दैनिक भास्कर हिंदी: भारत बंद : कई राज्यों में फैली हिंसा, 9 की मौत

April 3rd, 2018

डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़। सोमवार को कई दलित संगठनों ने 'भारत बंद' का ऐलान किया। SC-ST एक्ट में किए गए संशोधन के विरोध में आयोजित बंद को लेकर सरकार व प्रशासन द्वारा मुस्तैदी बरती गई, इसके बावजूद देशभर में भड़की हिंसा में अब तक 9 लोगों की जान जा चुकी है। मध्यप्रदेश और राजस्थान के अलग-अलग इलाकों में हालात काफी नाजुक हैं। एमपी में 6, उत्तर प्रदेश में 2 और राजस्थान में एक व्यक्ति की मौत हो गई है, जबकि राजस्थान के बाडमेर में हिंसक झड़प में 25 लोग घायल हुए हैं। बिहार में भारत बंद के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में 3,619 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

 

पंजाब सरकार ने सतर्कता बरतते हुए सार्वजनिक परिवहन सेवा के साथ ही, सारे शैक्षिक संस्‍थान और मोबाइल सेवा बंद करने का फैसला लिया है। बता दें पंजाब के कई संगठनों ने भी इस बंद में शामिल होने फैसला लिया। प्रशासन द्वारा बंद के दौरान पैदा होने वाली किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सेना की तैनाती कर दी गई है। बठिंडा जिले में 2 दिन पहले से ही करीब 300 बीएसएफ व पंजाब पुलिस के जवानों की तैनाती कर दी गई है।

 

- उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक युवक की गोली लगने से मौत हो गई। 

- भारत बंद के दौरान ग्‍वालियर में 19 लोग घायल, जिनमें से दो की हालत गंभीर बनी हुई है। जिसके बाद एहतियातन तौर पर मंगलवार शाम छह बजे तक इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया गया।

- -ग्वालियर में प्रदर्शन कर रहे दो समूहों में संघर्ष हो गया, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई। इस घटना के बाद हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। जिसके बाद पूरे शहर में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं।

- भारत बंद के बीच कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी ट्वीट कर मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा 'दलितों को भारतीय समाज के सबसे निचले पायदान पर रखना RSS-BJP के DNA में है। जो इस सोच को चुनौती देता है उसे वे हिंसा से दबाते हैं। हजारों दलित भाई-बहन आज सड़कों पर उतरकर मोदी सरकार से अपने अधिकारों की रक्षा की मांग कर रहे हैं।'

 


 

- मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। 

 

 

 

- ग्वालियर में भी एक युवक की मौत की खबर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि पुलिस फायरिंग में इस युवक को गोली लगी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। 

- मेरठ में दिल्ली-देहरादून हाइवे पूरी तरह से बंद हो गया है। इसके अलावा 2 बसों को भी आग के हवाले कर दिया गया है। दलित प्रदर्शनकारियों ने मेरठ में कंकरखेड़ा थाने की शोभापुर पुलिस चौकी को फूंक दिया है। इसके अलावा कई वाहनों में भी आग लगाई गई है।

- राजस्थान के भरतपुर में महिलाएं लाठियां लेकर सड़कों पर उतरीं और जाम लगा दिया। वहीं, बाड़मेर में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प भी देखने को मिली। जिसमें पुलिस समेत करीब 25 लोग घायल हो गए। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया।

- मध्यप्रदेश के सागर और ग्वालियर में दलितों के प्रदर्शन के बाद धारा-144 लागू। वहीं भिंड के कुछ इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। भिंड के अलावा लहार, गोहद और मेहगांव में भी कर्फ्यू लगा दिया गया है।

- SC-ST एक्ट में बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दलित संगठनों की ओर से बुलाए गए भारत बंद के दौरान मध्यप्रदेश के ग्वालियर और चंबल इलाके में हिंसा की खबरें हैं। मुरैना में हालात इतने बिगड़ गए हैं कि मुरैना में कर्फ्यू लगा दिया गया है। मुरैना में बंद के दौरान मारपीट, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं होने के बाद लोग इस कदर बेकाबू हो गए कि प्रशासन ने कर्फ्यू लगा दिया। शहर में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है जो सुरक्षा और शांति बनाने की कोशिश कर रहा है। चप्पे चप्पे पर सुरक्षा बल नजर बनाए हुए हैं और संदिग्धों और उपद्रवियों को पकड़ा जा रहा है। इससे पहले बंद के दौरान ग्वालियर के कई इलाकों में भी तोड़फोड़, पथराव, गोलीबारी और आगजनी की खबरें आईं। वहीं भिंड में भीम सेना ने ट्रेन रोकने के लिए पटरी पर ही डेरा जमा लिया। इतना ही नहीं टोल प्लाजा पर प्रदर्शनकारियों ने कई गाड़ियों की हवा निकालकर उन्हें पंक्चर कर दिया। इससे गाड़ियां टोल नाके पर ही खड़ी हैं और लम्बा जाम लग गया है। बंद के चलते इलाके में भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किया गया था लेकिन इसके बाद भी हालात बेकाबू हो रहे हैं और लगातार घटनाएं बढ़ रही हैं। इसके साथ ही मुरैना में एक प्रदर्शनकारी की भी मौत की खबर है।

