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India China Dispute: देर रात तक जारी रही सातवें दौर की सैन्य वार्ता, भारत ने दो टूक कहा- जल्द सैनिक पीछे हटाए चीन


हाईलाइट

  • जनरल हरिंदर सिंह और नवीन श्रीवास्तव ने भारतीय प्रतिनिध मंडल का नेतृत्व
  • शुक्रवार को शीर्ष मंत्रियों ने सीमा पर हालात की समीक्षा की थी
  • लद्दाख के इलाकों पर चीन की नजर

डिजिटल डेस्क, लद्दाख। पूर्वी लद्दाख में पिछले पांच महीने से जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए भारत ने सोमवार को चीन के साथ सातवें दौर की सैन्य वार्ता की। बैठक में भारत ने बीजिंग से अप्रैल पूर्व की यथास्थिति स्थापित करने और विवाद के सभी बिन्दुओं से चीनी सैनिकों की पूर्ण वापसी करने को कहा। यह जानकारी सरकारी सूत्रों ने दी है।

सूत्रों ने बताया कि पूर्वी लद्दाख में कोर कमांडर स्तर की वार्ता दोपहर करीब 12 बजे वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चुशूल क्षेत्र में भारतीय इलाके में हुई और साढ़े 8 बजे के बाद भी जारी रही। सीमा विवाद का जल्द समाधान के आसार कम ही दिखते हैं, क्योंकि भारत और चीन ने बेहद ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लगभग एक लाख सैनिक तैनात कर रखे हैं जो लंबे गतिरोध में डटे रहने की तैयारी है।

जनरल हरिंदर सिंह और नवीन श्रीवास्तव ने भारतीय प्रतिनिध मंडल का नेतृत्व 
इस बैठक के बारे में दोनों देशों की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एजेंडा विवाद के सभी बिन्दुओं से सैनिकों की वापसी के लिए एक प्रारूप को अंतिम रूप देने का था। भारतीय प्रतिनिधमंडल का नेतृत्व लेह स्थित 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह और विदेश मंत्रालय में पूर्वी एशिया मामलों के संयुक्त सचिव नवीन श्रीवास्तव कर रहे रहे हैं। ऐसा माना जाता है कि वार्ता में चीनी विदेश मंत्रालय का एक अधिकारी भी चीनी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा है।

शुक्रवार को शीर्ष मंत्रियों ने सीमा पर हालात की समीक्षा की थी
बता दें कि इससे पहले चीन अध्ययन समूह (सीएसजी) के शीर्ष मंत्रियों और सैन्य अधिकारियों ने पूर्वी लद्दाख में शुक्रवार को हालात की समीक्षा की थी और सोमवार को होने वाली वार्ता में उठाए जाने वाले प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श किया था। सीएसजी में विदेश मंत्री एस जयशंकर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत के अलावा तीनों सेना प्रमुख शामिल हैं।

लद्दाख के इलाकों पर चीन की नजर
बता दें कि भारत और चीन के बीच पैंगोंग लेक, गलवान घाटी और हॉट स्प्रिंग सहित अन्य क्षेत्रों में चीनी सैनिकों के दाखिल होने से ये विवाद पैदा हुआ है। 15 जून की रात लद्दाख की गलवान वैली में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई झड़प में भारत के एक कर्नल और 19 जवान शहीद हो गए थे। चीन के भी 43 सैनिकों के मारे जाने की खबर आई थी। हालांकि दोनों देशों की सेनाओं के बीच गोली नहीं चली। बातचीत के जरिए दोनों देश इस विवाद को सुलझानें की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक इसे पूरी तरह सुलझाया नहीं जा सका है।

डिसएंगेजमेंट के लिए तैयार हुए थे दोनों देश
30 जून को कोर कमांडर स्तर की मीटिंग में दोनों देश डिसएंगेजमेंट के लिए तैयार हुए थे। डिसएंगेजमेंट प्लान में तय हुआ था कि सेना धीरे-धीरे 2.5 से 3 किलोमीटर पीचे हटेगी और LAC के करीब बनाए गए मिलिट्री बिल्ड-अप को भी हटाया जाएगा। उधर, भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने 5 जुलाई को चीनी विदेश मंत्री वांग यी से बात की थी। इस बातचीत में भी दोनों देशों के बीच सेना को फेज वाइज पीछे हटाने पर सहमति बनी। इसके बाद चीन की सेना पेट्रालिंग प्वाइंट 14, 15 और 17A पर टेंट और स्ट्रक्चर हटाते दिखाई दी थी। चीनी सेना ने अपने वाहनों को भी करीब 2 किलोमीटर पीछे हटा लिया था।

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