दैनिक भास्कर हिंदी: हार्दिक पटेल की कांग्रेस से मांग, MP में सिंधिया को बनाएं सीएम उम्मीदवार

April 7th, 2018

डिजिटल डेस्क, मंदसौर। मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी भले ही चुनाव से पहले चेहरा घोषित करने से बार-बार इनकार कर रही हो लेकिन इसकी मांग पार्टी के अंदर और बाहर से उठने लगी है। इस बार ये मांग गुजरात के पाटीदार आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल ने उठाई है। मप्र के मंदसौर में एक कार्यक्रम में शामिल होने आए पटेल ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मुख्यमंत्री के तौर पर सिंधिया के नाम को आगे बढ़ाना चाहिए। हार्दिक पटेल ने कहा कि प्रदेश में लगातार 15 सालों से सत्ता पर काबिज बीजेपी सरकार को यहां से हटाने की जरूरत है और ये तभी मुमकिन है जब यहां की जनता जागरुक होगी।

कमलनाथ, सत्यव्रत भी कर चुके हैं मांग

प्रदेश में कांग्रेस के एक और बड़े नेता कमलनाथ भी सिंधिया को मुंख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की पैरवी कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि अगर सिंधिया के नाम पर पार्टी विचार करती है तो उन्हें खुशी होगी। इसके अलावा सत्यव्रत चतुर्वेदी भी खुलकर सिंधिया के समर्थन में कर चुके हैं। मप्र में दिग्विजय सिंह, अजय सिंह, कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया और अरुण यादव कांग्रेस के वो बड़े नाम हैं जिनके कंधों पर प्रदेश कांग्रेस की पूरी जिम्मेदारी है और इन्हीं में से कोई पार्टी का चेहरा भी बन सकता है। इतने सारे दिग्गजों के बीच बार-बार सिंधिया का नाम सामने आना कहीं न कहीं उनकी दावेदारी को और मजबूत कर रहा है।

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उपचुनावों में मिली जीत से दावेदारी को मिला बल

हाल ही में संपन्न हुए मुंगावली और कोलारस उपचुनाव में कांग्रेस को मिली जीत से सिंधिया की दावेदारी को बल मिला है। सिंधिया का गढ़ कहे जाने वाले मुंगावली और कोलारस में सेंध लगाने के लिए बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी लेकिन इसके बावजूद बीजेपी को यहां हार का सामना करना पड़ा। इसके पहले अटेर विधानसभा उपचुनाव में भी बीजेपी को मुंह की खानी पड़ी थी। यही वजह है कि सिंधिया पिछले कुछ समय में सबसे बड़े उम्मीदवार के रूप में उभरे हैं।

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प्रदेश में सिंधिया ने बढ़ाई सक्रियता

 

कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया पिछले कुछ समय से मप्र में काफी सक्रिय नजर आ रहे हैं फिर चाहे वो कांग्रेस के सरकार के खिलाफ आंदोलन हों या फिर उपचुनावों के दौरान पार्टी प्रत्याशियों के लिए प्रचार। पहले जहां सिंधिया से लोगों को शिकायत रहती थी कि वो प्रदेश में कम और बाहर ज्यादा वक्त बिताते हैं। कहीं न कहीं उसी शिकायत को दूर करने का उनका ये प्रयास है। इसी का नतीजा है कि सिंधिया को प्रदेश में कांग्रेस के चेहरे के रूप देखा जाने लगा है।