 

 

 - पंजाब के पटियाला में प्रदर्शनकारियों ने ट्रेन रोकी। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं भी मौजूद रहीं।

- राजस्थान के भरतपुर में महिलाएं लाठियां लेकर सड़कों पर उतरीं और जाम लगा दिया। वहीं, बाड़मेर में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प भी देखने को मिली। जिसमें पुलिस समेत करीब 25 लोग घायल हो गए। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया।

 

 

 

 

- बिहार के हाजीपुर में बंद समर्थको ने कोचिंग संस्थान पर हमला किया। इस दौरान कोचिंग संचालकों और बंद समर्थकों के बीच पथराव और मारपीट भी हुई। बंद समर्थकों ने छात्रों की साइकिल और डेस्क बेंच में आग लगा दी। 

- दलित प्रदर्शनकारियों ने मेरठ में कंकरखेड़ा थाने की शोभापुर पुलिस चौकी को फूंक दिया है। इसके अलावा कई वाहनों में भी आग लगाई गई है।

- मेरठ में दिल्ली-देहरादून हाइवे पूरी तरह से बंद हो गया है। इसके अलावा 2 बसों को भी आग के हवाले कर दिया गया है।

 

बिहार के आरा में CPIML के कार्यकर्ताओं ने ट्रेन रोककर प्रदर्शन किया। 

 

 

ओडिशा के संभलपुर में ट्रेन रोककर किया प्रदर्शन

 

-महाराष्ट्र की उपराजधानी नागपुर में दोपहर तकरीबन सवा 3 बजे के आस पास कार्यकर्ताओं हुजूम कामठी रोड स्थित गुरुद्वारा के पास के रेलवे ओवर ब्रिज पर चढ़ गया। 

-प्रदर्शनकारियों ने तमिलनाडू एक्सप्रेस को रोक दिया। कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए ट्रेन के इंजन पर जा चढ़े। मौके पर पहुंचकर RPF और GRP की टीम ने प्रदर्शनकारियों को शांत कराया।

-तकरीबन 24 मिनट तक ट्रेन थमने के बाद यह ट्रेन आगे रवाना हुई। चेन्नई से दिल्ली की ओर जानेवाली ट्रेन को स्टेशन से निकलते ही पटरियों पर खड़े कार्यकर्ताओं ने रोक लिया। 

-ट्रेन थमने के बाद कार्यकर्ता उसमें जा चढ़े। हालांकि प्रदर्शन के दौरान किसी भी पैसेंजर को कोई भी नुकसान या ट्रेन को किसी भी प्रकार की क्षति नहीं पहुंचाई गई। 

-इस मामले में दोनों सुरक्षा बलों की ओर से प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार नहीं किया गया। लेकिन धारा 179 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई है। इसके अलावा वहां खड़ी मालगाड़ी को भी आगे बढ़ने से प्रदर्शनकारियों ने रोके रखा था। प्रदर्शनकारियों की संख्या 200 के करीब बताई जा रही है।

 

 

- बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने भारत बंद को समर्थन देने का ऐलान किया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि उनकी पार्टी SC/ST एक्ट मामले को लेकर भारत बंद में आरजेडी का पूर्ण समर्थन है। मोदी सरकार संविधान बदलने में लगी है। देश में दलितों के साथ अत्याचार हो रहा है। अबकी बार दलित,पिछड़ा और ग़रीब विरोधी भाजपा को सबक सिखाना है।

 

 



राजनीतिक संगठनों ने बंद में शामिल होने के लिए दिए हैं अप्रत्यक्ष निर्देश 


गौरतलब है कि कोर्ट की तरफ से SC-ST एक्ट के संबंध में सुनाए गए फैसले से दलित समुदाय में भारी नाराजगी देखी जा रही है। बता दें कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक देश भर में SC-ST एक्ट के तहत साल 2016 में कुल 11060 ऐसे केस दर्ज हुए थे। हालांकि जांच के दौरान इनमें से 935 मामले पूरी तरह से गलत पाए गए हैं। जिसके बाद इसे लेकर सर्वोच्च न्यायाजय में एक याचिका दायर की गई। जिस पर फैसला सुनाते हुए अदालत ने SC-ST एक्ट में एक्ट के तहत तुरंत होने वाली गिरफ्तारी पर रोक लगा कर इन नियमों में कुछ सुधार किए हैं। जिसके तहत अब से किसी के खिलाफ शिकायत मिलने पर उसे तुरंत गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। अब से पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी की जांच के बाद यदि कोई पहली नजर में दोषी पाया जाता है तब ही उसकी गिरफ्तारी की जा सकती है।