी कर्मचारियों के एलटीसी के बदले कैश वाउचर्स।
2. कर्मचारियों को फेस्टिवल एडवांस देना। 
3. राज्य सरकारों को 50 साल तक के लिए बिना ब्याज कर्ज।
4. बजट में तय पूंजीगत व्यय के अलावा केंद्र द्वारा बुनियादी ढांचे के विकास आदि पर 25 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करना।

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वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार कर्मचारियों के लिए स्पेशल फेस्टिवल एडवांस स्कीम को लेकर भी आई है। स्पेशल फेस्टिवल एडवांस स्कीम के तहत कर्मचारियों को ब्याज मुक्त 10 हजार रुपए नगद कैश दिया जाएगा। इस पैसे को 10 आसान किस्त में वापस किया जा सकेगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि राज्यों को 50 वर्ष के लिए पूंजीगत व्यय के लिए  बगैर ब्याज के 12 हजार करोड़ रुपए का स्पेशल कर्ज दिया जा रहा है। इसके तहत 1600 करोड़ रुपए उत्तर पूर्वी राज्यों, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के लिए क्रमश: 450 करोड़ रुपए और 450 करोड़ रुपए लोन का प्रस्ताव है।

उन्होंने कहा कि, देश के अन्य राज्यों के लिए 7,500 रुपए का लोन का प्रस्ताव है। इसके अलावा सड़क, रक्षा, पानी सप्लाई, शहरी विकास और घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए पूंजीगत खर्च के रूप में 25,000 करोड़ रुपए भी दिए जाएंगे।

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