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Border dispute: भारत-चीन की बातचीत कुछ सकारात्मक बिंदुओं पर खत्म, आज फिर होगी वार्ता

June 19th, 2020 09:17 IST
Border dispute: भारत-चीन की बातचीत कुछ सकारात्मक बिंदुओं पर खत्म, आज फिर होगी वार्ता

हाईलाइट

  • भारत-चीन की बातचीत कुछ सकारात्मक बिंदुओं पर खत्म, शुक्रवार को भी होगी वार्ता

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली, 18 जून (आईएएनएस)। भारत व चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद सीमा पर तनाव को कम करने के लिए गुरुवार को दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच हुई बातचीत कुछ सकारात्मक बिंदुओं पर खत्म हुई। हालांकि, कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। दोनों देशों के सैन्य अधिकारी शुक्रवार को भी बातचीत जारी रखेंगे।

पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास गलवान घाटी में सोमवार की रात भारत व चीनी सेना के बीच झड़प हो गई थी, जिसमें भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए थे। सूत्रों ने कहा, चीन के साथ और अधिक सौहार्दपूर्ण वातावरण में वार्ता हुई। बातचीत को आगे भी लेकर जाने पर सहमति बनी। दोनों सेनाओं द्वारा कल (शुक्रवार को) भी बातचीत किए जाने की उम्मीद है।

भारतीय सेना ने गुरुवार को कहा कि पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सैनिकों के साथ हुई हिंसक झड़प में शामिल कोई भी भारतीय जवान लापता नहीं है। ऐसी खबरें थीं कि झड़प के बाद सोमवार रात से 10 भारतीय सैनिक लापता थे। झड़प में कुछ चीनी सैनिकों के भी हताहत होने की बात सामने आई है, मगर इनकी संख्या एकल अंकों (10 से कम) में बताई जा रही है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि सोमवार रात भारतीय सेना के जिन जवानों पर हमला किया गया, उनके पास हथियार थे मगर उन्होंने चीनी सैनिकों पर गोली नहीं चलाई। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर हुई हिंसक झड़प के बाद बढ़े तनाव को कम करने के लिए बुधवार को भी शीर्ष भारतीय और चीनी सैन्य कमांडरों ने गलवान घाटी में बातचीत की थी, लेकिन तीन घंटे तक चले संवाद का कोई नतीजा नहीं निकल सका था।

झड़प गलवान नदी के दक्षिणी तट पर हुई, जो श्योक नदी के साथ अपने संगम से पहले पूर्व-पश्चिम दिशा में बहती है। संवाद यह सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है कि चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी गलवान घाटी से अपने सभी सैनिकों को वापस कर ले और सभी सैन्य शिविरों को भी हटा लिया जाए।

दोनों सेनाओं ने संघर्ष स्थल पर हजारों सैनिकों को फिर से तैनात किया है। सूत्रों ने कहा कि भारतीय सेना के अधिकारियों ने चीनी समकक्षों को स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें वापस जाना होगा। मेजर जनरल अभिजीत बापट, जो भारतीय सेना की 3-डिवीजन के कमांडर हैं, उन्होंने 15-16 जून की रात को हुई झड़प के संबंध में चीनी अधिकारियों के सामने कई पहलुओं को उठाया है।

चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के साथ झड़प में भारतीय सैनिक 1975 के बाद पहली बार शहीद हुए हैं। उस समय एक भारतीय गश्ती दल पर अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों द्वारा घात लगाकर हमला किया गया था।

सूत्रों ने कहा कि उस समय भारतीय सेना के पांच जवान शहीद हुए थे। एक सूत्र ने बुधवार को आईएएनएस से कहा था कि सोमवार की रात जब झड़प हुई उस समय भारतीय जवान चीनी सैनिकों की अपेक्षा कम थे। सूत्रों ने कहा कि इनकी संख्या का अनुपात 1:5 था। यानी पांच चीनी सैनिकों के मुकाबले एक भारतीय जवान मौके पर था। इसके बावजूद भारतीय जवानों ने चीनी सैनिकों का न सिर्फ डटकर मुकाबला किया, बल्कि उन्हें भी नुकसान पहुंचाया।

सूत्रों ने यह भी बताया कि चीन ने भारतीय सैनिकों का पता लगाने से पहले थर्मल इमेजिंग ड्रोन का इस्तेमाल किया था। वर्तमान में कई भारतीय जवान गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज चल रहा है। सूत्रों ने कहा कि शहीदों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि गंभीर रूप से घायल सैनिकों की संख्या 10 से अधिक है।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।