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संकट में कर्नाटक सरकार: इस्तीफा दे मुंबई पहुंचे 11 विधायक, बीजेपी बनाएगी सरकार!

संकट में कर्नाटक सरकार: इस्तीफा दे मुंबई पहुंचे 11 विधायक, बीजेपी बनाएगी सरकार!

हाईलाइट

  • 13 विधायकों के इस्तीफे से संकट में कर्नाटक सरकार
  • कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने बीजेपी पर लगाया खरीदफरोख्त का आरोप

डिजिटल डेस्क, बेंगलुरू। विधायकों के इस्तीफे के बाद से कर्नाटक में सियासी संकट गहराता जा रहा है। अब तक कांग्रेस-जेडीएस के 13 विधायक इस्तीफा दे चुके हैं, ऐसे में कर्नाटक में एचडी कुमारस्वामी की अगुवाई वाली जेडीएस-कांग्रेस की गठबंधन वाली सरकार पर अल्पमत का संटक मंडरा रहा है। इस सियासी उठा-पटक का फायदा उठाकर बीजेपी भी कर्नाटक में अपनी सरकार बनाने की कोशिश में लगी हुई है। वहीं कांग्रेस कार्यकर्ता पार्टी दफ्तर के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। वह कांग्रेस विधायकों से इस्तीफा वापस लेने की मांग कर रहे हैं।      

दरअसल कांग्रेस और जेडीएस के 13 विधायकों ने शनिवार को विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय में अपना इस्तीफा दिया। कांग्रेस के 10 और जेडीएस के 3 विधायकों ने अपने इस्तीफे सौंपे। अब डैमेज कंट्रोल में जुटी कांग्रेस ने इस्तीफा देने वाले बागी विधायकों को मुंबई के एक होटल में भेज दिया है। इन सभी विधायकों को बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में सोफीटेल होटल में ठहराया गया है।

हालांकि अभी तक इन विधायकों का इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ है। विधानसभा स्पीकर रमेश कुमार ने कहा, रविवार को छुट्टी है। सोमवार को वह बेंगलुरु में नहीं हैं। इसलिए मंगलवार को इस मसले को देखेंगे। विधानसभा सत्र भी 12 जुलाई से शुरू हो रहा है। वहीं सियासी संकट के बीच मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी भी आज अमेरिका से लौट रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी का कहना है कि, कांग्रेस पार्टी एचडी कुमारस्वामी की सरकार को गिराने का प्रयास कर रही है। एचडी देवगौड़ा और उनके परिवार को बाहर करने का यह कांग्रेस का गेमप्लान है। इसके लिए सिद्धारमैया जिम्मेदार हैं। कुछ वरिष्ठ नेता भी इसमें शामिल हैं। 

बीजेपी पर आरोप लगाते हुए सिद्धारमैया ने कहा, पूरी तरह से साफ है कि बीजेपी इस दल-बदल के पीछे है। यह ऑपरेशन कमल है। सब कुछ ठीक है, चिंता मत कीजिए। सरकार बच जाएगी, उस पर कोई खतरा नहीं है। 

कांग्रेस कर्नाटक के सियासी संकट से निपटने में जुटी हुई है। पार्टी नेता सिद्धारमैया और केसी वेणुगोपाल ने नाराज विधायकों सौम्या रेड्डी और अंजलि निम्बालकर से इस्तीफा न देने की अपील की है। सिद्धारमैया ने कहा, मैं 5-6 विधायकों के संपर्क में हूं। सब पार्टी के वफादार हैं। यहां सवाल मेरे प्रति वफादार होने का नहीं, पार्टी के प्रति वफादार होने का है।

रविवार को डीके शिवकुमार ने पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा से मुलाकात की और राज्य में जारी सियासी संकट पर चर्चा की। एचडी देवगौड़ा के साथ बैठक के बाद डीके शिवकुमार ने कहा, उन्होंने (जेडीएस) अपने पार्टी नेताओं की बैठक बुलाई है। हमने मामला सुलझाने के लिए अपने पार्टी नेताओं की बैठक बुलाई है। मुझे लगता है ये जल्द ही खत्म हो जाएगा। देशहित और दोनों पार्टियों के हित के लिए हमें सरकार ठीक से चलानी होगी। मुझे विश्वास है कि विधायक वापस आ जाएंगे।

वहीं सियासी हलचल पर पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने कहा, मैं पार्टी सांसदों के साथ तुमकुर जा रहा हूं और शाम 4 बजे लौटूंगा। सिद्धारमैया और एचडी कुमारस्वामी ने क्या कहा, इस पर मैं कुछ बोलना नहीं चाहता। अभी हमें इंतजार करना चाहिए।

खुद को सीएम बनाए जाने की चर्चाओं पर कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खडगे ने कहा, मुझे पता नहीं है। मैं चाहता हूं कि गठबंधन जारी रहे। ऐसी सूचनाएं हमें बांटने के लिए फैलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा, रामलिंगा रेड्डी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं। काफी लंबे समय से बेंगलुरु में कांग्रेस का किला उन्होंने बचाकर रखा है। देखते हैं उनकी क्या समस्याएं हैं।

वहीं कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, बीजेपी लोकतंत्र को बाजार बनाकर खरीदफरोख्त, सत्ता और धनबल से चुनी हुई प्रजातांत्रिक सरकारों को गिराने का प्रयास कर रही है जिसका ताजा उदाहरण कर्नाटक है। कर्नाटक की चुनी हुई सरकार बीजेपी को हजम नहीं हो रही है। चुनाव हारने के बाद से ही बीजेपी वहां खरीदफरोख्त में लगी हुई है। मोदी जी और बीजेपी ने 12 प्रांतों में चुनी हुई सरकारों को गिराने का प्रयास किया। अरुणाचल प्रदेश से शुरु यह सिलसिला गोवा, मणिपुर, त्रिपुरा, गुजरात, उत्तराखंड होते हुए कर्नाटक तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा, अगर रक्षक ही भक्षक बन जाएंगे, लोकतंत्र के प्रहरी ही संविधान की धज्जियां उड़ाएंगे तो लोकतंत्र कैसे चलेगा। 

कर्नाटक विधानसभा में कुल 224 सीटें हैं। शनिवार को हुए इस्तीफों से पहले कर्नाटक विधानसभा में 78 सीट कांग्रेस, 37 जेडीएस, बसपा, 1, निर्दलीय-2, बीजेपी 105 और अन्य के खाते में कुल 1 सीटे थीं। अगर 13 विधायकों के इस्तीफे स्वीकार हो जाते हैं तो सदन के कुल विधायकों की संख्या घटकर 211 हो जाएगी। इसके बाद बहुमत के लिए 113 के बजाए 106 सीटों की जरूरत होगी। बीजेपी के पास 105 सीटें हैं ऐसे में उन्हें सिर्फ 1 विधायक की जरूरत है। विधायकों के इस्तीफे स्वीकार होने की स्थिति में बीजेपी के लिए सरकार बनाने के मौका बढ़ जाएगा वहीं कांग्रेस-जेडीएस की सरकार गिर जाएगी।

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