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National Youth Day:जब युवा के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका को पढ़ाया था हिन्दी का पाठ...

National Youth Day:जब युवा के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका को पढ़ाया था हिन्दी का पाठ...

हाईलाइट

  • स्वामी विवेकानंद की 157 वीं जयंती आज
  • स्वामी विवेकानंद की जयंती पर मनाया जाता है राष्ट्रीय युवा दिवस
  • स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रभावित है युवा वर्ग

डिजिटल डेस्क, दिल्ली। उठो जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य ना प्राप्त हो जाएं, ये महज एक कहावत नहीं है। इसे कहने वाले स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका में हिन्दी भाषा और हिन्दुस्तान की अलग छवि पेश की थी। स्वामी विवेकानंद वो शख्सियत हैं जो कर्म, निष्ठा, आदर, समपर्ण की परिभाषा हैं। कलकत्ता के एक छोटे से गांव में जन्मे विवेकानंद बचपन से ही अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि के थे। परिवार के धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण के प्रभाव से विवेकानंद के मन में बचपन से ही धर्म एवं अध्यात्म के संस्कार गहरे होते गये। युवा उनके जीवन से बेहद प्रभावित रहे। इसलिए उनका जन्मदिन युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। आइए इस अवसर पर जानते है विवेकानंद के जीवन से जुड़े कुछ अहम पहलू...

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी सन्‌ 1863 को हुआ था। उनका घर का नाम नरेंद्र दत्त था। उनके पिता विश्वनाथ दत्त पाश्चात्य सभ्यता में विश्वास रखते थे। वे अपने पुत्र नरेंद्र को भी अंग्रेजी पढ़ाकर पाश्चात्य सभ्यता के ढंग पर ही चलाना चाहते थे। नरेंद्र की बुद्धि बचपन से बड़ी तीव्र थी और परमात्मा को पाने की लालसा भी प्रबल थी। इस हेतु वे पहले ब्रह्म समाज में गए किंतु वहां उनके चित्त को संतोष नहीं हुआ। 

स्वयं भूखे रहकर अतिथि को कराते थे भोजन
सन्‌ 1884 में उनके पिता विश्वनाथ दत्त की मृत्यु हो गई। घर का भार नरेंद्र पर आ गया। घर की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। अत्यंत गरीबी में भी नरेंद्र बड़े अतिथि-सेवी थे। स्वयं भूखे रहकर अतिथि को भोजन कराते, स्वयं बाहर वर्षा में रातभर भीगते-ठिठुरते रहते और अतिथि को अपने बिस्तर पर सुला देते।
रामकृष्ण परमहंस की प्रशंसा सुनकर नरेंद्र उनके पास पहले तो तर्क करने के विचार से ही गए थे किंतु परमहंसजी ने देखते ही पहचान लिया कि ये तो वही शिष्य है जिसका उन्हें कई दिनों से इंतजार है। परमहंसजी की कृपा से इनको आत्म-साक्षात्कार हुआ फलस्वरूप नरेंद्र परमहंसजी के शिष्यों में प्रमुख हो गए। संन्यास लेने के बाद इनका नाम विवेकानंद हुआ।

अमेरिका को पढ़ाया था हिन्दी का पाठ
पूरे विश्व को भारत की सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्म से परिचय कराने वाले स्वामी विवेकानंद ही थे। उन्होंने अमेरिका के शिकागो में हुए विश्व धर्म सम्मेलन में हिंदू धर्म के महान विचारों से पूरी दुनिया का परिचय करवाया। रामकृष्ण परमहंस के शिष्य और हिंदू धर्म में गहरी आस्था रखने वाले विवेकानंद ने वेद, उपनिषद्, भगवद् गीता जैसे हिंदू शास्त्रों का गहन अध्ययन किया था। अमेरिका के शिकागो में हुए सम्मेलन में अपने भाषण से पूरी दुनिया को हिंदू धर्म के महान विचारों से प्रभावित किया था। 

समाज सुधारक थे स्वामी विवेकानंद
स्वामी विवेकानंद एक आध्यात्मिक गुरु और समाज सुधारक थे। स्वामी विवेकानन्द ने पुरोहितवाद, ब्राह्मणवाद, धार्मिक कर्मकाण्ड इत्यादि विसंगतियों को दूर करने का अथक प्रयास किया। वे हमेशा से युवाओं के प्रेरणास्रोत रहे। उन्होंने समाज के सेवा कार्य के लिए रामकृष्ण मिशन की स्थापना भी की थी।

भारतीय दर्शन के बिना विश्व अनाथ हो जाएगा- विवेकानंद
'अध्यात्म-विद्या और भारतीय दर्शन के बिना विश्व अनाथ हो जाएगा' यह स्वामी विवेकानंदजी का दृढ़ विश्वास था। अमेरिका में उन्होंने रामकृष्ण मिशन की अनेक शाखाएं स्थापित कीं। अनेक अमेरिकन विद्वानों ने उनका शिष्यत्व ग्रहण किया। 4 जुलाई सन्‌ 1902 को उन्होंने देह त्याग किया। वे सदा अपने को गरीबों का सेवक कहते थे। भारत के गौरव को देश-देशांतरों में उज्ज्वल करने का उन्होंने सदा प्रयत्न किया।

हर व्यक्ति में दिखता था ईश्वर
स्वामी विवेकानंद कहते हैं कि जिस पल मुझे यह ज्ञात हो गया कि हर मानव के हृदय में भगवान हैं तभी से मैं अपने सामने आने वाले हर व्यक्ति में ईश्वर की छवि देखने लगा हूं और उसी पल मैं हर बंधन से छूट गया। हर उस चीज से जो बंद रखती है, धूमिल हो जाती है और मैं तो आजाद हूं। अपने ज्ञानमय विचारों से सभी को प्रभावित किया। आइए जानते हैं स्वामी विवेकानंद के ऐसे अनमोल विचार, जो आपको जीवन में हौंसला देंगे। 

उनके द्वारा कहे गए अनमोल विचार
1. उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाए।
2. ख़ुद को कमज़ोर समझना सबसे बड़ा पाप है।
3. तुम्हें कोई पढ़ा नहीं सकता, कोई आध्यात्मिक नहीं बना सकता। तुमको सब कुछ खुद अंदर से सीखना है। आत्मा से अच्छा कोई शिक्षक नही है।
4. सत्य को हज़ार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य ही होगा।
5. बाहरी स्वभाव केवल अंदरूनी स्वभाव का बड़ा रूप हैं।
6. ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं। वो हम ही हैं जो अपनी आंखों पर हाथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अंधकार है।
7. विश्व एक विशाल व्यायामशाला है जहां हम खुद को मज़बूत बनाने के लिए आते हैं।
8. दिल और दिमाग के टकराव में दिल की सुनो।
9. शक्ति जीवन है, निर्बलता मृत्यु हैं। विस्तार जीवन है, संकुचन मृत्यु हैं। प्रेम जीवन है, द्वेष मृत्यु हैं।
10. किसी दिन, जब आपके सामने कोई समस्या ना आए-आप सुनिश्चित हो सकते हैं कि आप गलत मार्ग पर चल रहे हैं।

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