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टेस्टिंग की नई तकनीक: IIT खड़गपुर ने बनाया कोरोना टेस्ट पोर्टेबल डिवाइस, 400 रुपए लागत पर सिर्फ एक घंटे में मिलेगी रिपोर्ट

टेस्टिंग की नई तकनीक: IIT खड़गपुर ने बनाया कोरोना टेस्ट पोर्टेबल डिवाइस, 400 रुपए लागत पर सिर्फ एक घंटे में मिलेगी रिपोर्ट

हाईलाइट

  • ये डिवाइस आरटी-पीसीआर के मानकों पर 100% खरी उतरी
  • मोबाइल ऐप पर मिलेगा डिवाइस से की गई जांच का रिजल्ट
  • उपकरण से अन्य वायरस की जांच भी जांच की सकती है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) खड़गपुर ने शनिवार को कोरोना के रैपिड टेस्ट के लिए एक नोवेल टेक्नोलॉजी विकसित करने का दावा किया है। आईआईटी खड़गपुर ने कहा है कि उसके शोधकर्ताओं ने एक पोर्टेबल डायग्नोस्टिक उपकरण विकसित किया है, जो मात्र 400 रुपए की अनुमानित लागत पर सिर्फ 60 मिनट में कोरोनावायरस जांच कर रिपोर्ट देता है। 

ये डिवाइस RT-PCR के मानकों पर 100% खरी उतरी
आईआईटी खड़गपुर ने कहा कि इस पूरे नॉन-इनवेसिव लवाइवा-बेस्ड टेस्ट को बहुत ही कम लागत में लैब्स के उपकरणों में एक विकल्प के रूप में उपयोग कर सकते हैं, यह एक पोर्टेबल डिवाइस है। आईआईटी खड़गपुर ने कहा कि इस नई तकनीक के परिणामों को सिंथेटिक वायरल आरएनए का उपयोग करके RT-PCR (रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पोलीमरेज चेन रिएक्शन) मशीन से प्राप्त किए गए सभी मानक प्रयोगशाला नियंत्रणों का सख्ती से सत्यापन किया गया है। ये डिवाइस आरटी-पीसीआर के मानकों पर 100% खरी उतरी है और इससे हर बार सही रिजल्ट ही मिले हैं।

मोबाइल ऐप पर मिलेगा डिवाइस से की गई जांच का रिजल्ट
आईआईटी खड़गपुर के हवाले से न्यूज एजेंसी ने बताया, इस अल्ट्रा-लो-कॉस्ट पोर्टेबल डिवाइस का उपयोग कहीं पर भी किया जा सकता है। इसमें स्वाब के नमूने की जांच के लिए किसी विशेष लैब की जरूरत नहीं पड़ती। इस डिवाइस से लार्ज नंबर में टेस्ट किए जा सकते हैं। एक ही पोर्टेबल यूनिट का उपयोग बड़ी संख्या में सैंपलों की जांच में किया जा सकता है। हर जांच के बाद केवल पेपर और कार्ट्रेज बदलने की अवश्यकता होगी। डिवाइस से की गई जांच का रिजल्ट मोबाइल ऐप पर मिलेगा।  


उपकरण से अन्य वायरस की जांच भी जांच की सकती है
आईआईटी खड़गपुर के स्कूल ऑफ बायो साइंस के सहायक प्रोफेसर अरिंदम मोंडल ने बताया कि आईआईटी खड़गपुर शोधकर्ताओं द्वारा विकसित पोर्टेबल डिवाइस न केवल कोरोना की जांच करने में सक्षम है, बल्कि यह डिवाइस सामान्य प्रक्रिया का पालन करके आरएनए वायरस के किसी भी अन्य प्रकार के लक्षण का पता लगा सकता है। यदि पायलट सुविधा चाहिए तो आईआईटी खड़गपुर के शोधकतार्ओं द्वारा विकसित किए गए उपकरण की कीमत लगभग 2,000 रुपए होगी।

लाइसेंस और प्रोडक्शन प्रक्रिया के बाद मार्केट में लाया जाएगा
आईआईटी खड़गपुर ने कहा कि इस डिवाइस को इस हिसाब से बनाया गया है, जिससे इसे कम संसाधनों वाली जगह पर भी इस्तेमाल किया जा सके। यह डिवाइस मार्केट में बिकने के लिए तैयार है। कॉर्पोरेट या स्टार्ट-अप के साथ लाइसेंस और प्रोडक्शन जैसी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद इसे मार्केट में लाया जाएगा।

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